Friday, December 28, 2012

बचपन

Hello Friends,
                     मेरे पिछले पोस्ट जो कि 10th Oct, 2012 को आया था , उसके बाद वक्त ही नहीं मिला कुछ लिखने के लिये....पर आज फिर से मैं आप लोगों की सेवा में हाजिर हूँ अपने नये पोस्ट के साथ, जिसमें पिछले कुछ दिनों से मेरे दिलों-दिमाग में चल रही सारी बातों को आपके सामने लाने की कोशिश करुंगा और आशा करता हूँ आप उसे उतने ही प्यार और स्नेह से पढेंगें जैसे अब तक पढते आये हैं ।

चूँकि साल का अंतिम महिना, अंतिम सप्ताह और सप्ताह का हर दिन आखिरी है जैसे कि आज गुरुवार है तो अगला गुरुवार अगले साल में आयेगा , तो मैं चाहता हूँ इस साल की कुछ खट्टी-मीठी यादों को सजोंया जाय ।

पिछले पोस्ट के बाद त्योहारों का मौसम शुरु हुआ और त्योहारों की तैयारी , भाग-दौड में दिन कैसे गुजर गया कुछ पता ही नहीं चला । दुर्गापूजा, दशहरा, दिवाली, छ्ठपूजा आदि बडे त्योहारों के साथ- साथ छोटे छोटे त्योहारों जैसे गोवर्धन पूजा, चित्रगुप्त पूजा , करवा चौथ, गणेश चतुर्थी आदि ना जाने कितने त्योहार आयें और अपने साथ ना जाने कितने खुशियाँ लायें । और इन त्योहारों ने अपने साथ साथ कुछ पुरानी यादों को भी ले आयें । जैसे बचपन में हम लोगों के लिये यदि सबसे बडा मुश्किल कोई काम था तो वह था स्कूल जाना । स्कूल             जाते वक्त तो मेरी हालत तो बिल्कुल वैसी होती थी जैसे किसी को फाँसी देने के लिये ले जाया जा रहा हो ।आज हम भले ही अपने स्कूल लाईफ को मिस करते हो क्योंकि अब वो लाईफ लौट कर आने वाला नहीं हैं उसे हम सिर्फ और सिर्फ यादों में ही संजों सकते हैं , स्कूल की मस्ती, दोस्तों के साथ खेलना-कुदना, झगडना, लडकियों के बारे में गॉशिप करना आदि बहुत याद आते हैं वो पल.....। फिर भी इन सभी मस्ती भरे पल होने के बावजुद कुछ ऐसी बाते भी थी जो हमें स्कूल से डराती थी जैसे किसी शिक्षक या किसी विषय से डर ....।

मेरी स्कूल लाईफ मेरे स्कूल चिल्ड्रेन एकाडमी और हाई स्कूल , कर्णपूरा में बिती हैं जिनसे मेरी बहुत सारी यादें जुडी हुई हैं । मेरे स्कूल चिल्ड्रेन एकाडमी में मुझे और मेरे दोस्तों को एक शिक्षक से बहुत डर लगता था । वो विज्ञान विषय के शिक्षक थे । पर उनसे हमें इतना डर लगता था कि हम उनके सामने जाने से भी कतराते थें । ऐसी ही कुछ बातों से कभी कभी हमें स्कूल से ज्यादा छुट्टियाँ अच्छी लगती थी और जब त्योहार आते थे तो फिर पुछना क्या ? और उसमें भी  दुर्गापूजा और दशहरा का त्योहार की तो बात ही कुछ और थी । क्योंकि इसमें सबसे ज्यादा छुट्टियाँ होती थी । इस त्योहार के आते ही दिल बाग बाग हो जाता था । नये कपडे , खिलौने और घुमने के लिये ढेर सारा समय...। ना कोई चिन्ता ना कोई फिक्र....एकदम बिन्दास । दुर्गापूजा में हम दुर्गापूजा पण्डाल घुमने जाते थे और पण्डाल के साथ मुर्तियों के भी दर्शन करते थें । वैसे दुर्गापूजा में माँ दुर्गा की पूजा होती है और माँ की आराधना और अर्चना की जाती है दर्शन तथा पूजन किया जाता है पर हमलोगों का सारा ध्यान राक्षश महिषासुर के मुर्ति पर ही टिकी होती थी , हमारे लिये वो ही मुख्य आकर्षण का केन्द्र होता था । हम अपने दोस्तों से उसके शरीर की बनावट, कपडे , आभुषण तथा उसके वाहन भैंस की ही चर्चा करते थे । दुर्गापूजा में रात को सांस्कृतिक कार्यक्रम जैसे लोकगीत, सिनेमा, आरकेस्ट्रा आदि देखने जाना और रात भर मस्ती करना ।इसके बाद दिवाली की मस्ती , पटाखे और ढेर सारी रोशनी.....। दिवाली पर दीये जलाना और पटाखे जलाने का अपना एक अलग मजा है । और उसके बाद छठ पूजा ।
छठ पूजा की तो बात ही निराली है । घाट पर जाना , दोस्तो से मिलना, मस्ती करना, गुब्बारे खरीदना और एक दुसरे के कपडो के बारे मे बाते करना कि किसका ज्यादा अच्छा है आदि । उन सब बातों को सोचकर ये दिल फिर से उन पलों को जीना चाहता है उन्हें महसुस करना चाहता है ।
बहुत रात हो गई है अब सोना चाहिये पर बात अभी पुरी नहीं हुई है.....बाकी बाते कल...
तब तक के लिये शुभ रात्रि...


Wednesday, October 10, 2012

पैसा और रिश्ता


आप मेरे आज के ब्लॉग पोस्ट का शिर्षक देख कर सोच रहें होंगें कि ये क्या है ,अभी कल ही तो रिश्तो के बारे में इतना कुछ पढा था और आज फिर रिश्ता ? और साथ ही साथ पैसा भी । ये रिश्तों के बीच पैसा कहाँ से आ गया ? पर घबराईये नहीं इस विषय पर लिखने के लिये आज मेरे बहुत ही खाश मित्र अमरेश जी ने मुझसे कहा है । हुआ यूँ कि आज मैने अपने मित्र से कुछ अच्छे विषय के बारे मे पुछा जिसपर मैं कुछ लिख सकूँ तो उन्होने मुझे इस विषय पर लिखने के लिये कहा , जो मुझे बहुत ही प्यारा लगा । तथा इसके लिये मैं अमरेश जी का तहे दिल से धन्यवाद करता हूँ ।

