आज बहुत दिनों के बाद सोचा कि कुछ अपने blog पर लिखा जाय । क्या करुँ दोस्तों मेरे पास समय का इतना अभाव है कि मैं चाह कर भी इस काम के लिये समय नहीं दे पाता हूँ ।आज कल मेरा मन कुछ ज्यादा ही बेचैन सा रह रहा है किसी काम में मन न लगना, हमेशा अपने life के प्रति सोचते रहना वगैरह-वगैरह.......।सच कहूँ तो मैं एक ऐसा इन्सान हूँ कि मैं सोचता कुछ हूँ और करता कुछ हूँ ।मुझे कुछ समझ में नहीं आता ।
और इन सब का मुख्य कारण मुझे पता ही नहीं चल पाता है । मैं हमेशा सोचता रहता हूँ कि आखिर मेरी life कब change होगी? और मैं कभी कभी ये भी सोचता हूँ कि मैं जो करना चाहता हूँ क्या मैं वो कर पाऊँगा या यूँ ही सोचते सोचते अपना life बर्बाद कर दूँगा ?
मैंनें आपको कुछ दिन पहले अपने एक दोस्त राजु के विषय में बताया था। वो मेरा best friend है और उसके द्वारा शुरु किये गये "लक्ष्य स्टडी ग्रुप" में हम सभी दोस्तों ने लगभग 6 माह अध्ययन किया पर अब वो मज़ा नहीं रहा जो पहले था ।अब बहुत सारे पुराने लोगों ने आना छोड दिया है और जो लोग आ रहें हैं वो भी अनमने ढंग से....।
मैं भी ये सोच रहा हूँ कि वहाँ जाऊँ कि नहीं ....?
मेरे दोस्त ने ही मुझे सलाह दिया कि क्यों नहीं तुम एक पत्र- पत्रिकाओं की दुकान खोलते हों और मुझे उसका विचार बहुत अच्छा लगा पर क्या बताऊँ अभी तक सोच रहा हूँ।
मेरे कुछ दोस्त ऐसे भी हैं जिनका विचार मुझसे बहुत मिलता जुलता है पर कोई अपने विचारों को बांटना ही नहीं चाहता।
मुझे हमेशा से अच्छें दोस्तों की कमी रही हैं चाहे वह वो class 1 से लेकर 8 तक school life हों या high school और college की life हो और जो मिले भी तो आज न जाने उनकी दुनिया ही कितनी अलग है । पर आज जो मेरे पास जो दोस्त हैं मैं उनसे पुरी तरह संतुष्ट हूँ क्यों कि उन्होनें मेरा हर मोड पर साथ दिया है और आशा है हमेशा देते रहेंगें।
कुछ दिनों से मैं सोच रहा हूँ कि मैं बनारस में किसी कोचिंग में प्रवेश ले लूँ पर....मैंनें आपको बताया ना कि मैं सोचता बहुत हूँ अब देखिये मैं क्या करता हूँ ??
मेरे सोचने वाली जो ....क्या कहूँ ...कोई बिमारी या फिर कुछ और.....?
चलिये इसे साकारात्मक लेते हैं ।मैं सोचता हूँ कि अपने सोचने कि शक्ति को क्यों इस तरह बर्बाद कर रहा हूँ क्यों न इसे किसी उपयोग में लाया जाय ?
और इस तरह सोचते-सोचते मैंनें सोचा कि क्यों न इस सोचने की शक्ति को कुछ और रुप दे दिया जाय और इससे कुछ लिखने की आदत डाली जाय और इस तरह से मैंनें अपने सोचने की शक्ति से कुछ लिखने का मन बनाया । पर जब मैं कुछ लिखने बैठता हूँ तो समझ में नहीं आता कि मैं क्या लिखूँ .....?
इसमें मैं आपलोगों कि मदद चाहता हूँ कि आपलोग मुझे सलाह दें कि मैं किस विषय में लिखूँ ?
आप please मेरी मदद किजिये ताकि मैं अपने मकसद में कामयाब हो सकूं|