Monday, October 18, 2010

आज का युग और मोबाईल


"मुन्नी बदनाम हूई डार्लिंग तेरे लिये’’ यार! है तेरे मोबाईल में ये गाना, प्लीज ब्लूटूथ से सैंड कर ना।’’ यह किस्सा् मैं मेरे दोस्त शेखर का है। ऐसे कई वाकये हमारी ज़िदगी में आमतौर पर घटित होते हैं, मगर हम इन पर ध्यान नहीं देते हैं क्योंकि यह हमारी ज़िदगी का एक हिस्सा बन गये हैं। अगर हम भारत के इस संचार क्रांति युग से थोड़ा पीछे हरित क्रांति के युग में जाकर सोचे कि क्या इस तरह कल्पनाएँ उस समय लोगों द्वारा की जा सकती थी। जी हाँ, आज का यह संचार आधारित युग तत्कालीन समाज की कल्पना का ही प्रतिफल है।

                                                 संचार क्रांति ने हमें चूहे की आकृति का ऐसा दोस्त दिया है जिसके बगैर अब जीवन के बारे में सोचना भी मुमकिन नहीं है। जी हाँ, अब तो आप समझ ही गये होंगे कि यह चूहे की आकृति का हमारा दोस्त कोई और नहीं बल्कि हमारा मोबाइल फोन है। जिसने आज हमारे बीच की दूरियाँ को केवल कम ही नहीं किया, बल्कि हमें हर वक़्त एकदूसरे से जोड़े रखता है। यकीन मानिए इस मोबाइल फोन का संग ठीक "दोस्ती" फिल्म के अंधे -लंगड़े और "शोले" के जय-वीरू की दोस्ती को भी मात दे सकता है। मोबाइल जहाँ हमारे लिए एक प्यारा दोस्त है वहीं दूसरी तरफ यह उतना ही ख़तरनाक दुश्मन भी है। कॉलेज गर्ल नेहा की कुछ आपित्तजनक तस्वीरे इंटरनेट और दोस्तों के मोबाईल फोन पर मिली तो वो हैरान हो गई। मगर जल्द ही उसे याद आ गया कि यह तस्वीरे उसके पुराने प्रेमी ने अपने मोबाईल फोन से खिंची थी। इस तरह की घटनाओं से समाचार पत्र और न्यूज चनैल सरोबार नज़र आते हैं। आज आंतकवादियों, बड़ेबड़े माफियाओं से लेकर गली के गुड़े तक भी अलगअलग नम्बरों का प्रयोग कर लोगों को धमकाते हैं और अपने कारनामों को अंजाम तक पहुँचाते हैं। आज हर प्रकार की गतिविधी में मोबाईल का फोन का एक अहम् भूमिका अनिवार्य रूप में होती है। सर्वविदित निठारी कांड और आरूषि तलवार हत्याकांड में भी मोबाईल फोन के सहारे ही गुनहगारों को गिरफ्तार किया गया था। कुछ चालाक छात्र इसका प्रयोग परीक्षा में नकल करने के लिए करते हैं तो कुछ लड़कियों को अलग-अलग नम्बरों से फोन करके परेशान करते हैं। यह सारे कारनामे भी मोबाईल फोन के मदद ही किये जाते हैं।


मोबाईल फोन के कुछ ऐसे अनचाहे शारीरिक नुकसान हैं जिन्हें आप चाहकर भी रोक नहीं सकते हैं। कुछ दिनों पहले एक कैंसर रिसर्च इंस्टीटयूट के विशेषज्ञों की टीम ने घोषणा की थी कि मोबाइल का ज़रूरत से ज्यादा इस्तेमाल का कारण बन सकता है। इस संबंध में यूनिवर्सटी ऑफ पिट्सबर्ग कैंसर इंस्टीटयूट के डायरेक्टर डॉ. रोनाल्ड हर्बरमैंन ने अपने ही कर्मचारियों को एक संदेश भेजकर इस बात की जानकारी दी और उन्हें बेवजह मोबाइल इस्तेमाल करने से मना किया है। इस संबंध में शोधकर्ताओं द्वारा 10 सूत्री सलाह पेश की गई है। इसमें कहा गया है कि बच्चों को बहुत ज़्यादा ज़रूरी होने पर ही मोबाइल का इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि मोबाइल से निकलने वाला इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन उनके ब्रेन टिश्यू को जल्दी प्रभावित करता है। इसके अलावा जहाँ तक संभव हो मोबाइल को अपने शरीर के करीब नहीं रखना चाहिए, खासतौर से सोते वक्त। मोबाइल को चार्जिंग में लगाकर कभी भी बात नहीं करनी चाहिए। मोबाइल को सिर की मदद से कंधे पर दबा कर लगातार बात करने से गर्दन में कई परेशानियाँ पैदा हो सकती है।
लिहाजा यह कहा जा सकता है कि मोबाइल को लेकर इंसान की हालात ठीक उस तरह की हो गई है कि मोबाइल आस्तीन में छुपे उस सांप की तरह है जो दिखाई नहीं देता है। आजकल मोबाइल से किये जाने वाले प्यार ने इंसान को उस दहलीज पर लाकर खड़ा कर दिया है जहाँ आगे कुआँ और पीछे खाई है। लेकिन फिर भी मोबाईल से हम पूरी तरह मूँह नहीं मोड सकते हैं क्योंकि यह आज हमारी आवश्यक आवश्यकता बन गई है जिसके बिना जीवन की कल्पना तक नहीं की जा सकती है ।

