मेरे दोस्त राजु और दिनेश पिछले दिनों अपना कुछ समय पटना में आयोजित बिहार दिवस समारोह में व्यतित कियें, जिसकी कुछ झलकियाँ आपके सामने प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहा हूँ .........
Saturday, March 26, 2011
बिहार दिवस 2011
मेरे दोस्त राजु और दिनेश पिछले दिनों अपना कुछ समय पटना में आयोजित बिहार दिवस समारोह में व्यतित कियें, जिसकी कुछ झलकियाँ आपके सामने प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहा हूँ .........
Thursday, March 17, 2011
आज के लोग और उनकी जरुरतें

आज लगभग एक महिने के बाद बिजली का आना उसी तरह लग रहा था जैसे वर्षों से प्यासी बंजर भूमि पर बारीश की पहली बुंद गिरी हो ,जैसे कडकडाते जाडे के दिन में बहुत दिनों के बाद सूरज की किरणें धरती पर पडी हों ,जैसे कुछ दिनों से प्यासे किसी भूख से तडप रहे व्यक्ति को भोजन मिल गया हों ।हम चाहे कितनी भी उपमाऐं दे ले पर हमारे दिल की जो खुशी है उसको शब्दों के मोतिओं में नहीं पिरोया जा सकता है। ये खुशी मुझसे ज्यादा उन लोगों के लिये मायने रखती है जो सिर्फ और सिर्फ बिजली पर ही निर्भर हैं ।
अभी कुछ दिनों पहले कितनी अच्छी बिजली थी। लोगों का सारा काम अच्छे ढंग से चल रहा था ।लोग खुशी-खुशी अपना जीवन यापन कर रहें थे ।पर किसी को भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि ये जो बिजली की चकाचौंध दिख रही है वो बस कुछ पल का मेहमान हैं ।अचानक बिजली चली गई ।ऐसा लगा कि जैसे प्रतिदिन आती-जाती है ठीक उसी तरह हुआ होगा ।पर बहुत देर के बाद भी बिजली न आने पर लोगों की व्याकुलता बढी ।लोगों का ध्यान इस ओर गया ।काफी छान-बिन करने के बाद पता चला कि पावर सब स्टेशन से ही कुछ गडबड है पर बाद में पता चला कि वहां का ट्रांसफार्मर ही जल गया है।अब तो लोगों की रही सही आस भी जवाब दे गई लोगों ने सोचा कि चलिये 2-3 महिने के लिये छुट्टी हो ग्या ।
बिजली के चले जाने के बाद ही हम लोगों को इसकी महानता का पता चला । लोगो का जीना मुश्किल हो गया ।सारा काम जैसे ठप हो गया ।किसानों की फसलें पानी के बिना सुखने लगी । गर्मी ने दस्तक दे दी थी सो लोगो को अब पंखें -कुलर की तलब लगने लगी थी पर ये कहां संभव था । छात्रों को तो और परेशानी उनके परीक्षा के ऐन वक्त जो ये मुसीबत आई थी ।उनकी पढाई तो जैसे एकदम ठप सी हो गई पर क्या करें परीक्षा है तो पढना तो पडेगा ही चाहे वो लालटेन जलाकर ही क्यों ना करनी पडे।सबसे ज्यादा परेशानी क्रिकेट प्रेमिओं को हुआ अरे हो क्यों नहीं क्रिकेट विश्वकप जो शुरु हो गया और इस महा कुम्भ में डुबकी लगाए बिना वो कैसे मान सकते थे पर ये भी तो मुश्किल ही था पर लोगों को अपनी वही पुरानी रेडियो याद आई जिससे कम से कम सुना तो जा सके ।
यह सब परेशानियां तो कुछ भी नहीं असली परेशानी तो मोबाईल चार्ज करने वाला है। जो इन सबसे बडा और सबसे महत्वपूर्ण हैं सारे काम हो न हों पर ये तो बहुत जरूरी है इसलिये लोग जहां तहां जनरेटर-इनवर्टर आदि पर चार्ज कराने के लिये दौडने लगे और इसके लिये 10-15 रुपयें देने में कोई गुरेज नहीं कर रहें है ।
जो भी हों लोग परेशान हों तो हों इससे किसी का तो फायदा हुआ ।रेडियो, लालटेन , किरासन तेल, डीजल
तथा मोबाईल चार्ज करने वालों की तो बल्लें बल्लें हो गई ।
किसी तरह करते- करते 1 महिने गुजर गये और कुछ राजनितिक व्यक्तिओं द्वारा ट्रांसफार्मर लगवाने की खबर उडने लगी । सभी राजनितिक दल वाले छोटे-२ नेताओं ने अपने बडे नेताओं के गुणगान गाते हुए चाय-पान की दुकानों पर नजर आने लगें और करते-करते ट्रांसफार्मर आ भी गया पर ये स्पष्ट नहीं हो पाया कि आखिर इसे किस पार्टी के किस नेता ने मंगवाया है? पर जो भी हो इन राजनितिक व्यक्तिओं के आपसी प्रतिद्वंदता के कारण आखिर जनता का तो कल्याण हुआ ।चाहे जिस किसी ने भी लगवाया हो पर जनता का सुख चैन तो लौट आया ।
लोगों के चेहरे पर खुशी पुन: लौट आई तथा सारा काम पहले की तरह होने लगा और बिजली के आने से ऐसा लगा जैसे उनके अंधकारमय जीवन में फिर से प्रकाश लौट आया ।
Sunday, March 13, 2011
मेरी सोच.....
