
आज मैं आपको कुछ अलग और अजीब दुनिया में ले चलता हूँ जहाँ आपको कुछ अपने विचारों से भी अवगत कराना पड सकता है या यूँ कहे कि कराना ही है। चलिये ज्यादा बात न करते हुए मूल बात पर आते हैं ।
दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है जो मामूली घटनाओं और यादों को भी खास बना देता है। हमारे जेहन में ऐसे बहुत से पलों को ताउम्र के लिए कैद कर देता है। जो वापिस तो कभी नहीं आते पर हाँ जब भी आप अपने पुराने दोस्तों से मिलते हैं तो अब उन बातों को याद कर जरूर हँसते होंगे। बेशक आज की 'बिजी लाइफ' के चलते दोस्त रोज मिल नहीं पाते लेकिन दिल से दूर नहीं होते हैं, उनकी रूह, उनकी सांसो में दोस्ती हमेशा साथ होती है।
दोस्ती के लिए कोई दिन तय कर उसे फ्रेंडशिप डे का नाम दे देना कितना सही है यह कहना थोड़ा मुश्किल है। पर इतना जरूर है कि जिस दिन पुराने यार सब मिल बैठ जाएँ उनके लिए वही फ्रेंडशिप डे हो जाता है। दोस्ती को सीमाओं में बांधना बेवहकूफी होती है। किसी जवां लड़के या यंग लड़की के दोस्त साठ साल के बूढ़े भी हो सकते हैं।
एक मां भी अपने बेटे की और एक पिता भी अपनी बेटी के अच्छे दोस्त हो सकते हैं। क्योंकि दोस्त वो बातें बताता है जो किसी क्लास या कोर्स में नहीं पढ़ाई जाती हैं। एक लड़का और एक लड़की जो अपने जीवन के भावी सपनों में खोए होते हैं वो भी अपने हर रिश्ते में पहले एक दोस्त खोजते हैं जानते हैं क्यों? क्योंकि यही वो आईना है जो सच और झूठ का अंतर बताता है।
लेकिन अफसोस इस खूबसूरत रिश्ते और खूबसूरत दिन को देश के कुछ ऐसे लोग जो अपने आप को बेहद ही समझदार समझते हैं, अपने आप को समाज का ठेकेदार कहते हैं,को ये दिन पाश्चात्य सभ्यता का दुष्प्रभाव लगता है। उनका मानना है इससे हमारे युवा भटक रहे हैं, अब ये उन्हें कौन बताये कि भले ही फ्रेंडशिप डे पाश्चात्य सभ्यता की देन है, लेकिन फ्रेंडशिप तो हमारे देश की मिट्टी में हैं। भगवान श्रीकृष्ण-सुदामा की दोस्ती के आगे क्या कोई और मिसाल है, नहीं ना..तो फिऱ इस दिन के लिए हाय तौबा क्यों?.....
परन्तु प्यार और दोस्ती में सबसे बड़ा फ़र्क विश्वास का है. हालांकि प्यार और दोस्ती की बुनियाद ही विश्वास से शुरू होती है लेकिन प्यार में यही विश्वास डगमगाने लगता है. अमूमन एक प्रकार का डर या भय तारी हो जाता है कि कहीं सच कहने से प्यार में फ़र्क ना आ जाए और यही भय अविश्वास का कारण बनने लगता है. जबकि दोस्ती में विश्वास का कोई तुल्य नहीं होता. दोस्ती में विश्वास इतना गहरा होता है कि दोस्त हमारी सभी घटनाओं का सहभागी बन जाता है. और यही विश्वास की राह आगे चलकर आपके जीवन डगर में बदलाव लाती है.
