Tuesday, July 17, 2012

बारिश....



बारिश में क्या है ऐसा कि आ रही है, तो गुदगुदाती रहती है । ना आए तो इंतज़ार और आ के हटी हो तो खुशबू ,यादें और किसी की याद
किसी और मौसम में ये बात कहाँ ?
बारिश होती है जहाँ , मैं खिलता हूँ वहाँ । बारिश होती है जहाँ, मैं मिलता हूँ वहाँ।
बारिश!!!
अच्छा नाम है ना?
यूनीक सा?



बारिश क्या होती है ? ये क्यों होती है ? क्या आपने कभी इसके बारे में सोचा है ? कभी सोचने का मौका मिला ? नहीं ना ?

तो चलिये आज मैं आपको एक ऐसी दुनिया में ले चलता हूँ जहाँ सब कुछ बारिश में भींगा हुआ है ।

बारिश ना हो तो शिकायत और हो तो शिकायत । क्यों? क्योंकि बारिश की ईच्छा सभी की होती है , सभी चाहते हैं कि बारिश हो। जब गर्मी के मौसम में लोगों क जीना मुहाल हो जाता है तथा गर्मी और उमस के कारण लोगों की जिन्दगी निरस और बोझील लगने लगती है , तब हर एक की दिल से एक ही आवाज निकलती है और वो है बारिश । और जब बारिश आती है तो लोगों की जान में जान आती है । सारी गर्मी छुमंतर हो जाती है । और बारिश की शितलता में लोगों की जिन्दगी फिर से जाग उठती है और तरो ताजा हो जाती है ।

ये बात सिर्फ मनुष्य पर ही नहीं , इस धरती के सारे प्राणियों के साथ होती है और यहाँ तक की पेड-पौधों के साथ भी । अगर वास्तव में देखा जाय तो बारिश की सबसे ज्यादा जरुरत पेड -पौधों को ही होती है और बारिश होने पर जितने ज्यादा खुश वो होते हैं शायद ही कोई होता हो ।

ये तो हुई बारिश के फायदे पर कभी कभी ये बारिश लोगों के लिये मुसिबत भी बन जाती है । जैसे बारिश का मौसम आते ही आप अपने फैशन को लेकर परेशान हो जाते हैं। आपको लगता है कि बारिश हुई नहीं कि आपका सारा फैशन खराब हो जाएगा। हालांकि बारिश में भीगने और मस्ती करने के अपने मज़े हैं फिर भी आप बारिश के दिनों में अपनी स्टाइल की कुछ ज्यादा ही फिक्र करने लगते हैं।

किसी का कोई जरुरी काम आ गया और तभी बारिश शुरु हो गई तो सोचिये क्या हाल होगा उनका ?

पर फिर भी ये इसके आन्नद के आगे कुछ भी नहीं । बारिश का इंतजार वैसे तो सबको होता है पर सबसे ज्यादा उसे होता है जिसे बारिश और बारिश का मौसम दोनों ही पसंद हो । मुझे भी बारिश बेहद पसंद है बारिश में भीगना फुहारों के साथ मस्ती करना उन फुहारों से खुद को भीगाना पानी में छप छप करना पानी में नाव तैराना । आज बारिश में भीगते हुए कहीं भी जाने में बड़ा मजा आता है बारिश में भुट्टा पकौड़े चने चपटे खाने का अलग ही मजा है । हर मौसम की बात अलग होती है पर बात जहाँ बात बारिश के मौसम की हो वहाँ तो मजा ही मजा है । बारिश में ही ना जाने कितने फूल पत्तियाँ फल कलियाँ उगती होगी वैसे एक बागवान या माली बागवानी के लिए बारिश उत्तम मौसम और कोई नहीं मानता होगा। खेत के किसान खेती के लिए इन्द्र देवता से कितनी प्राथनायें करते होगें हे भगवान बारिश कर दें । उनकी बारिश से ना जाने कितनी उम्मीदें आशाऐं जुड़ी हुई होगीं । वो कहतें है ना आशा से आकाश थमा है ।

