Wednesday, October 20, 2010

क्या प्यार यही है?


जिंदगी में इंसान को कई बार प्यार हो सकता है। यह बात दूसरी है कि पहला प्यार कोई भुला नहीं पाता। लेकिन सच्चा प्यार बड़ी ही मुश्किल से किसी को नसीब होता है...आज की हाईटेक लाइफस्टाइल में प्यार की परिभाषा बदल गई है...प्यार भी हाईटेक हो गया है...लोग प्यार कई चीजें देखकर करने लगे हैं...मसलन जेब...सैलरी...लाइफस्टाइल...और इन सबसे बढ़कर ये मायने रखता है कि आप सामनेवाले से ज्यादा हाईप्रोफाइल हैं या नहीं...साथ ही उनके जैसी समतुल्यता रखते हैं या नहीं...आज प्यार ने अपनी परिपक्वता को हासिल कर लिया है...
आज तक किसी ने प्यार की सटीक परिभाषा नहीं दी है...प्यार को किसी एक परिभाषा में बांध कर भी नहीं रखा जा सकता...प्यार की परिभाषा में समय-समय पर बदलाव आते रहे हैं...प्यार में कभी राधा कृष्ण का उदाहरण दिया जाता है...कभी हीर रांझे का...तो कभी लैला मजनू का...लेकिन आज के ज़माने में कहां हीर रांझे का प्यार...कहां जीने मरने की कसमें खानेवाले...प्यार में काभी बदलाव आ गया है...प्यार करने के तरीके में बदलाव आ गया है...पहले प्यार करने वाले एक दूसरे को मिलने को...उसकी एक झलक पाने को बेताब रहते थे...एक दूसरे की शक्ल देखने को तरस जाया करते थे...जिससे प्यार होता था उसके घर के चक्कर लगाया करते थे...लेकिन आज किसके पास इतना वक्त है...आज सभी अपने अपने काम में व्यस्त हैं...और 'तू नहीं तो कोई और सही' की तर्ज पर कोई तीसरे की तुरंत तलाश कर लेते हैं...अब फोन पर नेट कनेक्शन उपलब्ध हैं...वहीं नेट के विडियो कॉन्फ्रेंसिग ने दूरियां भी मिटा दी है...फोन ने लोगों को काफी राहत दी है...और दूरसंचार कंपनियों ने लोगों को घंटो बात करने की सुविधा उपलब्ध करा दी है...जिससे लोग हर समय फोन से चिपके नज़र आते हैं...आज के समय में जिसके पास फोन नहीं आता वो खुद को व्यस्त करने के नए नए हथकंडे अपना लेते हैं...देखा जाए तो आजकल की लड़कियां बिना एक भी ब्यॉफ्रेंड के नहीं रह सकतीं...खासकर कॉलेज गोइंग गर्ल्स में तो ब्यॉफ्रेंड बनाने का क्रेज काफी फेमस है...वैसे सही भी है...लड़कियां ब्यॉफ्रेंड बनाकर ख़ुद को सुरक्षित महसूस करतीं हैं...एक लड़का हर वक्त उसकी ख़ैरियत पूछता है...उसका ख़्याल रखता है...इसमें बुरा भी क्या है...आजकल लड़के-लड़कियां बिना एक ख़ास फ्रेंड के जिना बेकार का जीना समझते हैं...
जब पहला-पहला प्यार होता है तो लड़कियां अपनी खूबसूरती को लेकर काफी सतर्क हो जाती हैं...वो ब्यूटी पार्लरों के चक्कर लगाने लगती हैं...तो वहीं लड़के अपने आप को जिम में व्यस्त कर लेते हैं...उनको अपनी पर्सनेलिटी की फिक्र होने लगती है...उसके बाद बारी आती है बाइक्स के क्रेज़ की...वैसे भी लड़कियों को इम्प्रैस करने में गाड़ियां काफी महत्वपूर्ण स्थान रखतीं है...धीरे-धीरे प्यार गहराने लगता है...लेकिन ये प्यार परवान कम ही चढ़ पाता है...
आज के समय में प्यार की परिभाषा बदल गई है...लोग प्यार को ज्यादा तरज़ीह नहीं देते...आज आपका जॉब ज्यादा मायने रखता है...ऐसा नहीं है कि प्यार करने वाले ख़त्म हो गए हैं...बल्कि प्यार में बचकानी हरकतों को छोड़ लोग अब गहन चिंतन के बाद ही कदम बढ़ाते हैं...हर तरह से नाप-तौल कर पूरी तरह खरा उतरने के बाद ही प्यार करते हैं...लड़कियां भले ही इनमें जल्दबाजी कर बैठे...लेकिन लड़के काफी सोच समझकर कोई फैसला लेते हैं...लड़कियां आज भी प्यार करने में दिल का इस्तेमाल करती हैं जबकि लड़के दिल का नहीं दिमाग का इस्तेमाल करते हैं...लड़कियां बहुत जल्दी जज्बाती हो जाती हैं...लेकिन लड़कों का दिल इस मामले में थोड़ा मज़बूत होता है...हम ये भी नहीं कह सकते कि लड़के सच्चा प्यार नहीं करते...लड़कों को भी कभी-कभी ही सही लेकिन किसी न किसी से सच्चा प्यार ज़रूर होता है...कहते हैं वो जवानी ही क्या जिसकी कोई कहानी न हो...सच ही तो है...एक लड़का अगर किसी से सच्चा प्यार कर बैठे तो उसे भी अपने प्यार को ख़ोने का उतना ही ग़म सताता है जितना एक लड़की अपने प्यार को खोने पर मातम मनाती है।
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सफलता हमारे हाथ में है.....




