Wednesday, May 15, 2013

एक सन्देश

आज के भाग दौड भरी जिन्दगी में दो मिनट फुर्सत में बैठकर अपने बारे में सोचने का भी किसी को मौका नहीं है । अब मुझे ही ले लिजिये मुझे लिखने का कितना शौक है पर मेरे पास समय ही नहीं है और जब समय निकालता भी हूँ तो किसी के पास इसको पढने का समय नही है । कुछ लोग तो फिर भी समय निकाल कर पढ भी लेते हैं पर उन्हें अपने कमेन्ट लिखने या अपना विचार देने का भी वक्त नहीं होता । और इस बात से मुझे हमेशा निराशा होती है ।
                               लोग फेसबुक तथा अन्य सोशल नेटवर्किंग साईट्स पर लोगो के स्टेट्स लाईक करते हैं कमेन्ट करते हैं पर ना जाने क्यों मेरे ब्लॉग के प्रति रुखा रवैया अपनाते हैं । इस पोस्ट के बाद आशा करता हूँ कि आप मुझे निराश नहीं करेंगें ।
मैं मानता हूँ कि मेरे विचारों को पढने में किसी की कोई रुची नही है , पर वादा करता हूँ कि मैं अपने विचारो से आपको कभी निराश नहीं करुंगा और एक बार पढने के बाद सोचने पर मजबुर जरुर कर दुँगा ।

                                                 धन्यवाद !