Thursday, July 5, 2012

उम्मीद का दीपक

आज ना जाने क्यों  मुझे ऐसा लगा कि मै अपने सपनो की दुनिया से बहुत दूर चला आया हूँ । न जाने मुझे ऐसा क्यों लगा कि मैं जो चाहता था,  जो सोचता था वो बिलकुल भी नहीं हो रहा है । क्योंकि मेरे ख्वाबो की दुनिया इस दुनिया से बिलकुल अलग है ।
                                         मुझे इस बात का अहसास आज शाम को उस वक्त हुआ जब मेरे मित्र ने मुझसे कहा कि ,"तुम भी क्या क्या सोचे थे  और क्या हो रहा है ?" मुझे  उसके सारे  शब्द तो याद नहीं पर उसके कहने का मतलब यही था । उस वक्त मुझे कुछ ना सुझा और कुछ देर सोचने के बाद मैंने जवाब दिया ,"  आत्मविश्वास की कमी , मुझमे आत्मविश्वास की कमी हो गयी है और  शायद ये सब उसी के कारण हो रहा है ।" और मै खामोश हो गया ।
                                                 और ये बात सही भी है कि आत्मविश्वास  आदमी के पास एक ऐसा अस्त्र है जिससे वो जो चाहे वो कर सकता है । और उस अस्त्र की मुझे बहुत कमी महसूस हो रही है । इसके बिना मैं अपने आप को बहुत असहाय महसूस कर रहा हूँ ।अपने आप को एक अपाहिज की भांति समझ रहा हूँ जो सब कुछ चाहते हुए भी कुछ नही कर  सकता ।
                                                समय के साथ लोगों के पसंद भी बदल है , उनके जीने का सलीका बदल जाता है । मेरे साथ कुछ ऐसा  ही हो रहा है । पर इसमे  कुछ ही, क्योंकि मेरे पसंदों की संख्या कम हो रही है और नापसंदो की बढ़ रही है ।
                                                  मुझे याद  है कि कुछ समय पहले मेरे पास मुझे क्या क्या अच्छा लगता है क्या नहीं , इसकी एक पूरी लिस्ट थी पर आज नहीं ।पता नहीं क्यों दिल में न जाने कैसी बेचैनी सी है ? कुछ भी अच्छा नहीं लगता है । मुझे संगीत ,फिल्मे , किताबे और पेंटिंग्स का बहुत शौक था । पेंटिंग्स तो बहुत पीछे छुट गया पर आज भी मेरे दिल के पास फिल्मे और संगीत हैं । किताबों के लिए तो समय ही नहीं बचता । जब भी मैं कुछ पढने चलता हूँ , न जाने क्यों कुछ पढ़ ही नहीं पाता हूँ । और फिल्मो के लिए तो घर  पर समय ही नहीं है और कभी थोडा समय निकाल पाता हूँ तो वो  तब  जब मैं बनारस जाता हूँ वो भी कभी कभी । पर वहां भी मेरा मन नहीं लगता । सब मिला जुला कर संगीत से अच्छा साथी मेरा कोई नहीं है ।संगीत के लिए मेरे पास मेरा लैपटॉप है और मेरा मोबाईल है । सच कहा जाय  तो मोबाईल मेरे साथ हमेशा रहता है नोकिया आशा 200 ,जिसमे इन्टरनेट से गाना डाउनलोड करना और सुनना अच्छा लगता है ।

          खैर जो भी हो हालत से लड़ना और जितना ही जिंदगी का दूसरा नाम है और मैं भी वही करने का प्रयास कर रहा हूँ ।म्यूजिक और इन्टरनेट को साथी बनाकर जिंदगी के कडवे और नीरस पल को काटने की कोशिश कर रहा हूँ ।और अपने दिल के  किसी कोने में आशा के दीये में उम्मीद   का दीपक जलाये हुए हूँ ताकि  ये नीरस पल रूपी अँधेरा जल्द से जल्द समाप्त हो । और एक नए आशा की  किरण जगमगाए ।और एक सुन्दर और शांत तथा आनन्दमय जीवन की शुरूआत हो सके ।
     धन्यवाद ।