बारिश के गानों का भी अलग ही मजा है उन गानों में ना जाने कितनी मधुरता होती है कि वे गाने बारिश में भीगने को मजबूर कर देते है । मुझे भी बारिश के गाने अच्छे लगते है । बारिश से जाने कितनी दुख औए सुख जुड़े होगें कितनो को बारिश पसंद होगी कितनो को नापसंद । कितने ही लोग घर के अंदर बैठकर पकौड़े खाते चाय की चुस्कियों और टीवी कोई मूवी देखते हुए बारिश का लुत्फ उठाते है और कितने बाहर बारिश में भीगतें हुए सैर करते हुए मस्ती करते हुए लुत्फ उठाते होगें । सबके बारिश के मजे अलग अलग है । इस बारिश के मौसम का लुत्फ उठाईयें मजें कीजिये खुद को इस फुहारों से भीगा दीजिये । ऐसे मौसम साल भर देखने को नही मिलते है । बारिश को बच्चा बड़े बुजुर्ग सभी पसंद करते है । बारिश का सबसे ज्यादा मजा तो स्कूल के बच्चों को आता होगा क्योंकि उनके स्कूल शुरु होने पर ही बारिश का मौसम आता है ।

मुझे इस विषय पर लिखते हुये एक कविता याद आई जो मैं यहाँ शेयर कर रहा हूँ जिसे कवि ने बहुत मधुरता और आन्नद के साथ लिखा है -

कैसे करूँ मैं स्वागत तेरा बता ओ बरखा रानी
घर की छत गलती है जब-जब बरसे पानी

बारिश में लगता है मौसम बड़ा सुहाना
बूँद-बूँद ताल बजाए पंछी गाएँ गाना
मैं सोचूँ, कैसे चूल्हे की आग जलानी

ठंडी-ठंडी बौछारें हैं पवन चले घनघोर
बादल गरजे उमड़-घुमड़ नाचे वन में मोर
मन मेरा सोचे, कैसे गिरती दीवार बचानी

इंद्रधनुष की छटा बिखेरी बरसा पानी जम के
पाँवों में नूपुरों को बाँधे बरखा नाची छम से
मैं खोजूँ वो सूखा कोना जहाँ खाट बिछानी

प्रकृति कर रही स्वागत तेरा कर अपना शृंगार
पपीहे ने किया अभिनंदन गा कर मेघ मल्हार
मैं भी करता स्वागत तेरा भर अँखियों में पानी
आ जा ओ बरखा रानी!
आ जा ओ बरखा रानी!

आज के लिये बस इतना ही .....खुशियों से भरा हो आपका बारिश का मौसम और बारिश के हर साथ अपने हर लम्हे को सजाइयें ।

Sunday, July 15, 2012

Modern Life



कुछ लोगों की ये आदत होती है कि वे अपने आपको दूसरे लोगों से अलग दिखायें या अपने आपको Modern दिखायें । और वे रोज नये नये स्टाईल और फैशन के कपडे पहनते हैं अलग स्टाईल के बाल- मूछे आदि रखते या कटवाते हैं और कभी कभी तो उनके बोलने ,चलने और बैठने का स्टाईल भी अलग होता है । पर क्या वे वास्तव में Modern हैं ? क्या सिर्फ Modern कपडे पहनने से लोग Modern हो जाते हैं ? इसका जवाब शायद आपको मेरा ये Blog post पढ़ के मिलेगा ।





मैं आपको अपने एक मित्र के बारे में बताता हूँ मैं उनका यहाँ नाम नहीं लूँगा क्योकि शायद ये Blog post वो भी पढ़े और शायद उन्हें अच्छा न लगे ।