लेकिन अमूमन यह देखा गया है कि भले ही दोस्ती में विश्वास अधिक होता है लेकिन इसके बावज़ूद जब बात प्यार और दोस्ती में किसी एक को चुनने की हो तो प्यार दोस्ती पर हावी हो जाता है.। हम शायद अपने विषय से भटक रहे हैं, इसलिये मूल बात पर आते हैं ।
चाहे गीता बांचिये या पढ़िये कुरआन मेरा तेरा प्यार ही हर पुस्तक का ज्ञान
प्यार एक ऎसा अहसास है जिस पर या तो बहुत कुछ लिखा जा सकता है या शायद कुछ भी नहीं। इसमें आप जितना गहरे उतरते हैं उतना ही इसको समझने लगते हैं। यही एक ऎसा अहसास है जिसे हर कोई समझ लेता है, चाहे वह इंसान हो या जानवर। प्यार को व्यक्त करने के लिये आपको किसी भाषा की जरूरत नहीं होती, ये तो आपकी निगाहें ही बयां कर देती है।
प्यार उन्मुक्त होता है, ये किसी बंधन या शर्त को स्वीकार नहीं करता। प्यार में बंधन की कोई जगह नहीं होती। यदि आप किसी से प्यार करते हैं तो वो जो है, जैसा है उससे प्यार करते हैं। अगर आप उसे बदल कर प्यार करना चाहते हैं तो फिर ये प्यार हो ही नहीं सकता। प्यार यह नहीं है कि आप चाहतें हैं वो हमेशा आपके साथ रहे, प्यार तो यह है कि वो जहां भी रहे खुश रहे। क्योंकि प्यार सिर्फ देना जानता है, लेना नहीं।
सबसे ज्यादा जिस प्यार की चर्चा होती है वह है, प्रेमी-प्रेमिका का प्यार। और हो भी क्यों ना इतना खूबसूरत अहसास और कहां मिलेगा। एक-दूसरे को देखकर चेहरे पर रौनक आ जाना, दिल की धड़कन बढ़ जाना, मिलने के लिए तड़पना, रुठना-मनाना।
नज़र मुझसे मिलाती हो तो तुम शरमा सी जाती हो इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।
कहतें हैं कोई सब कुछ भूल सकता है पर अपना पहला प्यार नहीं भुला सकता।
भूले से भी नहीं भुलेंगें वो बीते ज़माने वो रेशमी लम्हें वो मोहब्बत के फसानें
प्यार में ही इतनी ताकत है कि वो शैतान को भी इंसान बना सकता है। अगर दिलों में प्यार कायम हो जाये तो नफ़रत के लिये कहीं कोई जगह ही नहीं बचेगी। और दुनिया में जितनी समस्यायें हैं सब खत्म हो जायेगी। पता नहीं क्यों लोग आपस में प्यार से क्यों नहीं रह सकते। लड़ते-झगड़्ते क्यों रहतें हैं? आप प्यार किसी एक से करतें हैं और आपको सारी दुनिया प्यारी लगने लग जाती हैं। दुनिया में ऎसी कोई समस्या नहीं है जिसका हल प्यार से नहीं हो सकता हो। प्यार सच्चा या झूठा नहीं होता, प्यार थोड़ा या ज्यादा नहीं होता। प्यार सिर्फ़ प्यार होता है और कुछ नहीं। और इससे पवित्र अहसास दूसरा नहीं हो सकता। इसीलिये तो भगवान भी सिर्फ़ प्यार के ही भूखे होते हैं।
हमनें देखी हैं उन आँखों की महकती खूशबू हाथ से छूकर इसे रिश्तों का इल्जाम न दो एक अहसास है ये रूह से महसूस करो प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम न दो
अगर आप किसी से प्यार करते हैं तो हिचकिये मत। अपने प्यार को उस पर जाहिर कीजिये। याद रखिये आप कोई गुनाह नहीं कर रहें हैं, जो सबसे छुपाये। बस एक गुज़ारिश है, प्यार करें खिलवाड़ नहीं। प्यार को बदनाम करने वाले भी बहुत से लोग है दुनिया में। लेकिन प्यार वो शमा है तो हमेशा से जलती रही है। ये ना कभी बुझी है और ना कभी बुझेगी।
"जब आँचल रात का लहराये और सारा आलम सो जाये तुम मुझसे मिलने शमा जलाकर
ताज़महल में आ जाना।"
विद्वानों के अनुसार “अमूमन एक लड़के के जीवन में चार से पांच बहुत नज़दीकी दोस्त होते हैं और एक लड़की के छः से सात. यह वह दोस्त होते हैं जिनके साथ आप अपना सब कुछ बांटते हैं. परन्तु जब आपकी जिंदगी में प्यार आता है तो आपकी अपने प्यार से नजदीकियां बढ़ने लगती हैं और आप ऐसी स्थिति में अपने साथी को छोड़ना नहीं चाहते. परन्तु अगर आप उस समय भी अपने दोस्तों से बहुत नज़दीक होते हैं तो आपके प्रिय या प्रियसी को उस समय यह डर लगने लगता है कि कहीं प्यार की राह में दोस्ती अड़ंगा ना पैदा कर दे. और ऐसी स्थिति में वही प्यार आपसे दोस्त और प्यार में से किसी एक को चुनने को कहता है. और तब बावरा मन ह्रदय की सुनकर प्यार को चुनता है।