Sunday, October 24, 2010

बच्चों के साथ सुकून



मुझे ये आपलोगों को बताते हुए बहुत ही हर्ष हो रहा है कि मैंने और मेरे दोस्त राजू ने मिलकर एक योजना बनाई। वैसे तो मैंने और राजू ने कई योजनाएँ बार-बार बनाई हैं और मैंने उसमें पूर्ण रूप से सहभागिता निभाने की पूर्ण कोशिश की है, और सफल भी हुआ हूँ ।लेकिन मेरे दोस्त में ना जाने ये एक कमी है या अच्छाई है कि वह हर काम को कुछ दिन करने के बाद शायद उससे बोर होकर उसे छोड देता है या कुछ और बात से .....। कमी इसलिए कि उसमें एकाग्रता एवं स्थिरता की कमी है और अच्छाई इसलिये कि युवाओं को हर काम को करने का अवसर मिलना चाहिए और उनमें विविधता होनी चाहिए । जो भी हो मेरे दोस्त में एक बात तो है कि नए- नए विचारों को वह जन्म देता है और उसे पुरा करने की कोशिश भी करता है भले ही वह पुरा हो या न हो ।मैं अपने दोस्त का शिकायत या प्रशंसा नहीं कर रहा हूँ ये मेरे दिल की बात थी जो मैने आप लोगो से शेयर की । Anyway हम अपने मुल विषय पर आते हैं और आज का मुल विषय हमारे नए योजना के बारे में है ।
आपलोगों को मालूम कि मै और मेरे दोस्त ने मिलकर लगभग 4 माह पूर्व एक योजना बनाई group study का (इस योजना के विषय में फिर कभी ) और इसी दौरान हमने अभी कुछ ही दिन पूर्व एक योजना बनाई कि क्यों ना हम लोग कुछ बच्चों को,जो पढाई में कमजोर हैं, मुफ्त शिक्षा दें और उनका आधार मजबुत करें । और इस योजना के तहत मैंने अभी तक सिर्फ एक दिन का क्लास लिया और मैं आपको क्या बताऊँ कि मुझे कितनी खुशी मिली और ये खुशी और दुगुनी हो गई जब मैंने बच्चों का उत्साह देखा और खाश कर लडकियों का उत्साह देखते बना । हमने ये आशा नहीं की थी कि इतनी ज्यादा संख्या में बच्चियाँ पढने का उत्साह दिखायेंगी । लेकिन देखकर बहुत ही अच्छा लगा ।
उत्साह बढाने का काम तो बच्चों का बीच-बीच में जोर-जोर से बोलना कर रहा था अर्थात यदि मैने पुछा कि कौन-कौन गिनती पुरा जानता है तो बच्चों ने पुरे उत्साह के साथ जोर से हम बोलने के साथ अपने अपने हाथ ऊपर कर लिये। सच कहा जाए तो बच्चों के साथ समय बिताने में जो सुकून मिलता है वो कहीं और नहीं मिलता । आप लाख दुख -चिन्ताओं से घिरे हों पर बच्चों के सामने जाने पर सारे छु-मन्तर हो जाते हैं। मैने अपने पिछले ब्लॉग "ये चेहरा किसका चेहरा है?" में बच्चों के बारे ज्यादा बातें की है।

क्या आपलोगों ने कभी ऐसा अनुभव किया है ? यदि किया है तो कृपया अपना अनुभव comments के माध्यम से जरूर बताएँ । यदि नहीं किया है तो एक बार जरूर करें ।

अभी कुछ महिने पहले आमिर खान की एक फिल्म आई थी "तारे जमीं पर" । जो मुझे अन्दर तक झकझोर कर रख दी थी । इस फिल्म में बच्चों की मनोभावना को समझने हेतू एक सीख दी गई है । यदि आपलोगों ने फिल्म देखी है तो आप मेरी भावनाओं को कुछ ज्यादा अच्छें तरीके से समझ सकते हैं ।

कल सोमवार हैं और मुझे फिर से उन प्यारे बच्चों के बीच जाने का अवसर मिलेगा जो मेरे लिए कितना महत्वपूर्ण है और कितना सुकून देने वाला है जिसे मैं आपलोगों के सामने शब्दों में बयाँ नहीं कर सकता ।
आज के लिये बस इतना ही फिर मिलेंगें कल........
तब तक के लिये नमस्कार..........!!