हर व्यक्ति की मूलभूत चाहत होती है कि उसके जीने के मायने हों। वह इतना सक्षम हो कि न केवल अपनी वरन अपने परिजनों-परिचितों की भी आवश्यकताओं एवं इच्छाओं की पूर्ति कर सके। समाज में उसका सम्माननीय स्थान हो। उसकी राय हर छोटे-बड़े काम में ली जाए। वह लोगों की सोच को अपनी इच्छानुसार प्रभावित कर सके।

सीधे शब्दों में कहें तो हर व्यक्ति चाहता है कि उसके पास काम, दाम, नाम, सम्मान और कमान सभी हो। जिस व्यक्ति के पास ये उपलब्धियाँ हों उसे सफल कहा जा सकता है। सफल का अर्थ है- स+फल = फल सहित, अर्थात उपलब्धि सहित, महत्व सहित। सफलता का अर्थ डिग्री पाना, नौकरी लगना, पैसा कमाना मात्र नहीं है। व्यक्ति की सामाजिक हैसियत एवं उपयोगिता भी उसकी सफलता की कसौटी है। इस बात को यूँ भी कहा जा सकता है कि यदि कोई व्यक्ति सफल होना चाहता है तो उसका उपरोक्त पाँच उपलब्धियों पर अधिकार होना चाहिए।

हम देखते हैं हमारे चारों ओर ऐसे कई लोग हैं, जो सफलता के लिए कठोर श्रम करते हैं पर सफलता कुछ गिने-चुने लोगों को ही मिलती है। हम इसे तकदीर का खेल कहते हैं। पर यदि विश्लेषणात्मक नजरिए से हम देखें तो पाएँगे कि सफल एवं असफल व्यक्तियों में एक मूलभूत अंतर है। यद्यपि कठोर श्रम दोनों करते हैं, पर सफल व्यक्तियों के पास एक स्पष्ट दृष्टिकोण होता है। वे अँधेरे में तीर नहीं चलाते। उन्हें प्रस्तुत समस्या की समझ होती है और उसके निदान की एक तर्कपरक, व्यावहारिक योजना होती है।

जहाँ दरवाजों से पहुँचा जा सकता है, वहाँ दीवारों में सिर टकराकर रास्ता बनाने की कोशिश करना कठोर श्रम का उदाहरण हो सकता है, पर साथ ही यह उदाहरण है वज्र मूर्र्खता का। कुछ सूत्र हैं जो उन दरवाजों की तरह हैं जिनसे सफलता के सिंहासन तक पहुँचा जा सकता है। ये दस सूत्र हैं-

कार्य पूर्ण लगन और उत्साह से करें
सफलता के मार्ग पर व्यक्ति की गाड़ी तभी तक चलती है, जब तक इसमें लगन एवं उत्साह का ईंधन होता है। लगन एवं उत्साह उत्पन्न होता है समर्पण एवं चाहत से। सफलता की पहली शर्त, पहला सूत्र यह है कि सफलता की ऐसी चाहत होनी चाहिए जैसे जीवन के लिए प्राणवायु की। सफलता का रहस्य ध्येय की दृढ़ता में है।