यदि मैं आपलोगों से पुछूँ कि रिश्ता और पैसे में क्या संबंध है तो आप कहेंगे कि कुछ नही क्योंकि रिश्ते तो दिल से बनते है और भावनाओ के साथ जुड़ते है। पर उतना ही सच है कि रिश्तों को स्थाई रखने मे पैसे की अहम् भूमिका होती है।
               चलिये इसे कुछ उदहारण के साथ समझने की कोशिश करते है। माना कि आपके किसी रिश्तेदार के यहाँ कोई पारिवारिक उत्सव है और आपको सपरिवार आमंत्रित किया गया है। आप अपनी आर्थिक स्थिति को देखते हुए वहाँ नहीं जाने का निर्णय करते है। और लिजिए आरम्भ हो गया एक रिश्ते के कमजोर होने की शुरुआत। यहाँ आम तौर पर जवाब होता है कि अगर रिश्तेदार समझदार होगा तो स्थिति को समझ जाएगा? पर दुनिया मे समझदार कितने है?
           माना आपके दोस्त को आपकी जरुरत है। उसने आपको बुलाया भी, पर आप आर्थिक कारणों से जाने मे असमर्थ है। आप अपने दोस्त को समझाते है पर वह इसे दुसरे तरीके से लेता है और एक दोस्ती मे दरार पड़ जाती है।
          कई बार आर्थिक कारण अप्रत्यक्ष रूप से भी रिश्तों को प्रभावित करते है। और इस बात को तो मैंने ख़ुद के साथ अनुभव किया है। कुछ ऐसे रिश्ते जो मेरे लिए बहुत अहम थे बस आर्थिक स्थिति के कारण टूट गए। आज भी याद है जब मुझे बुलाया जा रहा था और मेरे से कहा गया कि अगर तुम नही आए तो शायद सब बिगड़ जाएगा। इसके बाद भी अपनी आर्थिक स्थिति के कारण मै नही जा सका और नतीजा मेरा सबसे अहम् रिश्ता टूट गया।
          आज भी लगता है कि अगर मेरी आर्थिक स्थिति सही होती तो सब नही होता। अपने अच्छे समय मे बनाये गए कुछ रिश्तों को बुरे दौर मे बुरी तरह से टूटते हुए देखा है।
                                  मुझे लगता है कि संबध और रिश्तो की विवेचना करते समय इसे भावनात्मक जुडाव और दिल से जुड़ी चीज मन कर आर्थिक कारक को गौण बनाना सही नही है। सम्बन्ध तभी तक स्थाई है जब तक आप उसे हर स्तर से बनाये रखने मे सक्षम है।चाहे वो मानसिक हो या आर्थिक ।
                       भागदौड़ भरी जिंदगी, फैशनेबल और स्टेट्‍ससिंबल का दिखावा बढ़ने के कारण ये त्योहार पुराने जमाने के रीति-रिवाजों को कहीं पी‍छे छोड़ आए हैं। आज इस बदलते युग ने बहनों की भी परिभाषा बदल दी है। आज बहनों के पास राखी बाँधने का टाइम भी‍ नहीं होता है। तो वह पहले से भाइयों को फोन करके बता देती है कि 'मैं इस समय आऊँगी और इसी समय राखी बाँधकर तुरंत निकल जाऊँगी।'

रिश्ते की यह मजबूत डोर सिर्फ एक फैशन और कमाई का ‍जरिया बनकर रह गई है। उसके पीछे रही भावनाएँ आज कहीं जाकर गुम हो गई है। आज का युग बदल जरूर गया है। लेकिन उसके साथ अगर त्योहारों के मायने भी बदलने लगे तो फिर क्या कहनें, उन रिश्‍तों का क्या जो दिल से निभाएँ जाते है सिर्फ पैसे और फैशन के बल पर नहीं। अगर त्योहार और रिश्‍तों का यह फेर इसी तरह बदलता रहा तो फिर कुछ शेष ही नहीं रह जाता।

आज के समय में कई जगहों पर ध्यान पैसे बचाने का होता है। जैसे कई घरों में यह भी होता है कि भाई के लिए मिठाई लानी हो तो बहन अपने नौकर को पैसे देकर कह देती है जाओ और दुकान पर जो सबसे सस्ती मिठाई हो लेकर आओ। महँगाई के युग में राखियों पर गिरी भावों की गाज से वहाँ पर भी हर तरह का सौदा किया जाता है। सस्ती से सस्ती राखी या कम से कम बजट वाली राखी ली जाती है। राखी के त्योहार का यह बदला हुआ रूप मनुष्य की भावनाओं से खिलवाड़ करता हुआ साफ तौर पर नजर आता है। आखिरकार त्योहार के पीछे जुड़ी भावनाओं का अपना अलग ही महत्व होता है। लेकिन क्या करें समयानुसार आए इस परिवर्तन से सभी के दिलों को झकझोर कर रख दिया है।

आज समय के अनुसार और समाज में बढ़ते पैसे की चलन के कारण राखी के रिश्ते और प्यार के इस बंधन का असर 'पैसे वालों के महलों और गरीबों के झोपड़ों' पर भी नजर आने लगा है। कल का ही एक सच्चाई भरा वाक्या पेश है- जहाँ एक गरीब और अमीर दिलों की रिश्तों की नजाकत बताती हुई सच्ची घटना।

"  एक भैया-भाभी अपनी तीनों ननदों के यहाँ फोन करके राखी पर आने और खाना खाने के लिए आमंत्रित करती है। तीन भाई-तीन बहनों के बीच एक भाई कमाई के मामले में कमजोर वर्ग का हैं जिसके यहाँ से तीनों बहनों को सबसे पहले बुलावा दिया जाता है। उस समय उनमें एक ननद का यह कहना होता है कि सबसे छोटे भाई याने महलों वाले भाई के यहाँ बुलावा अभी तक तो आया नहीं है लेकिन अगर उनके यहाँ का बुलावा आ गया तो हम खाना वहाँ खा लेंगे। तुम्हारे यहाँ सिर्फ नाश्ता कर लेंगे। यह सुनकर उस गरीब भाई के पैरों तले जमीन खसक जाती है कि भाई तो सभी एक से हैं ! अगर कोई कम कमा रहा है तो क्या हुआ। उसकी कमाई से उन रिश्‍तों पर कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए। और फिर जब तीनों भाइयों के यहाँ से पहला बुलावा अगर गरीब भाई ने कर दिया तो कौन-सा गुनाह हो गया। ''