मेरे मित्र में एक खाश बात ये है कि वो बहुत Modern हैं । और इतना Modern हैं कि पूछिए मत । चाहे कैसा भी फैशन हो वो अपनाने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं । पहले मैं आपको उनके बारे में कुछ बता दूँ । मेरे मित्र हमेशा जिन्स पहनते हैं और वो भी एकदम latest design की । साथ में टी -शर्ट या latest design की शर्ट पहनते हैं । हमेशा अच्छे और latest स्टाईल के बाल रखते हैं और उन्हें मुछ का कोई शौक नहीं है , वो हमेशा clean shave करना पसंद करते हैं । उन्हें लगता है कि मुछे रखने से व्यक्ति पुराना लगता है । वो हमेशा अच्छी और latest design की जूते या चप्पल पहनते हैं ।उनके बोलने और चलने - फिरने का स्टाईल भी Modern है । कुल मिला -जुला कर कहा जाये तो वो एकदम Modern हैं ।


पर मेरे हिसाब से ना तो वो Modern हैं और ना ही उनकी सोच Modern है । क्योंकि उनकी सोच पुरानी और दकियानूसी है । और वो नई तकनीको से बिलकुल अनभिज्ञ हैं । न तो उन्हें कंप्यूटर का ज्ञान है और न ही इन्टरनेट का ।फसबूक और ट्वीटर तो बहुत दूर की बात है ।


मोबाइल तो उनके पास है पर उसमे नई तकनीक नहीं है । वही पुरानी मोबाइल जिससे केवल बात किया जा सकता है ।


परन्तु आज की life इतनी fast है कि बिना इन तकनीको के एक पल भी नहीं रहा जा सकता । लोगो को एक दुसरे से जुड़े रहने के लिए इन सब चीजो की अति आवश्यकता है । फसबूक और ट्वीटर पर अपनी दिनचर्या को शेयर करना लोगो की आदत में शुमार है । लोगो को एक दुसरे से chat करना , मोबाइल पर SMS करना आदि उनके उनके जीवन का महत्वपूर्ण भाग है ।


जो व्यक्ति इन सबसे अनजान है उसे कैसे Modern कहा जा सकता है ।


क्या Modern कपडे पहनने मात्र से कोई Modern सकता है ?






आपके जवाब के इन्तेजार में ............



Thursday, July 5, 2012

उम्मीद का दीपक

आज ना जाने क्यों  मुझे ऐसा लगा कि मै अपने सपनो की दुनिया से बहुत दूर चला आया हूँ । न जाने मुझे ऐसा क्यों लगा कि मैं जो चाहता था,  जो सोचता था वो बिलकुल भी नहीं हो रहा है । क्योंकि मेरे ख्वाबो की दुनिया इस दुनिया से बिलकुल अलग है ।
                                         मुझे इस बात का अहसास आज शाम को उस वक्त हुआ जब मेरे मित्र ने मुझसे कहा कि ,"तुम भी क्या क्या सोचे थे  और क्या हो रहा है ?" मुझे  उसके सारे  शब्द तो याद नहीं पर उसके कहने का मतलब यही था । उस वक्त मुझे कुछ ना सुझा और कुछ देर सोचने के बाद मैंने जवाब दिया ,"  आत्मविश्वास की कमी , मुझमे आत्मविश्वास की कमी हो गयी है और  शायद ये सब उसी के कारण हो रहा है ।" और मै खामोश हो गया ।
                                                 और ये बात सही भी है कि आत्मविश्वास  आदमी के पास एक ऐसा अस्त्र है जिससे वो जो चाहे वो कर सकता है । और उस अस्त्र की मुझे बहुत कमी महसूस हो रही है । इसके बिना मैं अपने आप को बहुत असहाय महसूस कर रहा हूँ ।अपने आप को एक अपाहिज की भांति समझ रहा हूँ जो सब कुछ चाहते हुए भी कुछ नही कर  सकता ।
                                                समय के साथ लोगों के पसंद भी बदल है , उनके जीने का सलीका बदल जाता है । मेरे साथ कुछ ऐसा  ही हो रहा है । पर इसमे  कुछ ही, क्योंकि मेरे पसंदों की संख्या कम हो रही है और नापसंदो की बढ़ रही है ।
                                                  मुझे याद  है कि कुछ समय पहले मेरे पास मुझे क्या क्या अच्छा लगता है क्या नहीं , इसकी एक पूरी लिस्ट थी पर आज नहीं ।पता नहीं क्यों दिल में न जाने कैसी बेचैनी सी है ? कुछ भी अच्छा नहीं लगता है । मुझे संगीत ,फिल्मे , किताबे और पेंटिंग्स का बहुत शौक था । पेंटिंग्स तो बहुत पीछे छुट गया पर आज भी मेरे दिल के पास फिल्मे और संगीत हैं । किताबों के लिए तो समय ही नहीं बचता । जब भी मैं कुछ पढने चलता हूँ , न जाने क्यों कुछ पढ़ ही नहीं पाता हूँ । और फिल्मो के लिए तो घर  पर समय ही नहीं है और कभी थोडा समय निकाल पाता हूँ तो वो  तब  जब मैं बनारस जाता हूँ वो भी कभी कभी । पर वहां भी मेरा मन नहीं लगता । सब मिला जुला कर संगीत से अच्छा साथी मेरा कोई नहीं है ।संगीत के लिए मेरे पास मेरा लैपटॉप है और मेरा मोबाईल है । सच कहा जाय  तो मोबाईल मेरे साथ हमेशा रहता है नोकिया आशा 200 ,जिसमे इन्टरनेट से गाना डाउनलोड करना और सुनना अच्छा लगता है ।