समय के पाबंद रहें
समय की महत्ता दर्शाते ढेरों कहावतें, मुहावरे दुनिया की लगभग हर भाषा में मिल जाएँगे। यह सत्य सभी मानेंगे कि समय अपनी चाल से चलता है न धीमा न तेज। समय उनके लिए अच्छा चलता प्रतीत होता है, जो समय के साथ चलते हैं और उनके लिए खराब चलता है, जो समय से पीछे चलते हैं या तेज भागने की कोशिश करते हैं। जब तक समय प्रबंधन (टाइम मैनेजमेंट) नहीं होता, तब तक समय हमारे नियंत्रण के बाहर चलता रहेगा। अतः दीर्घसूत्रता या काम का आज-कल पर टालमटोल नहीं होना चाहिए।

सिद्धांततः जीवन में वही सबसे अधिक सफल व्यक्ति है, जो सबसे अधिक जानकार है।
जो क्षेत्र हमारी दृष्टि परिधि में होता है हम साधारणतः उसी के प्रति सचेत एवं जागरूक होते हैं। यही बात हमारे दृष्टिकोण या नजरिए के बारे में भी सत्य है। हमारा कार्यक्षेत्र एवं नियंत्रण क्षेत्र बढ़ाने के लिए आवश्यक है कि हम अपना दृष्टिकोण व्यापक बनाएँ। अपने दृष्टिकोण को व्यापक बनाने का तरीका है अपने आँख-कान खोलकर रखना, बुद्धि को सूक्ष्म और हृदय को विशाल बनाना।


सकारात्मक दृष्टिकोण रखें
अँधेरे में रास्ता दिखाने हेतु एक दीपक पर्याप्त होता है। आशावाद के जहाज पर चढ़कर हम मुसीबतों एवं समस्याओं के तूफानों से उफनते असफलताओं के महासागर को भी पार कर सकते हैं।

अपनी क्षमताओं और कमजोरियों को पहचानें
हर व्यक्ति में कुछ न कुछ कमजोरियाँ होती हैं। शतरंज के खेल की तरह हमें हर कदम सोच-समझकर अपनी ताकत एवं सीमाओं का आकलन करते हुए उठाना चाहिए। हाँ, सावधानी शतरंज के खेल से भी अधिक रखनी चाहिए, क्योंकि जीवन कोई खेल नहीं है।

अपनी हार की संभावना समाप्त कर दें
जीत या सफलता सुनिश्चित करने का तरीका है हार की संभावना समाप्त कर देना। सफलता की तैयारी का महत्वपूर्ण भाग है उन कारकों को पहचानकर मूल से समाप्त कर देना जिनसे असफलता आ सकती है। ये वे कारक हैं, जो आपकी तैयारी की कमजोर कड़ी हैं। ये वे कारक हैं, जो लक्ष्य से आपका ध्यान विचलित कर सकते हैं। ये वे कारक हैं जिनका आपका प्रतिद्वंद्वी लाभ उठा सकता है। पराजय से बचना विजय ही को निमंत्रण है। नुकसानी की संभावना समाप्त होने पर ही नफे की शुरुआत है। इसी तरह असफलता की संभावना से रहित तैयारी ही सफलता की गारंटी है।

कार्यों से ही दूसरों का दिल जीता जा सकता है न कि महज शब्दों से
व्यक्ति का आचरण एवं उसके कर्म ही उसकी पहचान होते हैं। यदि हम दूसरों के हृदय में स्थायी जगह चाहते हैं तो इसका आधार हमारे ईमानदारीपूर्ण कर्म ही हो सकते हैं। महज शब्दों द्वारा अपनत्व बताना रेत पर बनी लकीरों की तरह होता है जिन्हें हर आती-जाती सागर की लहर बनाती-मिटाती रहती है। पर कर्म पाषाण पर उकेरी आकृति की तरह होता, जो एक स्थायी स्मृति बन जाता है।

ईमानदारी और उदारता को अपनी पहचान बनाएँ
कोई भी सामाजिक गतिविधि जनसहयोग के बगैर पूर्ण नहीं हो सकती। लोग तभी हमारे साथ रहेंगे जब उन्हें हमारी ईमानदारी पर भरोसा होगा और हमारा साथ उन्हें गरिमापूर्ण महसूस हो। बेईमानी, भय और उपेक्षा की नींव पर हम सहयोग की इमारत खड़ी नहीं कर सकते।