पैसे की इस बदलती माया ने रिश्तों को भी अपनी जकड़ में ले लिया है। पैसे के आगे भाई का स्नेह भरा रिश्‍ता बहन को फीका लगने लगा है। उसे लगता है लखपति भाई के यहाँ खाना नहीं खाएँगे तो शायद उन्हें बुरा लग जाएगा लेकिन रिश्‍ते तो एक से होते हैं फिर क्या लखपति और क्या गरीब, दिल तो एक-सा ही होता है चाहे वह पैसे वाले को हो या गरीब का। उसमें फर्क करने जैसी कोई बात नहीं होती और होनी भी नहीं चाहिए। क्योंकि इस दुनिया सबसे लंबे समय तक जो निरंतर चलता रहता है वह रिश्‍ता है। पैसा तो आज है कल नहीं है।

वैसे भी लक्ष्मी कभी एक जगह टिककर रहती कहाँ है। लेकिन रिश्ते वह होते है जो आपको जोड़े रखने के अलावा एक अंदरूनी संतुष्‍टि भी देते है। जिससे आम आदमी उन रिश्‍तों के बलबूते पर जीवन की हर जंग बड़ी आसानी से लड़ लेता है। काश ! दुनिया के इन अमीरों-गरीबों का फासला दूर हो जाए। और रिश्ते सही मायने में रिश्‍ते ही रहे तो फिर इस दिल की दुनिया वालों के उन रिश्‍तों के क्या कहने।

वास्तव में जिस दिन ऐसा कुछ होगा उस दिन इस ‍दुनिया का रूप ही अलग-सा नजर आने लगेगा। और तभी सभी के दिलों को सुकून महसूस होगा कि रिश्ते की यह मजबूत डोर कभी किसी अमीर और गरीब के दिलों को पाट ना सकेंगी।
रिश्तों की महक को सिक्कों के खनक के साथ मिलाने की कोशिश ना की जाय तो अच्छा हैं वरना एक दिन ऐसा आयेगा जब आपके पास पैसे और सिक्कों के ढेर के आलावा कुछ शेष ना रहेगा और हम तन्हा जीवन बिताने के लिये विवश हो जायेंगें और हमारी तन्हाई दुर करने के लिये हमारे साथ कोई ना होगा ।

धन्यवाद  ।

Tuesday, October 9, 2012

कुछ अनकहे रिश्ते


रिश्ता यानि प्यार, मोहब्बत, इश्क, लगाव, समर्पण, इज्जत, मान-सम्मान और न जाने क्या-क्या? ये ढाई अक्षर का छोटा सा शब्द अपने अन्दर ना जाने कितनी गहराई या विशालता लिये हुये है । जिसे आज तक किसी ने अच्छे से नहीं समझ पाया ।

दुनिया में सभी लोग किसी ना किसी से रिश्तों में जुडे होते हैं । वो रिश्ता कुछ भी हो सकता है जैसे माँ-बाप , भाई-बहन, पति-पत्नि, भाई- भाई, बहन- बहन , प्रेमी-प्रेमिका , दोस्त आदि का रिश्ता ।

पर इन सभी रिश्तों के आलावा भी कई ऐसे रिश्ते होते हैं जिन्हें हम कोई नाम नहीं दे पाते , जिन्हें हम अनकहे रिश्ते कहते हैं ।

क्या आपने कभी किसी को प्यार किया है यदि हाँ तो आप इस बात को अच्छें तरह से समझ सकते हैं , मेरे कहने का मतलब ये कतई ना निकालिये कि मैं किसी प्रेमी-प्रेमिका वाले प्यार की ही बात कर रहा हूँ , ये प्यार किसी से भी हो सकती है जैसे ऊपर के रिश्तों में से कोई भी हो सकता है ।

जैसे आपको कोई अच्छा लगता है तो उसे आप ना तो प्यार कह सहते हैं और ना ही किसी रिश्ते का नाम दे सकते हैं । जैसे कितने लोग कहते हैं कि ये मेरा पहला प्यार है पर वास्तव में लगभग सभी लोगों के साथ ऐसा होता है कि वो जिसे पहला प्यार कह रहे हैं वो उनका पहला प्यार नहीं है । इससे पहले भी आपकी जिन्दगी कोई और दस्तक दे चुका है वो कोई भी हो सकता है वो आपका बचपन का कोई सहपाठी भी हो सकता है या सकती है जिसे आप प्रतिदिन देखते हैं , उसका इंतजार करते है, उसके खुश होने पर खुश और दुखी होने पर दुखी होते हैं क्योंकि वो आपको अच्छा लगता / लगती है , उसकी बाते, उसका चेहरा सब कुछ अच्छा लगता हैं । पर आप उसे किसी रिश्ते में बाँध नहीं पाते हैं लेकिन फिर भी एक अनकहा रिश्ता तो होता है जो आपको उससे जोडे हुये है । पहला प्यार तो हम तब मानने लगते हैं जब सामने वाला भी उसे स्वीकार करे पर क्या प्यार में दोनों लोगों की स्वीकृति जरुरी है ? शायद नहीं ।

इन्सानों को एक दुसरे से प्यार करते हुए देखा है , सुना है, पढा है । पर क्या आपको किसी निर्जिव चीजों से प्यार हुआ है ? इसका जवाब आप शायद ना में दें । पर वास्तव में ऐसा है नहीं। हम निर्जिव चीजों से भी उतना ही प्यार करते हैं जितना कि सजीवों से ।और उसमें उनके स्वीकृति की कोई आवश्यकता नहीं होती ।

जैसे आपको अपने बिस्तर से प्यार, किसी खाश शर्ट या टी-शर्ट से प्यार, कलम, कॉपी , डॉयरी, मोबाईल या अपने किसी खाश की दी हुई कोई गिफ़्ट से प्यार। ये सभी प्यार एक तरफा प्यार है और इसमें सामने वाले की स्वीकृति की कोई आवश्यकता नहीं है ।

इनसे एक अनजाना सा रिश्ता होता है....एक अनकहा रिश्ता....।

तो आप इस अनकहे रिश्तों को निभाते रहिये...क्योंकि जिस दिन ये रिश्ता खत्म हो गया तो समझो हमारी दुनिया खत्म हो गई ।

तब तक के लिये

शुभ रात्रि...।









Wednesday, September 19, 2012

Songs ....मेरे दिल के करीब..