आज बहुत दिनों के बाद सोचा कि कुछ अपने blog पर लिखा जाय । क्या करुँ दोस्तों मेरे पास समय का इतना अभाव है कि मैं चाह कर भी इस काम के लिये समय नहीं दे पाता हूँ ।आज कल मेरा मन कुछ ज्यादा ही बेचैन सा रह रहा है किसी काम में मन न लगना, हमेशा अपने life के प्रति सोचते रहना वगैरह-वगैरह.......।सच कहूँ तो मैं एक ऐसा इन्सान हूँ कि मैं सोचता कुछ हूँ और करता कुछ हूँ ।मुझे कुछ समझ में नहीं आता ।
और इन सब का मुख्य कारण मुझे पता ही नहीं चल पाता है । मैं हमेशा सोचता रहता हूँ कि आखिर मेरी life कब change होगी? और मैं कभी कभी ये भी सोचता हूँ कि मैं जो करना चाहता हूँ क्या मैं वो कर पाऊँगा या यूँ ही सोचते सोचते अपना life बर्बाद कर दूँगा ?
मैंनें आपको कुछ दिन पहले अपने एक दोस्त राजु के विषय में बताया था। वो मेरा best friend है और उसके द्वारा शुरु किये गये "लक्ष्य स्टडी ग्रुप" में हम सभी दोस्तों ने लगभग 6 माह अध्ययन किया पर अब वो मज़ा नहीं रहा जो पहले था ।अब बहुत सारे पुराने लोगों ने आना छोड दिया है और जो लोग आ रहें हैं वो भी अनमने ढंग से....।
मैं भी ये सोच रहा हूँ कि वहाँ जाऊँ कि नहीं ....?
मेरे दोस्त ने ही मुझे सलाह दिया कि क्यों नहीं तुम एक पत्र- पत्रिकाओं की दुकान खोलते हों और मुझे उसका विचार बहुत अच्छा लगा पर क्या बताऊँ अभी तक सोच रहा हूँ।
मेरे कुछ दोस्त ऐसे भी हैं जिनका विचार मुझसे बहुत मिलता जुलता है पर कोई अपने विचारों को बांटना ही नहीं चाहता।
मुझे हमेशा से अच्छें दोस्तों की कमी रही हैं चाहे वह वो class 1 से लेकर 8 तक school life हों या high school और college की life हो और जो मिले भी तो आज न जाने उनकी दुनिया ही कितनी अलग है । पर आज जो मेरे पास जो दोस्त हैं मैं उनसे पुरी तरह संतुष्ट हूँ क्यों कि उन्होनें मेरा हर मोड पर साथ दिया है और आशा है हमेशा देते रहेंगें।
कुछ दिनों से मैं सोच रहा हूँ कि मैं बनारस में किसी कोचिंग में प्रवेश ले लूँ पर....मैंनें आपको बताया ना कि मैं सोचता बहुत हूँ अब देखिये मैं क्या करता हूँ ??
मेरे सोचने वाली जो ....क्या कहूँ ...कोई बिमारी या फिर कुछ और.....?
चलिये इसे साकारात्मक लेते हैं ।मैं सोचता हूँ कि अपने सोचने कि शक्ति को क्यों इस तरह बर्बाद कर रहा हूँ क्यों न इसे किसी उपयोग में लाया जाय ?
और इस तरह सोचते-सोचते मैंनें सोचा कि क्यों न इस सोचने की शक्ति को कुछ और रुप दे दिया जाय और इससे कुछ लिखने की आदत डाली जाय और इस तरह से मैंनें अपने सोचने की शक्ति से कुछ लिखने का मन बनाया । पर जब मैं कुछ लिखने बैठता हूँ तो समझ में नहीं आता कि मैं क्या लिखूँ .....?
इसमें मैं आपलोगों कि मदद चाहता हूँ कि आपलोग मुझे सलाह दें कि मैं किस विषय में लिखूँ ?
आप please मेरी मदद किजिये ताकि मैं अपने मकसद में कामयाब हो सकूं|
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