इंटरनेट और आज


बहुत दिनों से सोचते-सोचते आज सोचा कि क्यों न अपने ब्लॉग पर कुछ लिखा जाय और मैंने निश्चय किया कि सबसे पहला ब्लॉग पोस्ट इंटरनेट के नाम रहना चाहिये क्योंकि इसके माध्यम से ही तो मैं आगे भी आपलोगों को अपने दिल की बात बताऊँगा । है ना...........!

इंटरनेट आज 40 साल का हो गया। मात्र चालीस सालों में इंटरनेट ने समूचे संचार जगत की बुनि‍यादी प्रकृति‍ ही बदल डाली है। 2सि‍तम्‍बर 1969 को लॉस एंजि‍ल्‍स स्‍थि‍त कैलीफोर्निया वि‍श्‍ववि‍द्यालय में 20 लोग क्‍लेनरॉक प्रयोगशाला में एकत्रि‍त हुए और उन्‍होंने इंटरनेट के प्रयोग का पहला नजारा देखा जि‍समें दो कम्‍प्‍यूटर अर्थहीन डाटा संप्रेषि‍त कर रहे थे,इन दोनों कम्‍यूटरों को 15 फुट लंबे तार से जोड़ा गया था। यह पहला सैन्‍य संचार प्रयोग था। कम्‍प्‍यूटर नेट शुरूआत थी। तब से लेकर आज तक 40 साल हो गए हैं। इन 40 सालों में इंटरनेट यूजरों की तादाद तेजी बढ़ी है।सन् 1999 में 25 करोड़ यूजर थे,सन् 2002 में 50 करोड़,सन्2006 में 100 करोड और सन् 2008 में 150 करोड यूजर दर्ज कि‍ए गए हैं। इसमें चीन में 29.8 करोड़ (22.4 प्रति‍शत),अमेरि‍का में 227 मि‍लि‍यन ( 74 प्रति‍शत) ,जापान में 94 मि‍लि‍यन (73.8 प्रति‍शत),भारत में 81 मि‍लि‍यन (7.1 प्रति‍शत)ब्राजील 68 मि‍लि‍यन (34.3 प्रति‍शत) , जर्मनी 55 मि‍लि‍यन ( 67 प्रति‍शत) , ब्रि‍टेन 48 मि‍लि‍यन (72 प्रति‍शत), फ्रांस 41 मि‍लि‍यन(66 प्रति‍शत), रूस 38 मि‍लि‍यन(27 प्रति‍शत),दक्षि‍ण कोरि‍या 37 मि‍लि‍यन (76 प्रति‍शत),आस्‍ट्रेलि‍या 17 मि‍लि‍यन ( 80.6 प्रति‍शत) यूजर हैं। इंटरनेट के आने के बाद वि‍मर्श्‍ा,लेखन,अखबार,साहि‍त्‍य, जीवनशैली, सैन्‍य नि‍यंत्रण,सैन्‍य संचालन, युद्ध ,वि‍कास आदि‍ की प्रकृति‍ में मूलगामी बदलाव आया है। संचार को रीयल टाइम में सम्‍पन्‍न करना संभव हुआ है। भवि‍ष्‍य में इंटरनेट का और भी तेज गति‍ से वि‍कास होगा,जो लोग इस माध्‍यम का इस्‍तेमाल नहीं कर रहे हैं वे भी इसका इस्‍तेमाल करेंगे। भारत में इसके वि‍कास की दर बेहद कम है। सकल जनसंख्‍या के मात्र सात प्रति‍शत हि‍स्‍से तक ही यह माध्‍यम पहुंच पाया है। इसका अर्थ यह भी है कि‍ भारत संचार क्रांति‍ से अभी कोसों दूर हैं। 100 लोगों में से मात्र 7 लोग ही नेट का इस्‍तेमाल करते हैं,लि‍खने का काम तो और भी कम लोग करते हैं। भारत में हि‍न्‍दी में स्‍थि‍ति‍यां ज्‍यादा सुखद नहीं है। ज्‍यादातर हिंदीभाषी राज्‍यों दस घंटे से लेकर 18 घंटे तक बि‍जली गायब रहती है, टेलीफोन कनेक्‍शनों की भी संख्‍या कम है। कहने का अर्थ यह है कि‍ हिदीभाषी समाज संचार क्रांति‍ में अभी शैशव अवस्‍था में है। हिंदी ब्‍लॉग लेखकों के तकरीबन दस हजार ब्‍लाग हैं।


इंटरनेट एक ऐसा विषय है जिसपर ना जाने कितनी बाते लिखी जा सकती हैं पर समयाभाव के कारण आज सिर्फ इतना ही आगे फिर कभी.......।