संगीत कुछ लोगों के जीवन का अभिन्न अंग होता है, और उन लोगों में मैं भी हूँ । मुझे संगीत से इतना लगाव है कि मैं ये आप लोगों को बता भी नहीं सकता । या यूँ कहिये कि इतना ज्यादा लगाव है कि मैं शब्दों में उसको बयाँ नहीं कर सकता क्योंकि संगीत तो महसुस करने की चीज है , इसमें डुब जाने की चीज है , इसमें खो जाने की चीज है।और इतना खो जाने के कि और कुछ भी याद ना रहे । पर उसके लिये संगीत का मधुर और दिल को छु लेने वाला भी होना चाहिये ।                                             
  मैं अपने इस ब्लॉग पोस्ट में अपने कुछ पसंद के songs  आपके लिये लाया हूँ और आशा करता हूँ कि ये आपको भी पसंद आयेंगें ।
  • जादु है नशा है, मदहोशियाँ ....तुमको भुला के अब जाऊँ कहाँ.....(जिस्म)
  • हम दिल दे चुके सनम , तेरे हो गयें हैं हम......तेरी कसम...तेरी कसम ( हम दिल दे चुके सनम)
  • दिल है कि मानता नहीं ..ये बेकरारी क्यूँ हो रही है, ये जानता ही नहीं ....( दिल है कि मानता नहीं)
  • सच कह रहा है दिवाना, दिल..दिल ना किसी से लगाना ...( रहना है तेरे दिल में )
  • हमें जब से मुहब्बत हो गयी है...ये दुनिया खुबसुरत हो गयी हैं....( बार्डर )
  • पहला नशा ...पहला खुमार...( जो जीता वही सिकन्दर )
  • जादू है तेरा ही जादू...जो मेरे दिल पे छाने लगा...(गुलाम)
  • घर से निकलते ही...कुछ दुर चलते ही...( पापा कहते हैं)
  • सुरज हुआ मद्दम...चाँद जलने लगा...(कभी खुशी कभी गम)
  • वादा रहा सनम...होंगें जुदा ना हम ..( खिलाडी)
  • मुझे हक है....( विवाह)
  • सीमायें बुलाये तुम्हे चलना ही...(  L.O.C. )
  • मैं कहीं भी रहूँ...( L.O.C.)
  • एक साथी और भी था ...(L.O.C.)
  • प्यार भरे गीत....(L.O.C.)
  • और आहिस्ता किजिये बातें ( पंकज उधास )
  • ऐसा जख्म दिया है ...(अकेले हम अकेले तुम)
  • दिल क्यूँ ये मेरा शोर करें....(काईट्स)
  • तन्हाई....तन्हाई...(दिल चहता है)
  • तुम चैन हो ..करार हो....( मिलेंगें मिलेंगें)
  • ओ रे पिया....( आजा नचले)
  • आओगे जब तुम ओ साजना....(जब वी मेट)
  • सईयाँ .....सईयाँ....तु जो छु ले प्यार से ...( कैलाश खेर)
  • तुझे याद ना मेरी आये....( कुछ कुछ होता है )
  • निंद में है.....(एक विवाह ऐसा भी )
  • पहली- पहली बार बलिये....(संघर्ष )
  • ये दिल तुम बिन कहीं लगता नहीं ...(इज्जत)
  • मुझे तेरी मुहब्बत का,सहारा मिल गया होता..(आप आये बहार आयी)
  • तुझ संग प्रित लगाई...(कामचोर)
  • तेरी दुनिया से होके मजबुर चला...(पवित्र पापी)
  • तेरे मेरे बीच में कैसा है ये बन्धन अनजाना...(एक दुजे के लिये)
  • सोलह बरस की बाली उमर को सलाम .. (एक दुजे के लिये)
  • प्यार हमारा अमर रहेगा...(मुद्दत)
  • जनम जनम का साथ है तुम्हारा-हमारा ...( भीगी पलकें ) 
  • वादा करले साजना...तेरे बिन मै ना रहूँ...(हाथ की सफाई)
  • दुश्मन ना करे...दोस्त ने वो काम किया है...( आखिर क्यों ) 
  • जिन्दगी की ना टुटे लडी....प्यार कर ले...(क्रांति)
                                    और भी बहूत से ऐसे गीत हैं जो मेरे दिल के बहुत करीब हैं, जो खाली समय मे मेरे सबसे अच्छे साथी हैं । मेरे संगीत के इस सफर को सुहाना बनाने में मेरा सेलफोन और लैपटॉप बहुत साथ देते हैं ।
                         आशा करता हूँ कि आज का संगीतमय सफर आपको बहुत प्यारा लगा होगा ...और ऐसे ना जाने कितने ही सफरों पर आपको मेरा साथ निभाना है । निभायेंगें ना.......?
इसी वादे के साथ....शुभ रात्रि...संगीतमय रात्रि...।

Saturday, September 15, 2012

जिन्दगी......


"कभी कभी हम अपनी जिन्दगी से ऊब जाते हैं और जिन्दगी जिना एक मुश्किल भरा काम लगने लगता है, एक अनचाहा बोझ जो हम अपने सिर पर बिना किसी वजह के एक जगह से दुसरे जगह ढोते रहते हैं, और कभी कभी तो हम इस बोझ को ढोते ढोते इतने थक जाते हैं कि लगता है कि इस मायुसी भरी जिन्दगी में अब कुछ ना रहा, अब इसे खत्म कर देने में ही भलाई है।"

                                                      ऊपर की ये पंक्तियाँ पढ रहे कुछ लोगो को तो बहुत अच्छा लग रहा होगा और कुछ लोगों को ये कोरी बकवास लग रही होगी ।आप अपने आप को किस प्रकार के लोगों में रखते हैं , पहले वाले या दुसरे वाले ? खैर मैं आप लोगों के बारे में तो कुछ नहीं कह सकता पर मैं अपने बारे में तो कह ही सकता हूँ ।
                                                              मुझे ऊपर की ये पंक्तियाँ बहुत अच्छी लगी और मैं अपने आपको पहले वाले लोगों की श्रेणी में रखता हूँ । अब आपको मेरे ऊपर गुस्सा आ रहा होगा ...पर इसमे गुस्सा होने वाली कोई बात नहीं । सभी लोगों को अपनी पसंद-नापसंद करने की पुरी आजादी है , आखिर हम आजाद भारत के वासी हैं ।
                                                           अब मैं आपको बता दूँ कि मुझे ऐसा क्यों लगा तो बात ये है कि कभी- कभी हम अपने आपको लोगों की खुशियों के लिये पुरी तरह अर्पण कर देते हैं और अपने बारे में कुछ ना सोचते । चाहे उन लोगों में हमारा परिवार हो या हमारे friends । मुझे भी कभी- कभी ऐसा लगता है कि मैं भी almost ऐसा ही हूँ । पर लोगों के बारे में सोचते सोचते हम इतने थक जाते हैं कि अपने बारे में सोच ही नहीं सकते । और दुख तो तब होता है जब वही लोग हमारे बारे में , जो उनके लिये इतना कुछ करते रहते हैं, कुछ नहीं सोचते ।
                                                     लोगों का ऐसा स्वार्थ देख कर इस दिल को बहुत ठेस लगती है और जिन्दगी भर दिल में एक टिस सी रह जाती हैं और दर्द को छुपाये छुपाये जब दिल भर आता है तो फिर वही ऊपर वाली पंक्तियाँ याद आती है ।
                                                                      पर फिर कुछ सोचकर ये दिल रुक जाता है कि ये हम क्या सोच रहें है ? क्या जिन्दगी यही है ? नहीं ये जिन्दगी नहीं है, जिन्दगी जिने का नाम है और इसी ख्याल से हम जिये जा रहे हैं ।

