Friday, July 1, 2011

उलझन-सुलझन

रोजगार व्यक्ति की आधारभूत आवश्यकता है | ईश्वर ने हमें मस्तिष्क, हाथ, पाँव, दिमाग की अनेक शक्तियां, हृदय और भावना प्रदान की हैं जिससे की उनका पूर्ण सदुपयोग किया जा सके और मनुष्य आत्म-सिद्धि प्राप्त कर सके | शायद हमारे जीवन का ही लक्ष्य हो, किन्तु यदि हमारे पास करने को कोई काम ही नहीं है, यदि ऊपर वर्णित शक्तियों का प्रयोग करने के लिए हमारे पास अवसर ही नहीं है, तो बहुत-सी समस्याएं खड़ी हो जाती हैं | प्रथम, हम अपनी शारीरिक और मानसिक आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं कर सकते, द्वितीय, कार्य की अनुपस्तिथि में हमें शरारत करना आएगा | तृतीय, उपयुक्त रोजगार अवसरों के आभाव में हम अपना नीतिक और आध्यात्मिक विकास भी करने में समरथ नहीं होंगे | इस प्रकार ऐसे समाज में, जिसमें रोजगार की समस्या जटिल है, उसमें निराशा, अपराध और अविकसित व्यक्तित्व होंगे |
भारत लगभग इसी प्रकार की परिस्थिति में गुजर रहा है, यहाँ बेरोजगारी की समस्या बड़ी जटिल हो गई है, हमारे रोजगार कार्यालयों में करोड़ों लोग पंजीकृत हैं जिनको काम दिया जाना है, इनके अतिरिक्त, ऐसे भी व्यक्ति है, और उनकी संख्या भी लाखों में है, जोकि अपने को रोजगार कार्यालयों में पंजिकृत नहीं करा पाते |
भारत में बेरोजगारी की समस्या के कई कारण हैं, पहला कारण है तेजी से बदती हुई जनसँख्या, सरकार, जिस अनुपात में जनसँख्या बदती है, उस अनुपात में नौकरियों का सृजन नहीं कर पाती, द्वितीय, हमारी दूषित शिक्षा व्यवस्था ने भी समस्या को उलझा दिया है, जबकि लाखों की तादाद में लोग रोजगार की तलाश कर रहे हैं, वहीँ बहुत से उद्योग,
प्रतिष्ठान की स्तिथियाँ ऐसी हैं, जहाँ पर उपयुक्त कार्य करने वालों की भी बहुत कमी है | हम रोजगारपरक शिक्षा को प्रारंभ नहीं कर पायें हैं और न उद्योग के साथ शिक्षा का तालमेल ही बना पाए हैं, बेरोजगारी का एक अन्य कारण अपर्याप्त औद्योगीकरण और कुटीर उद्योग-धंधों की मंद प्रगति है | बड़े-बड़े उद्योगपतियों के निहीत स्वार्थों के कारण कुटीर उद्योगों-धंधों को प्रोत्साहन नहीं मिल पाता | हमारे बेरोजगार युवकों का सफेदपोश नोकरी के लिए प्रेम भी बेरोजगारी का एक अन्य कारण है | हमारे नौजवान नियमित नौकरी की तलाश में अपनी शक्ति एंव संसधान खर्च कर देंगे, किन्तु अपना कारोबार प्रारंभ नहीं करेंगे | यहाँ तक एक कृषि स्नातक भी खेतों में कार्य नहीं करेगा, बल्कि कृषि संस्थानों या सरकारी नौकरी में उपयुक्त पद के लिए प्रतीक्षा करेगा | वास्तव में हमारे नवयुवकों का भी दोष नहीं, अपना कारोबार प्रारंभ करने की उनकी इच्छा कुंठित हो जाती है | एक कारण यह है भी है की नवयुवकों में अपने पैत्रिक व्यवसाय छोड़ने की प्रवर्ति हो गई है | पुराने जमाने में पुत्र अपने पिता का व्यवसाय अपना लेता था इसलिए उसके लिए बेरोजगारी की समस्या का प्रश्न ही नहीं उठता था | हमारे देश में बेरोजगारी का एक अन्य कारण है, दूषित नियोजन | हमारे नियोजक मानव-शक्ति के नियोजन की ओर उचित ध्यान देने में असफल रहे हैं | वे अपना सारा ध्यान संसधानों के नियोजन की ओर लगाते रहे हैं, यही कारण है की नियोजन के फलस्वरूप काफी मात्र में सृजित पूँजियाँ और उससे उत्पन हुए कुल सुख में बड़ा भारी अंतर है | कुल राष्ट्रीय उत्पादन के सन्दर्भ में देह कितना ही संपन्न क्यूँ न हो जाये, नागरिकों का सुख सुनिशचित नहीं किया जा सकता यदि उपयुक्त और सही रोजगार के अवसर प्रदान नहीं किये जाते, किन्तु बेरोजगारी की समस्या के लिए केवल सरकार को ही दोषी नहीं ठहराया जा सकता | भारत में बहुत से ऐसे लोग हैं जो कार्य की प्रतिष्ठा को नहीं समझते हैं और ऐसी नौकरियों की प्रतीक्षा करते रहते हैं जिनमें काम तो कम करना पड़े और प्राप्ति अधिक हो | उनकी सुरती और कठिन कार्य में लगने की अनिच्छा उनको बेरोजगार रखती है |
बेरोजगारी की समस्या का शीघ्र-से-शीघ्र हल निकालना होगा, सबसे बड़ी आवश्यकता मानव-शक्ति का नियोजन है | हमें अपने नायुवक और नवयुवतियों को रोजगार परक और व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करनी होगी | त्वरित औद्योगिक और कुटीर उद्योगों के लिए उचित प्रोत्साहन की आवश्यकता है | काफी संख्या में प्रत्येक गाँव, क़स्बा और शहर में लघु स्टार एक एवं कुटीर उद्योगों की स्थापना से रोजगार के असंख्य अवसर खिलेंगे, हमारे नवयुवकों में जोखिम उठाने की भावना का संचार करना पड़ेगा और धंधा करने के लिए उन्हें पथ-प्रदर्शन देना पड़ेगा | आसान शर्तों पर विनियोग हेतु उनको पूँजी उप्लाब्ध करनी होगी | अंत में, हमें जनसँख्या वृद्धि पर लगान अहोगा | संतोष का विषय है की हमारे नियोजक इसी दिशा में कार्य कर रहे हैं | रोजगार की कई योजनायें चलायी गई हैं, जिनमें से मुख्य है-त्रैसेम (ट्रेनिंग ऑफ़ रुरल यूथ फॉर सेल्फ एम्प्लोय्मेंट) और ग्रामीण बेरोजगारों के लिए न.र.इ.प. (नेशनल रुरल एम्प्लोय्मेंट प्रोग्राम), र.ल.जी.प. (रुरल लंद्लेस एम्प्लोय्मेंट गुअरंती प्रोग्राम), स्पेशल कॉम्पोनेन्ट प्लान, जवाहर रोजगार योजना तथा नेहरु योजना आदि | जवाहर रोजगार रोजगार योजना को अब ग्राम स्म्रिधि तोजना में परिवर्तित कर दिया गया है | ग्रामीण बेरोजगारी की अन्य योजनायें हैं- अन्नपूर्ण योजना तथा स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना | नगरिया लोगों के लिए नेहरु रोजगार योजना का पुनः नामकरण करके उसे 'स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना' कहा जाने लगा है | देश का औद्योगीकरण तीव्रगति से आगे बाद रहा है | सरकार ने कुछ संस्थानों में स्वयं उद्याम चलाने से सम्बंधित पाठ्यक्रम का प्रचालन किया है जिससे की गतिशील नवयुवकों को अपने स्वयं के उद्यम स्थापित करने हेतु प्रोत्साहित किया जा सके | कुछ राज्य सरकारों नमे हाई स्कूल और माध्यमिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में व्यावसायिक शिक्षा के कोउरसों का प्रचालन किया है और चुनी हुई संस्थाओं में विभिन ताड़ों की स्थापना के लिए धन जुटाया है | योजना कार्यक्रम का विस्तार कर्क सभी संस्थाओं में व्यावसायिक शिक्षा के कोर्स प्रारंभ करने की है | इस व्यवस्था से पिछले समय में बहुत अच्छे नतीजे निकले हैं | परिश्रमी और उत्साही नवयुवक स्वयं के उद्यम स्थापित करने हेतु आकर्षिक हो रहे हैं | इस प्रकार व्यक्तिगत क्षेत्र में रोजगार की क्षमता बड़ी है | आगे और भी अधिक उदारीकरण से हमारी साहसी और प्रतिभाशाली युवकों के लिए रोजगार के आकर्षक अवसर खुलेंगे | ऐसे उधाहरानों की कमी नहीं है जिनमें लोगों ने बिलकुल शुरुआत से प्रारंभ किया और थोड़े-से समय के कमरकस श्रम के बल पर लाखों रुपये कमाए और अपने को ही नहीं दूसरों को भी रोजगार प्रदान किया | भारत के पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों में आर्थिक क्रिया अपनी चरम सीमा पर है और बेरोजगारी का लगभग अस्तित्व ही नहीं रहा | हमें अपने आलस्य को त्याग मैदान में कूदना है, जिसको परिश्रमी और साहसी युवकों की प्रतीक्षा है |