हमेशा खुश रहें दूसरों को भी खुश रखें
यह सूत्र जितना नैतिक एवं मानवीय मूल्य रखता है, उतना ही वैज्ञानिक मूल्य भी रखता है। मनोविज्ञान के अनुसार हम अपना श्रेष्ठ तभी दे सकते हैं या अपनी क्षमताओं का अधिकतम उपयोग तभी कर सकते हैं, जब हम सौहार्दपूर्ण तनावरहित वातावरण में काम कर रहे हों। जिस प्रकार जहाँ प्रकाश हो वहाँ अंधकार नहीं हो सकता, उसी प्रकार जहाँ खुशी हो, प्रसन्नता हो वहाँ तनाव नहीं हो सकता।

कभी दूसरों की नकल न करें
कमान उन्हीं के हाथों में होती है, नेता वही होते हैं, जो अपना मार्ग स्वयं निर्माण करते हैं और उस पर जनसमूह को ले जाते हैं। इतिहास ऐसे ही नेतृत्व को याद रखता है। अंधानुकरण कर भेड़चाल चलने वाले कभी सफल नहीं हो सकते। सफलता की रेखाएँ उन्हीं मनुष्यों के कपाल में अंकित हैं जिनके हृदय में नवीन आविष्कारों की आँधी पैदा हुआ करती है।

उपरोक्त दस सूत्र हमारे हाथों की दस उँगलियों की तरह हैं। जब दसों सूत्र एक साथ काम करते हैं, तब दोनों हाथों की मुट्ठियों की गिरफ्त में होता है सफलता का परचम।

ये सूत्र चमत्कारिक सफलता दे सकते हैं, पर मात्र सूत्र पढ़ने से चमत्कार नहीं हो सकता है। सतत प्रयास, अवलोकन और अभ्यास से ही सफलता के ये सूत्र सिद्ध हो सकते हैं। यहाँ यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि सफलता पाने में जितने कुशलता, संकल्प और श्रम की आवश्यकता होती है, उससे कहीं अधिक कुशलता, संकल्प और श्रम इस सफलता को बनाए रखने के लिए लगते हैं।

ये चेहरा किसका चेहरा है ?


सुबह- सुबह कितनी चीजें हैं ,जो हमारे मूड को अच्छा बनाने के लिये होती हैं , खुला आसमान ,ताजी हवा, मंदिर की घण्टी की आवाज, नदी की कल कल, पत्तों का धिमे धिमे हिलना ...।लेकिन कभी हमने ये गौर किया है कि जब हम बच्चों से बात करते हैं या उनके साथ समय बिताते हैं तो कितना बेहतर महसुस करते हैं ...क्यों होता है ऐसा ?
जवाब बहुत सिंपल है बच्चों के सामने हमें नकली चेहरा बनाकर नहीं जाना पडता है, इसलिये भी कि हम जानते हैं कि हमारी किसी भी बात का वो बुरा नहीं मानते हैं। हो सकता है कि वो कुछ देर के लिये रूठ जाये पर उसे मनाना भी उतना ही आसान होता है बस उसके सामने उसकी पसंद की चीज रख दो जैसे- चॉकलेट, कॉमिक्स, आइसक्रिम आदि। बच्चों की यही सरलता हमें अच्छा महसुस कराती है क्योंकि हम सब अपने नकाब के साथ कम्फर्टेबल नहीं होते, हम जानते हैं कि ये हमारा असली चेहरा नही हैं और यह झुठ ही हमारा बोझ होता है ,जिसे हम लाईफ टाईम कैरी करते हैं ।
एक बात बताइये हम हैवी महसुस नहीं करते ? लोगो का जवाब होता है क्या करुँ लोग बडा हर्ट करते हैं और मैं नहीं चाहता हूँ कि मुझे कोई बार बार हर्ट करें । मैं थक गया हूँ अब बर्दाश्त नहीं होता ।
लेकिन मैने सोचा कौन सा बोझ सबसे बडा है लोगो की दी हुई चोट या अपने चेहरे पर नकाब ओढने का यानी हर वक्त एक्टींग करने का ................?
इसका जवाब आप अपने कमेन्ट्स देकर दीजिये........।

songs .....i like most...