पर मन में एक विश्वास है कि मेरे साथ भी कभी कुछ अच्छा होगा ।
" क्यों कि जिन्दगी ना मिलेगी दोबारा"


जला जला कर खुद को,खाक करते हो क्यूं।
ज़िन्दगी अनमोल खजाना,जीना तो सीख लो।

देख कर औरों की खुशियां कुढ़ते हो क्यूं
गैरों की खुशी में भी,हंसना तो सीख लो।

रास्ते मंजिलों के,आसान ढूंढ़ते हो क्यूं
मुश्किलों का सामना,करना तो सीख लो।

छूने को आसमान की हद,कोशिश करो जरूर
पहले पांव को जमीं पर,जमाना तो सीख लो।

अपने को गैरों से,ऊंचा समझते हो क्यूं
एक बार खुद को भी कभी,आंकना तो सीख लो।

तक़दीर को ही हर कदम पर,कोसते हो क्यूं
रह गई कमी कहां पे है,जानना तो सीख लो।

कर के भरोसा दूसरों पे,पछताते हो क्यूं
बस हौसला बुलंद करना,खुद का तो सीख लो।

बात सिर्फ़ इतनी सी है,जीवन फ़कत पाना ही क्यूं,
खोना भी पड़ता है बहुत,सब्र करना तो सीख लो।

Monday, August 6, 2012

Friendship

Friendship अर्थात दोस्ती.....कितना छोटा और प्यारा सा शब्द है पर यह छोटा सा शब्द अपने अन्दर कितनी विशालता और गहराई लिये हुये है इसका पता किसी को नहीं है । जिसने भी इसका पता लगाने की कोशिश की वो इसी में खो कर रह गया ।

"यूं तो कहने को परिवार, रिश्तेदार साथ हैं, जिन्दगी बिताने को,
फ़िर भी एक दोस्त चाहिये, दिल की कहने- सुनने, बतियाने को !! "

हाँ बिल्कुल सच है ये कि सारे नाते रिश्ते और परिवार होने के बावजुद भी एक ऐसा कोई चाहिये , जिससे हम और आप अपने दिल की बात कर सके और उसी कोई का नाम Friend या दोस्त है ।

दोस्ती, एक सलोना और सुहाना अहसास है, जो संसार के हर रिश्ते से अलग है। तमाम मौजूदा रिश्तों के जंजाल में यह मीठा रिश्ता एक ऐसा सत्य है जिसकी व्याख्या होना अभी भी बाकी है। व्याख्या का आकार बड़ा होता है। लेकिन गहराई के मामले में वह अनुभूति की बराबरी नहीं कर सकती। इसीलिए दोस्ती की कोई एक परिभाषा आजतक नहीं बन सकी।

दोस्ती, शुद्ध और पवित्र मन का मिलन होती है। एक बेहद उत्कृष्ट अनुभूति, जिसे पाते ही तनाव और चिंता के सारे तटबंध टूट जाते हैं।। उलझनों की जंजीरें खुल जाती है। दोस्ती एक ऐसा आकाश है जिसमें प्यार का चांद मुस्कुराता है, रिश्तों की गर्माहट का सूर्य जगमगाता है और खुशियों के नटखट सितारे झिलमिलाते हैं। एक बेशकीमती पुस्तक है दोस्ती, जिसमें अंकित हर अक्षर, हीरे, मोती, नीलम, पन्ना, माणिक और पुखराज की तरह है, बहुमूल्य और तकदीर बदलने वाले।

एक सुकोमल और गुलाबी रिश्ता है दोस्ती, छुई-मुई की नर्म पत्तियों-सा। अंगुली उठाने पर यह रिश्ता कुम्हला जाता है। इसलिए दोस्त बनाने से पहले अपने अन्तर्मन की चेतना पर विश्वास करना जरूरी है।

सचाई, ईमानदारी, परस्पर समझदारी, अमिट विश्वास, पारदर्शिता, समर्पण, सम्मान जैसे श्रेष्ठ तत्व दोस्ती की पहली जरूरत है। दोस्त वह विश्वसनीय शख्स होता है जिसके समक्ष आप अपने मन की अंतिम परत भी कुरेद कर रख देते हैं। एक सच्चा दोस्त आपके विकसित होने में सहायता करता है। उसका निश्छल प्रेम आपको पोषित करता है। जिसके साथ आप अपनी ऊर्जा व निजता बांटते हैं।

दोस्ती की नवविकसित नन्ही कोंपल को जमाने के प्रदूषण से बचाना जरूरी है। तमाम उम्र इंसान को एक अच्छे दोस्त की तलाश रहती है। इसी तलाश में यह पता चलता है कि दोस्ती का एक रंग नहीं होता। अलग-अलग रंगों से सजी दोस्ती कदम-कदम पर अपना रूप दिखाती है। कई दोस्त दोस्ती की गरिमा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर देते हैं। अकसर अच्छी दोस्ती को शक की दीमक लग जाती है जो अन्तत: उसे खोखला कर के छोड़ती है।

दोस्ती, उस गठरी के समान होती है जिसमें बंधी होती है ढेर सारी बातें, गहरे रिश्ते और खूबसूरत अहसास। इस गठरी को तुरंत खोलना चाहिए। वरना वे बातें, जो तह कर रखी हैं, वे रिश्ते, जो सिलवटों से भर गए हैं, और वे अहसास, जो गुड़-मुड़ हो गए हैं, उसमें ही गल सकते हैं, फट सकते हैं, सड़ सकते हैं। इस गठरी को मिलन सूर्य की गुनगुनी धूप में खोल कर फैलाया जाए। जैसे ही नमी दूर होगी खिल उठेगीं ढेर सारी बातें, रिश्ते और अहसास।