Tuesday, June 7, 2011

बाबा रामदेव का अनशन

280 लाख करोड़ का सवाल
है ...

भारतीय गरीब है
लेकिन भारत देश कभी गरीब नहीं रहा"* ये कहना है स्विस बैंक के

डाइरेक्टर
का.
स्विस बैंक के डाइरेक्टर ने यह भी कहा है कि भारत का लगभग 280

लाख
करोड़ रुपये (280 ,00 ,000 ,000 ,000) उनके स्विस बैंक में जमा है. ये रकम
इतनी
है कि भारत का आने वाले 30 सालों का बजट बिना टैक्स के बनाया जा सकता है.
या
यूँ कहें कि 60 करोड़ रोजगार के अवसर दिए जा सकते है. या यूँ भी कह सकते
है
कि भारत के किसी भी गाँव से दिल्ली तक 4 लेन रोड बनाया जा सकता है.
ऐसा भी कह
सकते है कि 500 से ज्यादा सामाजिक प्रोजेक्ट पूर्ण किये जा
सकते है. ये रकम
इतनी ज्यादा है कि अगर हर भारतीय को 2000 रुपये हर
महीने भी दिए जाये तो 60
साल तक ख़त्म ना हो. यानी भारत को किसी वर्ल्ड
बैंक से लोन लेने कि कोई जरुरत
नहीं है. जरा सोचिये ...


