Tuesday, October 9, 2012

कुछ अनकहे रिश्ते


रिश्ता यानि प्यार, मोहब्बत, इश्क, लगाव, समर्पण, इज्जत, मान-सम्मान और न जाने क्या-क्या? ये ढाई अक्षर का छोटा सा शब्द अपने अन्दर ना जाने कितनी गहराई या विशालता लिये हुये है । जिसे आज तक किसी ने अच्छे से नहीं समझ पाया ।

दुनिया में सभी लोग किसी ना किसी से रिश्तों में जुडे होते हैं । वो रिश्ता कुछ भी हो सकता है जैसे माँ-बाप , भाई-बहन, पति-पत्नि, भाई- भाई, बहन- बहन , प्रेमी-प्रेमिका , दोस्त आदि का रिश्ता ।

पर इन सभी रिश्तों के आलावा भी कई ऐसे रिश्ते होते हैं जिन्हें हम कोई नाम नहीं दे पाते , जिन्हें हम अनकहे रिश्ते कहते हैं ।

क्या आपने कभी किसी को प्यार किया है यदि हाँ तो आप इस बात को अच्छें तरह से समझ सकते हैं , मेरे कहने का मतलब ये कतई ना निकालिये कि मैं किसी प्रेमी-प्रेमिका वाले प्यार की ही बात कर रहा हूँ , ये प्यार किसी से भी हो सकती है जैसे ऊपर के रिश्तों में से कोई भी हो सकता है ।

जैसे आपको कोई अच्छा लगता है तो उसे आप ना तो प्यार कह सहते हैं और ना ही किसी रिश्ते का नाम दे सकते हैं । जैसे कितने लोग कहते हैं कि ये मेरा पहला प्यार है पर वास्तव में लगभग सभी लोगों के साथ ऐसा होता है कि वो जिसे पहला प्यार कह रहे हैं वो उनका पहला प्यार नहीं है । इससे पहले भी आपकी जिन्दगी कोई और दस्तक दे चुका है वो कोई भी हो सकता है वो आपका बचपन का कोई सहपाठी भी हो सकता है या सकती है जिसे आप प्रतिदिन देखते हैं , उसका इंतजार करते है, उसके खुश होने पर खुश और दुखी होने पर दुखी होते हैं क्योंकि वो आपको अच्छा लगता / लगती है , उसकी बाते, उसका चेहरा सब कुछ अच्छा लगता हैं । पर आप उसे किसी रिश्ते में बाँध नहीं पाते हैं लेकिन फिर भी एक अनकहा रिश्ता तो होता है जो आपको उससे जोडे हुये है । पहला प्यार तो हम तब मानने लगते हैं जब सामने वाला भी उसे स्वीकार करे पर क्या प्यार में दोनों लोगों की स्वीकृति जरुरी है ? शायद नहीं ।

इन्सानों को एक दुसरे से प्यार करते हुए देखा है , सुना है, पढा है । पर क्या आपको किसी निर्जिव चीजों से प्यार हुआ है ? इसका जवाब आप शायद ना में दें । पर वास्तव में ऐसा है नहीं। हम निर्जिव चीजों से भी उतना ही प्यार करते हैं जितना कि सजीवों से ।और उसमें उनके स्वीकृति की कोई आवश्यकता नहीं होती ।

जैसे आपको अपने बिस्तर से प्यार, किसी खाश शर्ट या टी-शर्ट से प्यार, कलम, कॉपी , डॉयरी, मोबाईल या अपने किसी खाश की दी हुई कोई गिफ़्ट से प्यार। ये सभी प्यार एक तरफा प्यार है और इसमें सामने वाले की स्वीकृति की कोई आवश्यकता नहीं है ।

इनसे एक अनजाना सा रिश्ता होता है....एक अनकहा रिश्ता....।

तो आप इस अनकहे रिश्तों को निभाते रहिये...क्योंकि जिस दिन ये रिश्ता खत्म हो गया तो समझो हमारी दुनिया खत्म हो गई ।

तब तक के लिये

शुभ रात्रि...।









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