दोस्ती(Friendship) का धागा बहुत ही नाजुक होता है. जरा सा भार पड़ा नहीं कि अच्छे अच्छे बिछुड़ जाते है. बचपन की दोस्ती को ही ले लीजिए. मैंने और आपने कितने दोस्तों से हमेशा साथ रहने की बात की थी लेकिन क्या अब वह सभी दोस्त(Friend) साथ हैं, नहीं ना. कहां गए वह दोस्त क्या किसी भीड़ में खो गए है या हमसे बहुत दूर चले गए. बचपन(Childhood) में दोस्त तो बहुत जल्दी बन जाते थे पर अब दोस्त बनाने थोड़ा मुश्किल हो गया है. और दोस्त बनाने के बाद भी आराम नही मिलता दोस्ती आगे बढ़ाने के लिए भी काफी बेलन बेलने पड़ते है. आइयें कुछेक ट्रिक और टिप्स(Tips) के जरिए दोस्ती के जोड़ में फेविकॉल का दम लगाएं.-
  • Honesty- दोस्ती में ऑनेस्टी सबसे बड़ा मूल्य है। यदि फ्रैंडशिप (Friendship) में ऑनेस्टी होगी तो यह ज्यादा मजबूत होगी। कई बार देखा गया है कि ऑनेस्टी न होने के कारण ही कॉलेजेस में कई अच्छी दोस्ती टूट जाती हैं और जिंदगी में हमेशा के लिए एक कड़वा स्वाद दे जाती है। कई स्टूडेंट इस अनुभव को जिंदगीभर नहीं भूल पाते हैं। इसलिए अपने दोस्त के प्रति ईमानदार रहें।
  • Love and Care- दोस्ती में प्यार-मोहब्बत(Love and Relationshi) न हो तो मजा ही क्या है। लेकिन प्यार-मोहब्बत का मतलब किसी तरह का स्वार्थ नहीं होता। यह किसी मतलब से नहीं की जाती और न ही इसके जरिए कोई मतलब हासिल किया जाता है। इसमें तो एक-दूसरे के प्रति लव एंड केयर(Love and Care) की भावना होती है। एक-दूसरे का ध्यान रखा जाता है, एक-दूसरे की पसंद-नापसंद का ध्यान रखा जाता है।
  • Understanding- यदि प्यार-मोहब्बत(Love) हो और अंडरस्टैंडिंग न हो तो भी बात नहीं बनती। कई बार दोस्तों में दरार आ जाती है और दोस्ती टूट जाती है। इसका एक बड़ा कारण होता है अंडरस्टैंडिंग की कमी। यदि दो दोस्तों के बीच बेहतर अंडरस्टैंडिंग होगी तो यह ज्यादा मजबूत होगी। अपने दोस्त को बेहतर ढंग से जानने-समझने की कोशिश करेंगे, तो गलतफहमियाँ पैदा नहीं होंगी।
  • Respect- कई बार मौज और मस्ती के मूड में, जोश और जुनून में दोस्त अपने दोस्तों से ऐसी मजाक कर बैठते हैं, जो उन्हें नागवार गुजरता है। उन्हें इंसल्टिंग फील होता है। इसलिए यह ध्यान रखें कि आपका कितना भी अच्छा फ्रैंड हो, आपके कितने भी बेतकल्लुफ रिश्ते हों लेकिन वह आपसे चाहता है कि आप उसका रिस्पेक्ट करें। अक्सर दोस्त यह भूल जाते हैं। दोस्तों का रिस्पेक्ट करें।

" दुनिया में कहीं भी होता हो मगर,
दोस्त का घर दूर कहाँ होता है!
जब भी चाहूँ आवाज लगा लेता हूँ,
वो मेरे दिल मे छुपा होता है!
जाने कैसे वो दर्द मेरा जान लेता है,
दुखों पे मेरे वो भी कहीं रोता है !"

और अंत में

" हर कोई ऐसा एक मित्र पाए,
जो बातें सुनते थके नही,
और मौन को भी जो पढ जाए !!"  

Tuesday, July 17, 2012

बारिश....



बारिश में क्या है ऐसा कि आ रही है, तो गुदगुदाती रहती है । ना आए तो इंतज़ार और आ के हटी हो तो खुशबू ,यादें और किसी की याद
किसी और मौसम में ये बात कहाँ ?
बारिश होती है जहाँ , मैं खिलता हूँ वहाँ । बारिश होती है जहाँ, मैं मिलता हूँ वहाँ।
बारिश!!!
अच्छा नाम है ना?
यूनीक सा?



बारिश क्या होती है ? ये क्यों होती है ? क्या आपने कभी इसके बारे में सोचा है ? कभी सोचने का मौका मिला ? नहीं ना ?

तो चलिये आज मैं आपको एक ऐसी दुनिया में ले चलता हूँ जहाँ सब कुछ बारिश में भींगा हुआ है ।

बारिश ना हो तो शिकायत और हो तो शिकायत । क्यों? क्योंकि बारिश की ईच्छा सभी की होती है , सभी चाहते हैं कि बारिश हो। जब गर्मी के मौसम में लोगों क जीना मुहाल हो जाता है तथा गर्मी और उमस के कारण लोगों की जिन्दगी निरस और बोझील लगने लगती है , तब हर एक की दिल से एक ही आवाज निकलती है और वो है बारिश । और जब बारिश आती है तो लोगों की जान में जान आती है । सारी गर्मी छुमंतर हो जाती है । और बारिश की शितलता में लोगों की जिन्दगी फिर से जाग उठती है और तरो ताजा हो जाती है ।

ये बात सिर्फ मनुष्य पर ही नहीं , इस धरती के सारे प्राणियों के साथ होती है और यहाँ तक की पेड-पौधों के साथ भी । अगर वास्तव में देखा जाय तो बारिश की सबसे ज्यादा जरुरत पेड -पौधों को ही होती है और बारिश होने पर जितने ज्यादा खुश वो होते हैं शायद ही कोई होता हो ।

ये तो हुई बारिश के फायदे पर कभी कभी ये बारिश लोगों के लिये मुसिबत भी बन जाती है । जैसे बारिश का मौसम आते ही आप अपने फैशन को लेकर परेशान हो जाते हैं। आपको लगता है कि बारिश हुई नहीं कि आपका सारा फैशन खराब हो जाएगा। हालांकि बारिश में भीगने और मस्ती करने के अपने मज़े हैं फिर भी आप बारिश के दिनों में अपनी स्टाइल की कुछ ज्यादा ही फिक्र करने लगते हैं।

किसी का कोई जरुरी काम आ गया और तभी बारिश शुरु हो गई तो सोचिये क्या हाल होगा उनका ?