हमारे
भ्रष्ट राजनेताओं और नोकरशाहों ने कैसे देश कोलूटा है और

ये लूट का
सिलसिला अभी तक 2011 तक जारी है. इस सिलसिले को अब रोकना
बहुत ज्यादा
जरूरी हो गया है. अंग्रेजो ने हमारे भारत पर करीब 200 सालो तक राज
करके
करीब 1 लाखकरोड़ रुपये लूटा. मगर आजादी के केवल 64 सालों में हमारे
भ्रस्टाचार ने

280लाख करोड़ लूटा है. एक तरफ 200 साल में 1 लाख
करोड़ है और दूसरी तरफ केवल 64
सालों में 280 लाख करोड़ है. यानि हर साल
लगभग 4.37 लाख करोड़, या हर महीने
करीब 36 हजार करोड़ भारतीय मुद्रा
स्विस बैंक में इन भ्रष्ट लोगों द्वारा जमा
करवाई गई है. भारत को किसी
वर्ल्ड बैंक के लोन की कोई दरकार नहीं है. सोचो की
कितना पैसा हमारे
भ्रष्ट राजनेताओं और उच्च अधिकारीयों ने ब्लाक करके रखा हुआ
है. हमे
भ्रस्ट राजनेताओं और भ्रष्ट अधिकारीयों के खिलाफ जाने का पूर्ण अधिकार
है.हाल
ही में हुवे घोटालों का आप सभी को पता ही है - CWG घोटाला, २ जी
स्पेक्ट्रुम
घोटाला , आदर्श होउसिंग घोटाला ... और ना जाने कौन कौन से घोटाले
अभी
उजागर होने वाले है ........

Saturday, March 26, 2011

बिहार दिवस 2011





























मेरे दोस्त राजु और दिनेश पिछले दिनों अपना कुछ समय पटना में आयोजित बिहार दिवस समारोह में व्यतित कियें, जिसकी कुछ झलकियाँ आपके सामने प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहा हूँ .........

Thursday, March 17, 2011

आज के लोग और उनकी जरुरतें


आज लगभग एक महिने के बाद बिजली का आना उसी तरह लग रहा था जैसे वर्षों से प्यासी बंजर भूमि पर बारीश की पहली बुंद गिरी हो ,जैसे कडकडाते जाडे के दिन में बहुत दिनों के बाद सूरज की किरणें धरती पर पडी हों ,जैसे कुछ दिनों से प्यासे किसी भूख से तडप रहे व्यक्ति को भोजन मिल गया हों ।हम चाहे कितनी भी उपमाऐं दे ले पर हमारे दिल की जो खुशी है उसको शब्दों के मोतिओं में नहीं पिरोया जा सकता है। ये खुशी मुझसे ज्यादा उन लोगों के लिये मायने रखती है जो सिर्फ और सिर्फ बिजली पर ही निर्भर हैं ।

अभी कुछ दिनों पहले कितनी अच्छी बिजली थी। लोगों का सारा काम अच्छे ढंग से चल रहा था ।लोग खुशी-खुशी अपना जीवन यापन कर रहें थे ।पर किसी को भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि ये जो बिजली की चकाचौंध दिख रही है वो बस कुछ पल का मेहमान हैं ।अचानक बिजली चली गई ।ऐसा लगा कि जैसे प्रतिदिन आती-जाती है ठीक उसी तरह हुआ होगा ।पर बहुत देर के बाद भी बिजली न आने पर लोगों की व्याकुलता बढी ।लोगों का ध्यान इस ओर गया ।काफी छान-बिन करने के बाद पता चला कि पावर सब स्टेशन से ही कुछ गडबड है पर बाद में पता चला कि वहां का ट्रांसफार्मर ही जल गया है।अब तो लोगों की रही सही आस भी जवाब दे गई लोगों ने सोचा कि चलिये 2-3 महिने के लिये छुट्टी हो ग्या ।

बिजली के चले जाने के बाद ही हम लोगों को इसकी महानता का पता चला । लोगो का जीना मुश्किल हो गया ।सारा काम जैसे ठप हो गया ।किसानों की फसलें पानी के बिना सुखने लगी । गर्मी ने दस्तक दे दी थी सो लोगो को अब पंखें -कुलर की तलब लगने लगी थी पर ये कहां संभव था । छात्रों को तो और परेशानी उनके परीक्षा के ऐन वक्त जो ये मुसीबत आई थी ।उनकी पढाई तो जैसे एकदम ठप सी हो गई पर क्या करें परीक्षा है तो पढना तो पडेगा ही चाहे वो लालटेन जलाकर ही क्यों ना करनी पडे।सबसे ज्यादा परेशानी क्रिकेट प्रेमिओं को हुआ अरे हो क्यों नहीं क्रिकेट विश्वकप जो शुरु हो गया और इस महा कुम्भ में डुबकी लगाए बिना वो कैसे मान सकते थे पर ये भी तो मुश्किल ही था पर लोगों को अपनी वही पुरानी रेडियो याद आई जिससे कम से कम सुना तो जा सके ।