          खैर जो भी हो हालत से लड़ना और जितना ही जिंदगी का दूसरा नाम है और मैं भी वही करने का प्रयास कर रहा हूँ ।म्यूजिक और इन्टरनेट को साथी बनाकर जिंदगी के कडवे और नीरस पल को काटने की कोशिश कर रहा हूँ ।और अपने दिल के  किसी कोने में आशा के दीये में उम्मीद   का दीपक जलाये हुए हूँ ताकि  ये नीरस पल रूपी अँधेरा जल्द से जल्द समाप्त हो । और एक नए आशा की  किरण जगमगाए ।और एक सुन्दर और शांत तथा आनन्दमय जीवन की शुरूआत हो सके ।
     धन्यवाद ।
      
                                                      

Tuesday, July 3, 2012

Hi friends.....

Hi friends.....
how are you?
             आज बहुत दिनों के बाद,  i think लगभग 1 साल के बाद मुझे आपसे फिर जुडने का मौका मिल रहा है । इसके लिये मैं आपसे हाथ जोडकर क्षमा माँगता हूँ कि मैं इतने दिनों तक आपसे दुर रहा । 
                खैर छोडिये ये सब बातें , अब मैं आपलोगों से नियमित रुप से जुड गया हूँ और हमेशा नियमित बने रहने का प्रयास करुँगा ।
                   इस पुरे एक साल में मेरे life  में बहुत सारे बदलाव आयें हैं और बहुत सारी घटनाएं भी घटित हुई हैं । ये पुरा एक साल मेरे पुरे life  का सबसे व्यस्ततम समय रहा है । और जब कोई ज्यादा व्यस्त होता है, तो उसे थकान भी होती है , चाहे वो शारीरिक हो या मानसिक । और मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है । मैं शारीरिक रुप से तो कम पर मानसिक रुप से कुछ ज्यादा ही थका हुआ महसुस कर रहा हूँ ।
                 इस पुरे एक साल में मैने बहुत कुछ पाया तो बहुत कुछ खोया भी हूँ । पाने को तो मैनें कुछ खाश नहीं पर कुछ प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफलताएं, कुछ खुशियाँ और थोडा गम भी पाया है ।
                          और खोने को तो मैने बहुत कुछ खोया हैं ,जैसे अपने कुछ खाश  friends , उनके साथ बिताये खुशनुमा पल , कुछ मुल्यवान समय , कुछ सुनहरे सपने और अपना आत्मविश्वास ।
                  ये सारी बाते तो life में होती रहती हैं  , पर बिते हुये हसीन पल फिर लौट कर नहीं आते हैं , और जिसका मलाल पुरे life  में रहता है ।


            आज कुछ समयाभाव के कारण कुछ ज्यादा नहीं लिख पा रहा हूँ , पर कल के लिये वादा करता हूँ कि कुछ ज्यादा और एक नये तथा मजेदार विषय पर जरुर लिखुँगा...तब तक के लिये  bye...bye..