पर फिर भी ये इसके आन्नद के आगे कुछ भी नहीं । बारिश का इंतजार वैसे तो सबको होता है पर सबसे ज्यादा उसे होता है जिसे बारिश और बारिश का मौसम दोनों ही पसंद हो । मुझे भी बारिश बेहद पसंद है बारिश में भीगना फुहारों के साथ मस्ती करना उन फुहारों से खुद को भीगाना पानी में छप छप करना पानी में नाव तैराना । आज बारिश में भीगते हुए कहीं भी जाने में बड़ा मजा आता है बारिश में भुट्टा पकौड़े चने चपटे खाने का अलग ही मजा है । हर मौसम की बात अलग होती है पर बात जहाँ बात बारिश के मौसम की हो वहाँ तो मजा ही मजा है । बारिश में ही ना जाने कितने फूल पत्तियाँ फल कलियाँ उगती होगी वैसे एक बागवान या माली बागवानी के लिए बारिश उत्तम मौसम और कोई नहीं मानता होगा। खेत के किसान खेती के लिए इन्द्र देवता से कितनी प्राथनायें करते होगें हे भगवान बारिश कर दें । उनकी बारिश से ना जाने कितनी उम्मीदें आशाऐं जुड़ी हुई होगीं । वो कहतें है ना आशा से आकाश थमा है ।

बारिश के गानों का भी अलग ही मजा है उन गानों में ना जाने कितनी मधुरता होती है कि वे गाने बारिश में भीगने को मजबूर कर देते है । मुझे भी बारिश के गाने अच्छे लगते है । बारिश से जाने कितनी दुख औए सुख जुड़े होगें कितनो को बारिश पसंद होगी कितनो को नापसंद । कितने ही लोग घर के अंदर बैठकर पकौड़े खाते चाय की चुस्कियों और टीवी कोई मूवी देखते हुए बारिश का लुत्फ उठाते है और कितने बाहर बारिश में भीगतें हुए सैर करते हुए मस्ती करते हुए लुत्फ उठाते होगें । सबके बारिश के मजे अलग अलग है । इस बारिश के मौसम का लुत्फ उठाईयें मजें कीजिये खुद को इस फुहारों से भीगा दीजिये । ऐसे मौसम साल भर देखने को नही मिलते है । बारिश को बच्चा बड़े बुजुर्ग सभी पसंद करते है । बारिश का सबसे ज्यादा मजा तो स्कूल के बच्चों को आता होगा क्योंकि उनके स्कूल शुरु होने पर ही बारिश का मौसम आता है ।

मुझे इस विषय पर लिखते हुये एक कविता याद आई जो मैं यहाँ शेयर कर रहा हूँ जिसे कवि ने बहुत मधुरता और आन्नद के साथ लिखा है -

कैसे करूँ मैं स्वागत तेरा बता ओ बरखा रानी
घर की छत गलती है जब-जब बरसे पानी

बारिश में लगता है मौसम बड़ा सुहाना
बूँद-बूँद ताल बजाए पंछी गाएँ गाना
मैं सोचूँ, कैसे चूल्हे की आग जलानी

ठंडी-ठंडी बौछारें हैं पवन चले घनघोर
बादल गरजे उमड़-घुमड़ नाचे वन में मोर
मन मेरा सोचे, कैसे गिरती दीवार बचानी

इंद्रधनुष की छटा बिखेरी बरसा पानी जम के
पाँवों में नूपुरों को बाँधे बरखा नाची छम से
मैं खोजूँ वो सूखा कोना जहाँ खाट बिछानी

प्रकृति कर रही स्वागत तेरा कर अपना शृंगार
पपीहे ने किया अभिनंदन गा कर मेघ मल्हार
मैं भी करता स्वागत तेरा भर अँखियों में पानी
आ जा ओ बरखा रानी!
आ जा ओ बरखा रानी!

आज के लिये बस इतना ही .....खुशियों से भरा हो आपका बारिश का मौसम और बारिश के हर साथ अपने हर लम्हे को सजाइयें ।

Sunday, July 15, 2012

Modern Life



कुछ लोगों की ये आदत होती है कि वे अपने आपको दूसरे लोगों से अलग दिखायें या अपने आपको Modern दिखायें । और वे रोज नये नये स्टाईल और फैशन के कपडे पहनते हैं अलग स्टाईल के बाल- मूछे आदि रखते या कटवाते हैं और कभी कभी तो उनके बोलने ,चलने और बैठने का स्टाईल भी अलग होता है । पर क्या वे वास्तव में Modern हैं ? क्या सिर्फ Modern कपडे पहनने से लोग Modern हो जाते हैं ? इसका जवाब शायद आपको मेरा ये Blog post पढ़ के मिलेगा ।





मैं आपको अपने एक मित्र के बारे में बताता हूँ मैं उनका यहाँ नाम नहीं लूँगा क्योकि शायद ये Blog post वो भी पढ़े और शायद उन्हें अच्छा न लगे ।


मेरे मित्र में एक खाश बात ये है कि वो बहुत Modern हैं । और इतना Modern हैं कि पूछिए मत । चाहे कैसा भी फैशन हो वो अपनाने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं । पहले मैं आपको उनके बारे में कुछ बता दूँ । मेरे मित्र हमेशा जिन्स पहनते हैं और वो भी एकदम latest design की । साथ में टी -शर्ट या latest design की शर्ट पहनते हैं । हमेशा अच्छे और latest स्टाईल के बाल रखते हैं और उन्हें मुछ का कोई शौक नहीं है , वो हमेशा clean shave करना पसंद करते हैं । उन्हें लगता है कि मुछे रखने से व्यक्ति पुराना लगता है । वो हमेशा अच्छी और latest design की जूते या चप्पल पहनते हैं ।उनके बोलने और चलने - फिरने का स्टाईल भी Modern है । कुल मिला -जुला कर कहा जाये तो वो एकदम Modern हैं ।


पर मेरे हिसाब से ना तो वो Modern हैं और ना ही उनकी सोच Modern है । क्योंकि उनकी सोच पुरानी और दकियानूसी है । और वो नई तकनीको से बिलकुल अनभिज्ञ हैं । न तो उन्हें कंप्यूटर का ज्ञान है और न ही इन्टरनेट का ।फसबूक और ट्वीटर तो बहुत दूर की बात है ।


मोबाइल तो उनके पास है पर उसमे नई तकनीक नहीं है । वही पुरानी मोबाइल जिससे केवल बात किया जा सकता है ।


परन्तु आज की life इतनी fast है कि बिना इन तकनीको के एक पल भी नहीं रहा जा सकता । लोगो को एक दुसरे से जुड़े रहने के लिए इन सब चीजो की अति आवश्यकता है । फसबूक और ट्वीटर पर अपनी दिनचर्या को शेयर करना लोगो की आदत में शुमार है । लोगो को एक दुसरे से chat करना , मोबाइल पर SMS करना आदि उनके उनके जीवन का महत्वपूर्ण भाग है ।


जो व्यक्ति इन सबसे अनजान है उसे कैसे Modern कहा जा सकता है ।


क्या Modern कपडे पहनने मात्र से कोई Modern सकता है ?