यह सब परेशानियां तो कुछ भी नहीं असली परेशानी तो मोबाईल चार्ज करने वाला है। जो इन सबसे बडा और सबसे महत्वपूर्ण हैं सारे काम हो न हों पर ये तो बहुत जरूरी है इसलिये लोग जहां तहां जनरेटर-इनवर्टर आदि पर चार्ज कराने के लिये दौडने लगे और इसके लिये 10-15 रुपयें देने में कोई गुरेज नहीं कर रहें है ।

जो भी हों लोग परेशान हों तो हों इससे किसी का तो फायदा हुआ ।रेडियो, लालटेन , किरासन तेल, डीजल
तथा मोबाईल चार्ज करने वालों की तो बल्लें बल्लें हो गई ।

किसी तरह करते- करते 1 महिने गुजर गये और कुछ राजनितिक व्यक्तिओं द्वारा ट्रांसफार्मर लगवाने की खबर उडने लगी । सभी राजनितिक दल वाले छोटे-२ नेताओं ने अपने बडे नेताओं के गुणगान गाते हुए चाय-पान की दुकानों पर नजर आने लगें और करते-करते ट्रांसफार्मर आ भी गया पर ये स्पष्ट नहीं हो पाया कि आखिर इसे किस पार्टी के किस नेता ने मंगवाया है? पर जो भी हो इन राजनितिक व्यक्तिओं के आपसी प्रतिद्वंदता के कारण आखिर जनता का तो कल्याण हुआ ।चाहे जिस किसी ने भी लगवाया हो पर जनता का सुख चैन तो लौट आया ।
लोगों के चेहरे पर खुशी पुन: लौट आई तथा सारा काम पहले की तरह होने लगा और बिजली के आने से ऐसा लगा जैसे उनके अंधकारमय जीवन में फिर से प्रकाश लौट आया ।


Sunday, March 13, 2011

मेरी सोच.....

आज बहुत दिनों के बाद सोचा कि कुछ अपने blog पर लिखा जाय । क्या करुँ दोस्तों मेरे पास समय का इतना अभाव है कि मैं चाह कर भी इस काम के लिये समय नहीं दे पाता हूँ ।

आज कल मेरा मन कुछ ज्यादा ही बेचैन सा रह रहा है किसी काम में मन न लगना, हमेशा अपने life के प्रति सोचते रहना वगैरह-वगैरह.......।सच कहूँ तो मैं एक ऐसा इन्सान हूँ कि मैं सोचता कुछ हूँ और करता कुछ हूँ ।मुझे कुछ समझ में नहीं आता ।
और इन सब का मुख्य कारण मुझे पता ही नहीं चल पाता है । मैं हमेशा सोचता रहता हूँ कि आखिर मेरी life कब change होगी? और मैं कभी कभी ये भी सोचता हूँ कि मैं जो करना चाहता हूँ क्या मैं वो कर पाऊँगा या यूँ ही सोचते सोचते अपना life बर्बाद कर दूँगा ?

मैंनें आपको कुछ दिन पहले अपने एक दोस्त राजु के विषय में बताया था। वो मेरा best friend है और उसके द्वारा शुरु किये गये "लक्ष्य स्टडी ग्रुप" में हम सभी दोस्तों ने लगभग 6 माह अध्ययन किया पर अब वो मज़ा नहीं रहा जो पहले था ।अब बहुत सारे पुराने लोगों ने आना छोड दिया है और जो लोग आ रहें हैं वो भी अनमने ढंग से....।
मैं भी ये सोच रहा हूँ कि वहाँ जाऊँ कि नहीं ....?

मेरे दोस्त ने ही मुझे सलाह दिया कि क्यों नहीं तुम एक पत्र- पत्रिकाओं की दुकान खोलते हों और मुझे उसका विचार बहुत अच्छा लगा पर क्या बताऊँ अभी तक सोच रहा हूँ।
मेरे कुछ दोस्त ऐसे भी हैं जिनका विचार मुझसे बहुत मिलता जुलता है पर कोई अपने विचारों को बांटना ही नहीं चाहता।

मुझे हमेशा से अच्छें दोस्तों की कमी रही हैं चाहे वह वो class 1 से लेकर 8 तक school life हों या high school और college की life हो और जो मिले भी तो आज न जाने उनकी दुनिया ही कितनी अलग है । पर आज जो मेरे पास जो दोस्त हैं मैं उनसे पुरी तरह संतुष्ट हूँ क्यों कि उन्होनें मेरा हर मोड पर साथ दिया है और आशा है हमेशा देते रहेंगें।

कुछ दिनों से मैं सोच रहा हूँ कि मैं बनारस में किसी कोचिंग में प्रवेश ले लूँ पर....मैंनें आपको बताया ना कि मैं सोचता बहुत हूँ अब देखिये मैं क्या करता हूँ ??