मुझे संगीत का शौक न जाने से कहाँ से लगा ये तो मैं नहीं जानता हूँ क्यों कि मुझे ये पता ही नहीं चला कि कब संगीत मेरी जिन्दगी का अहम हिस्सा बन गया। सोते जागते, खाते पीते उठते बैठते सब जगह संगीत ही संगीत....!
आज मैं आपको अपने कुछ प्रिय संगीत के बारे में बताता हूँ जो मैने पिछले कुछ दिनों से सुना है और मुझे वो दिल को छुने वाले लगते हैं।
सबसे पहले बात करता हूँ फिल्म " खट्टा मिठा " की, जिसका सजदा....गाना मुझे बहुत अच्छा लगता है ।
akhiyaanch basada tera ?? tera maahiye  sajade kiya hai laakhon laakhon duwaaye maangi paaya hai maine phir tujhe chaahat ki teri maine haq mein hawaaye maangi paaya hai maine phir tujhe tujhase hi dil yeh behala, tu jaise karma pehala chaahu na phir kyun main tujhe jis pal na chaaha tujhako uss pal sajaaye maangi paaya hai maine phir tujhe sajade kiya hai laakhon laakhon duwaaye maangi paaya hai maine phir tujhe  jaane tu saara woh dil mein jo mere ho padh le tu aake har dafa ho o o jaane tu saara woh dil mein jo mere ho padh le tu aake har dafa nakharein se na ji bhi hote hai raaji bhi tujhase hi hote hai khafa jaane tu baatein saari katati hai raatein saari jalate diye se an bujhe uth uthake raaton ko bhi teri wafaayein maangi paaya hai maine phir tujhe sajade kiya hai laakhon laakhon duwaaye maangi paaya hai maine phir tujhe  chaahat ke kaajal se kismat ke kaagaj pe apani wafaayein likh jara bole jamaana yuun, mein tere jaise hoon tu bhi toh mujhasa dikh jara mera hi saaya tu hai, mujhamein samaaya tu hai har pal yeh lagata hai mujhe  khud ko mitaaya maine, teri balaayein maangi paaya hai phir maine tujhe  chaaha tu chaahe mujhako, aise adaayein maangi paaya hai maine phir tujhe

इस गाने को गाया है के.के. और सुनिधी चौहान ने और संगीत निर्देशक हैं प्रितम।

एक और गाना जो मुझे बहुत अच्छा लगता है वो है "वन्स अपोन अ टाइम इन मुम्बई" का पी लूँ...
pee loon tere nile nile nainon se shabnam pee loon tere gile gile hoto ki sargam pee loon hai pine ka mausam (tere sang ishq taari hai, tere sang ik khumari hai tere sang chain bhi mujhako, tere sang bekraari hai) - (2) tere bin jee nahi lagada, tere bin jee nahi sakada tujhape hai haare maine vaare do jahaan kurbaan, meherbaan, ke main toh kurbaan sun le jara, tera kurbaan  hosh mein rahu kyun aaj main tu meri baahon mein simati hai, mujhame samaayi hai yuun jis tarah ki koyi hum nadi tu mere sine mein chhupati hai, sagar tumhara main hoon pee loon teri dhimi dhimi leharo ki chham chham pee loon teri saundi saundi saanso ko har dum pee loon hai pine ka mausam (tere sang ishq taari hai, tere sang ik khumari hai tere sang chain bhi mujhako, tere sang bekraari hai) - (2)  shaam ko milu jo main tujhe toh bura subah na jaane tu kuchh maan jaati hai yeh har lamaha, har ghadi, har pehar hi teri yaadon se tadapa ke, mujhako jalaati hai yeh pee loon main dhire dhire jalane ka yeh gum pee loon inn gore gore haantho se hum dum pee loon hai pine ka mausam (tere sang ishq taari hai, tere sang ik khumari hai tere sang chain bhi mujhako, tere sang bekraari hai) - (2) tere bin jee nahi lagada, tere bin jee nahi sakada tujhape hai haare maine vaare do jahaan kurbaan, meherbaan, ke main toh kurbaan sun le jara, tera kurbaan
इसे गाया है मोहित चौहान ने और संगीत दिया है प्रितम ने।
कुछ और गीत हैं लेकिन उसके बारे फिर कभी ......तब तक के लिये नमस्कार, सलाम , अदाब, प्रणाम, अलविदा.....