आपके जवाब के इन्तेजार में ............



Thursday, July 5, 2012

उम्मीद का दीपक

आज ना जाने क्यों  मुझे ऐसा लगा कि मै अपने सपनो की दुनिया से बहुत दूर चला आया हूँ । न जाने मुझे ऐसा क्यों लगा कि मैं जो चाहता था,  जो सोचता था वो बिलकुल भी नहीं हो रहा है । क्योंकि मेरे ख्वाबो की दुनिया इस दुनिया से बिलकुल अलग है ।
                                         मुझे इस बात का अहसास आज शाम को उस वक्त हुआ जब मेरे मित्र ने मुझसे कहा कि ,"तुम भी क्या क्या सोचे थे  और क्या हो रहा है ?" मुझे  उसके सारे  शब्द तो याद नहीं पर उसके कहने का मतलब यही था । उस वक्त मुझे कुछ ना सुझा और कुछ देर सोचने के बाद मैंने जवाब दिया ,"  आत्मविश्वास की कमी , मुझमे आत्मविश्वास की कमी हो गयी है और  शायद ये सब उसी के कारण हो रहा है ।" और मै खामोश हो गया ।
                                                 और ये बात सही भी है कि आत्मविश्वास  आदमी के पास एक ऐसा अस्त्र है जिससे वो जो चाहे वो कर सकता है । और उस अस्त्र की मुझे बहुत कमी महसूस हो रही है । इसके बिना मैं अपने आप को बहुत असहाय महसूस कर रहा हूँ ।अपने आप को एक अपाहिज की भांति समझ रहा हूँ जो सब कुछ चाहते हुए भी कुछ नही कर  सकता ।
                                                समय के साथ लोगों के पसंद भी बदल है , उनके जीने का सलीका बदल जाता है । मेरे साथ कुछ ऐसा  ही हो रहा है । पर इसमे  कुछ ही, क्योंकि मेरे पसंदों की संख्या कम हो रही है और नापसंदो की बढ़ रही है ।
                                                  मुझे याद  है कि कुछ समय पहले मेरे पास मुझे क्या क्या अच्छा लगता है क्या नहीं , इसकी एक पूरी लिस्ट थी पर आज नहीं ।पता नहीं क्यों दिल में न जाने कैसी बेचैनी सी है ? कुछ भी अच्छा नहीं लगता है । मुझे संगीत ,फिल्मे , किताबे और पेंटिंग्स का बहुत शौक था । पेंटिंग्स तो बहुत पीछे छुट गया पर आज भी मेरे दिल के पास फिल्मे और संगीत हैं । किताबों के लिए तो समय ही नहीं बचता । जब भी मैं कुछ पढने चलता हूँ , न जाने क्यों कुछ पढ़ ही नहीं पाता हूँ । और फिल्मो के लिए तो घर  पर समय ही नहीं है और कभी थोडा समय निकाल पाता हूँ तो वो  तब  जब मैं बनारस जाता हूँ वो भी कभी कभी । पर वहां भी मेरा मन नहीं लगता । सब मिला जुला कर संगीत से अच्छा साथी मेरा कोई नहीं है ।संगीत के लिए मेरे पास मेरा लैपटॉप है और मेरा मोबाईल है । सच कहा जाय  तो मोबाईल मेरे साथ हमेशा रहता है नोकिया आशा 200 ,जिसमे इन्टरनेट से गाना डाउनलोड करना और सुनना अच्छा लगता है ।

          खैर जो भी हो हालत से लड़ना और जितना ही जिंदगी का दूसरा नाम है और मैं भी वही करने का प्रयास कर रहा हूँ ।म्यूजिक और इन्टरनेट को साथी बनाकर जिंदगी के कडवे और नीरस पल को काटने की कोशिश कर रहा हूँ ।और अपने दिल के  किसी कोने में आशा के दीये में उम्मीद   का दीपक जलाये हुए हूँ ताकि  ये नीरस पल रूपी अँधेरा जल्द से जल्द समाप्त हो । और एक नए आशा की  किरण जगमगाए ।और एक सुन्दर और शांत तथा आनन्दमय जीवन की शुरूआत हो सके ।
     धन्यवाद ।
      
                                                      

Tuesday, July 3, 2012

Hi friends.....

Hi friends.....
how are you?
             आज बहुत दिनों के बाद,  i think लगभग 1 साल के बाद मुझे आपसे फिर जुडने का मौका मिल रहा है । इसके लिये मैं आपसे हाथ जोडकर क्षमा माँगता हूँ कि मैं इतने दिनों तक आपसे दुर रहा । 
                खैर छोडिये ये सब बातें , अब मैं आपलोगों से नियमित रुप से जुड गया हूँ और हमेशा नियमित बने रहने का प्रयास करुँगा ।
                   इस पुरे एक साल में मेरे life  में बहुत सारे बदलाव आयें हैं और बहुत सारी घटनाएं भी घटित हुई हैं । ये पुरा एक साल मेरे पुरे life  का सबसे व्यस्ततम समय रहा है । और जब कोई ज्यादा व्यस्त होता है, तो उसे थकान भी होती है , चाहे वो शारीरिक हो या मानसिक । और मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है । मैं शारीरिक रुप से तो कम पर मानसिक रुप से कुछ ज्यादा ही थका हुआ महसुस कर रहा हूँ ।
                 इस पुरे एक साल में मैने बहुत कुछ पाया तो बहुत कुछ खोया भी हूँ । पाने को तो मैनें कुछ खाश नहीं पर कुछ प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफलताएं, कुछ खुशियाँ और थोडा गम भी पाया है ।
                          और खोने को तो मैने बहुत कुछ खोया हैं ,जैसे अपने कुछ खाश  friends , उनके साथ बिताये खुशनुमा पल , कुछ मुल्यवान समय , कुछ सुनहरे सपने और अपना आत्मविश्वास ।
                  ये सारी बाते तो life में होती रहती हैं  , पर बिते हुये हसीन पल फिर लौट कर नहीं आते हैं , और जिसका मलाल पुरे life  में रहता है ।


            आज कुछ समयाभाव के कारण कुछ ज्यादा नहीं लिख पा रहा हूँ , पर कल के लिये वादा करता हूँ कि कुछ ज्यादा और एक नये तथा मजेदार विषय पर जरुर लिखुँगा...तब तक के लिये  bye...bye..