मेरे सोचने वाली जो ....क्या कहूँ ...कोई बिमारी या फिर कुछ और.....?
चलिये इसे साकारात्मक लेते हैं ।मैं सोचता हूँ कि अपने सोचने कि शक्ति को क्यों इस तरह बर्बाद कर रहा हूँ क्यों न इसे किसी उपयोग में लाया जाय ?

और इस तरह सोचते-सोचते मैंनें सोचा कि क्यों न इस सोचने की शक्ति को कुछ और रुप दे दिया जाय और इससे कुछ लिखने की आदत डाली जाय और इस तरह से मैंनें अपने सोचने की शक्ति से कुछ लिखने का मन बनाया । पर जब मैं कुछ लिखने बैठता हूँ तो समझ में नहीं आता कि मैं क्या लिखूँ .....?

इसमें मैं आपलोगों कि मदद चाहता हूँ कि आपलोग मुझे सलाह दें कि मैं किस विषय में लिखूँ ?
आप please मेरी मदद किजिये ताकि मैं अपने मकसद में कामयाब हो सकूं|

Wednesday, February 23, 2011

Love Life, Not Stuff





We’re in love with stuff — with shopping, with acquiring, with owning, with collecting.

Let’s lust after life instead.

Our obsession with stuff has become unhealthy. When we have a void in our lives, we buy things. When we have problems, we buy things. And these things are becoming more and more expensive, bigger, shinier … more wasteful.

This obsession with stuff leads to owning a lot, having a lot of clutter … and yet this stuff doesn’t fill our lives with meaning.

It leads to deep debt, from buying so much, and needing bigger houses and storage spaces to contain everything. Financially, we’re worse off than ever, because of this obsession with stuff.

We buy things when we’re depressed, we buy things for others to show how much we love them … and in this way, stuff has separated us from actually dealing with our emotions, blocked us from truly connecting with others.

Let’s replace that lust for stuff with a lust for life.

Some ideas:

Rediscover a passion for life. Get outside and feel nature, appreciate the beauty of the world around you. Get active, do some gardening or yardwork, play a sport, go for a walk, take a hike, go for a swim, ride a bike. Feel the life coursing through you. Breathe it in.
Give experiences as gifts, not stuff. Instead of shopping for someone come birthdays or Christmas, think of an experience you can give them instead. A date with you, doing something fun, hanging out, cooking, playing, talking, exploring. A fun time at a park or beach. Something other than everyday. An experience is much more meaningful than an object.
Connect with others. In real life. If you haven’t hung out with a friend recently, give him a call and go hang out. Get your kid away from the TV or video game player and take her outside to do something. Go on a date with your partner. Visit your mom or grandparents. And be present while you’re with them — really listen, really be there.
Deal with your emotions. If you have a need to buy things, to shop when you are having emotional issues, be more aware of this. Then deal with the underlying emotions, rather than using shopping as a way to forget about them. If you’re depressed, or anxious, or lonely, deal with those. Find solutions, figure out what’s causing them. Good news: experiencing life, getting active, and connecting with others all help you deal with those emotional issues.
Disconnect your attachment to stuff. Sometimes I find myself reluctant to give something up, even if I don’t really use it. And that’s when I ask myself, “Why?” What is holding me back from getting rid of this possession? Sometimes, the item has an emotional connection, but then I realize that it’s just an object, it’s not the emotion or the actual source of the emotion. Then I’ll take a picture of the item, upload it to my computer, and get rid of the object. I feel liberated, because I’ve broken an attachment to a physical object (but saved the memory). If you are attached to an object, figure out why — it’s not healthy in the long run.
Realize that life, not stuff, is what matters. Objects are just objects — if you lose them, if they get stolen or destroyed … it’s not a big deal. They’re just objects — not your life. Your life is the series of moments that is steaming through your consciousness right now, and how you use those moments and what you fill them with is what truly matters, not what you fill your home with. At the end of this short journey, you’ll look back and remember your experiences, the people you loved and who loved you back, the things you did and didn’t do. Not the stuff you had.

Some Little Habits That Can Change Your Life....


If you could just pick one or two (or seven) habits to create in the next few months — habits that will have the most impact on your life — what would they be?

I often get asked this question, because people are overwhelmed when it comes to starting positive life changes.

They ask me: what one or two habits should they start with?

It’s not an easy question. There are so many changes I’ve gone through, from quitting smoking to simplifying my life to reducing debt to many more. And they’ve all seemed life-changing, and they’ve all seemed important.

But if I were to start again, and had to pick one or two, it would be the one or two listed below. The list that follows is in order of what I think I’d do the first 6-7 months of changing my life … but realize that every person is different. No one should follow my choices exactly — you’ve got to figure out what works for you.

That said, if you followed the program below, and worked to develop these habits, you’d probably do pretty well.

How to Develop the Habits
I’ve written a number of times about developing habits, but here are the basics:
Do a 30-day challenge, focusing on just ONE habit.
Write it out on paper, along with your motivations, obstacles, and strategies for overcoming them.
Commit fully, in a public way.
Log your progress.
Remain publicly accountable — report on your progress each day.
Have support for when you falter — either in real life or online.
Reward every little success.
If you fail, figure out what went wrong, plan for it, and try again.

The Seven Little Habits That Can Change Your Life
OK, so now you know how to form a habit — and remember, only do them one at a time — but you want to know the seven little habits. Here they are, in my order of preference (but yours may be different):

1. Develop positive thinking. I put this first because I think it’s the keystone habit that will help you form the other important habits. Sure, positive thinking by itself won’t lead to success, but it certainly goes a long way to motivate you to do the other things required.

I learned this when I quit smoking — when I allowed myself to think negative thoughts, I would end up failing. But when I learned how to squash negative thoughts and think positive ones instead, I succeeded. This discovery lead to me practicing this over and over, until I was able to form just about any habit I needed. It’s been invaluable to me, and I think it could be to most people.

Focus on this habit first, and you’ll have a much easier time with any of the others. Start by becoming more aware of your negative self-talk — do a little tally sheet throughout the day, marking a tally each time you notice a negative thought. Soon you’ll recognize them, and you can squash them.



2. Exercise. People who’ve been hearing me harp on about exercise might roll their eyes. Sure, exercise is healthy and all that, but how exactly is it life changing? I’m glad you asked:
It makes you feel better about yourself, and more confident. That leads to better success with other positive changes.
It reinforces the positive thinking habit — you need to think positive in order to sustain exercise.
It relieves stress and gives you time to think — this leads to better mental well-being in your life overall.
It helps with creativity. Don’t ask me to prove it, except to say that my best ideas and brainstorming sessions come from when I exercise.


3. Single-tasking. The opposite of multi-tasking — you’ve heard me harp on about this one as well. Why is it life-changing? A couple powerful reasons:
You’ll be more effective with your tasks and get more done. It’s hard to achieve important things if you’re constantly switching tasks and distracted by other “urgent” things.
You’ll be less stressed overall and (in my experience) happier throughout your day.


4. Focus on one goal. Just as focusing on one task at a time is more effective, and focusing on one habit at a time is more effect, so is focusing on one goal at a time. While it might seem very difficult, focusing on one goal at a time is the most powerful way of achieving your goals. When you try to take on many goals at once, you’re spreading thin your focus and energy — the two critical components for achieving a goal.

What if you have 5 goals you want to achieve? Pick one to focus on first. Break it into a mini-goal you can accomplish this month, if it’s a longer-term goal. Pick an action you can do today. Keep doing this until the goal is accomplished — do an action every day, finish the mini-goal, pick the next mini-goal to work on. Then, when your One Goal is completed, focus on the next goal.

Some goals are ongoing ones — like blogging every day, or exercising every day. In those cases, turn them into habits — focus exclusively on turning the goal into a habit, until the habit is ingrained. Then focus on the next goal.



5. Eliminate the non-essential. First,  identify the essential — the things in your life that are most important to you, that you love the most. Then eliminate everything else. This simplifies things and leaves you with the space to focus on the essential. This process works with anything — with your life in general, with work projects and tasks, with emails and other communication.

This will change your life because it will help you to simplify, to focus on what’s important, and to build the life you want.



6. Kindness. Yes, kindness is a habit. And it can be cultivated. Focus on it every day for a month and you’ll see profound changes in your life. You’ll feel better about yourself as a person. You’ll see people react to you differently and treat you better, over the long run. It’s karma.

How do you develop the kindness habit? First, make it a goal to do something kind for someone each day. At the beginning of the day, figure out what that kind act will be and then do it during the day. Second, each time you interact with someone, try to be kind, be friendly, be compassionate. Third, try to go beyond small kindnesses to larger acts of compassion, volunteering to help those in need and taking the initiative to relieve suffering.

7. Daily routine. It’s so simple, but creating a daily routine for yourself can make a big difference in your life. The best routines, I’ve found, come at the start and end of the day — both your workday and your day in general. That means, develop a routine for when you awake, for when you first start working, for when you finish your workday, and for the end of your evening.

How will that change your life? It will help you get a great start to your day, and finish your day by preparing for the next day. It’ll help you firmly root the productive habits you want to firm in your everyday life. It’ll help you focus on what’s important, not just what comes up. It’ll help you make sure you get done all the things you really want to make sure gets done everyday. And that can mean a lot.

“We first make our habits, and then our habits make us.” - John Dryden

How Can an MBA Change our Life?

An MBA is a post graduate Master of Business Administration degree that can lead to high-level careers in business, management industries, and finance. An MBA allows an individual the opportunity to obtain a better management position in corporate America and government jobs.
Personality assessments provide individuals with the understanding of their strengths and weaknesses. Based on the outcome of an assessment, an individual would have a choice on which career path would better suit them, as a result, it helps them to determine which degree to pursue. The Jungian 16-type personality assessment scored me as an ISTJ personality type. The assessment of an ISTJ personality shows my personality as organized, compulsive, private, trustworthy, and practical. I have a possible career choice as an office manager, accountant, business manager, tax agent, and a public servant (Eggert, 2000). The following is the breakdown of the letters, which classifies the ISTJ personality: I (Introversion), S (Sensing), T (Thinking) and J (Judgment) (Eggert, 2000). An MBA will give you a dynamic life experience, and it will assist you with three main value propositions: skills, brand and network.
MBA graduates are in high demand due to their qualifications and skills. After graduating from an MBA program, the graduate has increased their qualifications, but they have also increased their market ability. The skills an MBA graduate learns are finance, marketing, economics, operations management, accounting, leadership, teamwork, ethics, and communication (skills which are crucial for effective management). The skills are acquired inside and outside the classroom.
Career paths for MBA graduates are numerous and include jobs in accounting, finance, human resource management, manager information systems, manufacturing,...

Wednesday, February 2, 2011

श्रेया घोशाल

श्रेया घोषाल (12 मार्च, 1984 में राजस्थान के रावतभाटा, भारत में जन्मीं) एक भारतीय पार्श्व गायिका है. उन्होंने बॉलीवुड में, क्षेत्रीय फिल्मों बहुत सारे गाने गाए और कस्तूरी जैसे भारतीय धारावाहिकों के लिए भी गाया है. हिंदी के अलावा, उन्होंने असमिया, बंगाली, कन्नड़, मलयालम, मराठी, पंजाबी, तमिल और तेलुगु में भी गाने गाए हैं

श्रेया घोषाल का जन्म एक बंगाली परिवार में हुआ. वे राजस्थान, कोटा के पास एक छोटे-से कस्बे रावतभाटा में पली-बढ़ीं. वे एक बहुत ही पढ़े-लिखे परिवार से हैं. उनके पिता भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र में नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र इंजीनियर के रूप में भारतीय नाभिकीय ऊर्जा निगम के लिए काम करते हैं, जबकि उनकी मां साहित्य की स्नातकोत्तर छात्रा हैं.


चार साल की उम्र से घोषाल ने हारमोनियम पर अपनी मां के साथ संगत किया. उनके माता-पिता ने उन्हें कोटा में महेशचंद्र शर्मा के पास हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की विधिवत् शिक्षा के लिए भेजा.

बच्ची के रूप में ज़ी टीवी पर सा रे गा मा (अब सा रे गा मा पा) की चिल्ड्रेन स्पेशल एपीसोड की प्रतियोगिता का खिताब उन्होंने जीता। उस समय आज के प्रसिद्ध गायक सोनू निगम ने इस कार्यक्रम की मेजबानी की थी.कल्याणजी, जो प्रतियोगिता के निर्णायक थे, ने उनके माता-पिता को मुंबई आने के लिए मनाया.| उन्होंने 18 महीनों तक उनसे शिक्षा ली और मुंबई की मुक्त भिडे से शास्त्रीय संगीत की तालीम को जारी रखा.

रावतभाटा के एटॉमिक एनर्जी सेंट्रल स्कूल (AECS) और अणुशक्तिनगर (मुंबई) में उन्होंने पढ़ाई की. स्नातक के लिए उन्होंने SIES कॉलेज के कला संकाय में दाखिला लिया

फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली का ध्यान अपनी ओर तब खींचा जब उन्होंने सा रे गा मा पा में दूसरी बार भाग लिया, इस समय वे व्यस्कों के साथ प्रतिस्पर्धा में भाग ले रही थीं. साल 2000 में, उन्होंने अपनी फिल्म देवदास में मुख्य महिला किरदार पारो , जिस किरदार को एश्वर्या राय को निभाना था, की आवाज के लिए मौका देने का प्रस्ताव रखा. फिल्म में श्रेया ने इस्माइल दरबार के संगीत निर्देशन में पांच गाने गाए. दुनिया भर के फिल्मी दर्शकों ने एश्वर्या राय पर फिल्माया गया, घोषाल का गाना सुना, और बहुत ही जल्द वे बॉलीवुड में अल्का याज्ञनिक, सुनिधि चौहान, साधना सरगम और कविता कृष्णमूर्ति के साथ चोटी की पार्श्व गायिक बन गयीं. इस गीत ने उन्हें उस साल का सर्वश्रेष्ठ गायिका का फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार दिलाया. साथ ही उभरती प्रतिभाओं के लिए दिया जानेवाला आर. डी. बर्मन पुरस्कार भी उन्हें उसी पुरस्कार समारोह में दिया गया.

देवदास के बाद, ए. आर. रहमान, अनु मल्लिक, हिमेश रेशमिया, मणि शर्मा, एम. एम. किरावनी, नदीम-श्रवण, शंकर-एहसान-लॉयल, प्रीतम, विशाल-शेखर, हंसलेखा,मनो मूर्ति, गुरुकिरण, इल्लया राजा, युवन शंकर राजा और हैरीज जयराज समेत बहुत सारे संगीत निर्देशकों के निर्देशन में बहुत सारी अभिनेत्रियों के लिए गाती रही हैं. उन्होंने उत्तर और दक्षिण फिल्म उद्योगों के लिए बहुत सारे पुरस्कार जीते हैं. भूल-भुलैया के ‘मेरे ढोलना’ गीत के लिए भी उन्हें बहुत वाहवाही मिली.

आज घोषाल उद्योग की एक प्रतिष्ठित गायिका हैं और उन्होंने हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयालम, बंगाली, कन्नड, गुजराती, मेइती, मराठी और भोजपुरी समेत विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में गाने रिकॉर्ड किए हैं. अमूल स्टार वॉयज ऑफ इंडिया छोटे उस्ताद संगीत कार्यक्रम में भी वे निर्णायक के रूप में आयीं. उन्होंने बहुत सारे भारतीय टीवी धारावाहिकों के लिए शीर्षक गीत भी गाया.

घोषाल ने अपने कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर ली है और वे साहित्य में एम. ए. करने की तैयारी कर रही हैं.|वे पश्चिमी संगीत में सिंफॉनी और इंस्ट्रूलमेंटल का आनंद लेती हैं और उनका पसंदीदा ग्रुप ABBA है. लेकिन भारतीय संगीत निश्चित रूप से उनकी आत्मा है. उनकी आवाज का गठन इस तरह का है कि रूमानी गीत उस पर फबता है और आवाज को वे बखूबी पेश कर सकती हैं (इसकी बहुत ही उम्दा मिसाल जिस्म का "जादू है नशा है" है). देवदास के अलावा, जिस्म, साया, इंतेहां, आउट ऑफ कंट्रोल, खाकी, मुन्नाभाई MBBS, धूम, कुछ कहा आपने, अरमान, देश देवी, मुझे मेरी कमस, LOC कारगिल, एतबार, क्रिश, पुलिस फोर्स, लगे रहो मुन्नाभाई,गुरु, बिग B, सागर एलियाज जैकी रिलोडेड से लेकर हाल की ब्लू, कुर्बान, गजनी, रब ने बना दी जोड़ी, 3 इडियट्स वगैरह के लिए उन्होंने गाने गाए. 2007 में उनके गाए गीतों के लिए सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका का आइफा (IIFA) 2008 में उनका नाम पांच में से चार नामांकनों में आया. सर्वश्रेष्ठ गायिका का फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार 2009 जीता और सिंह इज किंग में प्रीतम का गाना ‘तेरी ओर’ के लिए उन्होंने आइफा (IIFA) 2009 जीता.वे हिंदी फिल्म उद्योगों की अकेली ऐसी गायिका हैं, जिन्हें 25 वर्ष की उम्र में ही तीन राष्ट्रीय पुरस्कार मिले. मलयालम में फिल्म "नीलातमारा" का उनका गाया ताजा गाना अनुरागा विलोचन्नई सुपर हिट है.|

म्युजिक का महामुकाबला कार्यक्रम में श्रेया’ज सुपरस्टार टीम के लिए श्रेया घोषाल टीम कप्तान, निर्णायक और परामर्शदाता हैं|

पुरस्कार व मान्यताएं

नैशनल फिल्म अवॉर्ड्स

फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड्स

फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड्स साउथ

आइफा (IIFA) अवॉर्ड्स

  • 2003: आइफा (IIFA) बेस्ट फिमेल प्लेबैक अवॉर्ड (कविता कृष्णमूर्ति के साथ साझा) - डोला रे (देवदास)
  • 2004: आइफा (IIFA) बेस्ट फिमेल प्लेबैक अवॉर्ड - जादू है नशा है (जिस्म)
  • 2008: आइफा (IIFA) बेस्ट फिमेल प्लेबैक अवॉर्ड- बरसो रे (गुरु)
  • 2009: आइफा (IIFA) बेस्ट फिमेल प्लेबैक अवॉर्ड - तेरी ओर (सिंह इस किंग)

ज़ी सिने अवॉर्ड्स

स्टार स्क्रीन अवॉर्ड्स

अन्य अवॉर्ड्स

  • 2005: आंध्र प्रदेश स्टेट अवॉर्ड बेस्ट फिमेल प्लेबैक सिंगर - पिल्लागाली अल्लारी (अथाडू) और नीके नुवु (मोदाती सिनेमा) (तेलगु)
  • 2007: तमिलनाडु स्टेट फिल्म अवॉर्ड फॉर बेस्ट फिमेल प्लेबैक - मुन्बे वा (सिल्लुनु ओरु काढाल) (तामिल)
  • 2008: अप्सरा अवॉर्ड फॉर बेस्ट फिमेल प्लेबैक सिंगर - बरसो रे (गुरु)
  • 2009: अप्सरा अवॉर्ड फॉर बेस्ट फिमेल प्लेबैक सिंगर - तेरी ओर (सिंह इस किंग)
  • 2008: GPBA - जर्मन पब्लिक बॉलीवुड अवॉर्ड बेस्ट सिंगर (फिमेल) - ये इश्क हाय (जब वी मेट)
  • 2008: ज़ी अस्तित्व अवॉर्ड फॉर एक्सीलेंस इन म्यूजिक
  • 2010: अस्परा अवॉर्ड बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर - तुझ में रब दिखता है (रब ने बना दी जोड़ी)