Wednesday, September 19, 2012

Songs ....मेरे दिल के करीब..

संगीत कुछ लोगों के जीवन का अभिन्न अंग होता है, और उन लोगों में मैं भी हूँ । मुझे संगीत से इतना लगाव है कि मैं ये आप लोगों को बता भी नहीं सकता । या यूँ कहिये कि इतना ज्यादा लगाव है कि मैं शब्दों में उसको बयाँ नहीं कर सकता क्योंकि संगीत तो महसुस करने की चीज है , इसमें डुब जाने की चीज है , इसमें खो जाने की चीज है।और इतना खो जाने के कि और कुछ भी याद ना रहे । पर उसके लिये संगीत का मधुर और दिल को छु लेने वाला भी होना चाहिये ।                                             
  मैं अपने इस ब्लॉग पोस्ट में अपने कुछ पसंद के songs  आपके लिये लाया हूँ और आशा करता हूँ कि ये आपको भी पसंद आयेंगें ।
  • जादु है नशा है, मदहोशियाँ ....तुमको भुला के अब जाऊँ कहाँ.....(जिस्म)
  • हम दिल दे चुके सनम , तेरे हो गयें हैं हम......तेरी कसम...तेरी कसम ( हम दिल दे चुके सनम)
  • दिल है कि मानता नहीं ..ये बेकरारी क्यूँ हो रही है, ये जानता ही नहीं ....( दिल है कि मानता नहीं)
  • सच कह रहा है दिवाना, दिल..दिल ना किसी से लगाना ...( रहना है तेरे दिल में )
  • हमें जब से मुहब्बत हो गयी है...ये दुनिया खुबसुरत हो गयी हैं....( बार्डर )
  • पहला नशा ...पहला खुमार...( जो जीता वही सिकन्दर )
  • जादू है तेरा ही जादू...जो मेरे दिल पे छाने लगा...(गुलाम)
  • घर से निकलते ही...कुछ दुर चलते ही...( पापा कहते हैं)
  • सुरज हुआ मद्दम...चाँद जलने लगा...(कभी खुशी कभी गम)
  • वादा रहा सनम...होंगें जुदा ना हम ..( खिलाडी)
  • मुझे हक है....( विवाह)
  • सीमायें बुलाये तुम्हे चलना ही...(  L.O.C. )
  • मैं कहीं भी रहूँ...( L.O.C.)
  • एक साथी और भी था ...(L.O.C.)
  • प्यार भरे गीत....(L.O.C.)
  • और आहिस्ता किजिये बातें ( पंकज उधास )
  • ऐसा जख्म दिया है ...(अकेले हम अकेले तुम)
  • दिल क्यूँ ये मेरा शोर करें....(काईट्स)
  • तन्हाई....तन्हाई...(दिल चहता है)
  • तुम चैन हो ..करार हो....( मिलेंगें मिलेंगें)
  • ओ रे पिया....( आजा नचले)
  • आओगे जब तुम ओ साजना....(जब वी मेट)
  • सईयाँ .....सईयाँ....तु जो छु ले प्यार से ...( कैलाश खेर)
  • तुझे याद ना मेरी आये....( कुछ कुछ होता है )
  • निंद में है.....(एक विवाह ऐसा भी )
  • पहली- पहली बार बलिये....(संघर्ष )
  • ये दिल तुम बिन कहीं लगता नहीं ...(इज्जत)
  • मुझे तेरी मुहब्बत का,सहारा मिल गया होता..(आप आये बहार आयी)
  • तुझ संग प्रित लगाई...(कामचोर)
  • तेरी दुनिया से होके मजबुर चला...(पवित्र पापी)
  • तेरे मेरे बीच में कैसा है ये बन्धन अनजाना...(एक दुजे के लिये)
  • सोलह बरस की बाली उमर को सलाम .. (एक दुजे के लिये)
  • प्यार हमारा अमर रहेगा...(मुद्दत)
  • जनम जनम का साथ है तुम्हारा-हमारा ...( भीगी पलकें ) 
  • वादा करले साजना...तेरे बिन मै ना रहूँ...(हाथ की सफाई)
  • दुश्मन ना करे...दोस्त ने वो काम किया है...( आखिर क्यों ) 
  • जिन्दगी की ना टुटे लडी....प्यार कर ले...(क्रांति)
                                    और भी बहूत से ऐसे गीत हैं जो मेरे दिल के बहुत करीब हैं, जो खाली समय मे मेरे सबसे अच्छे साथी हैं । मेरे संगीत के इस सफर को सुहाना बनाने में मेरा सेलफोन और लैपटॉप बहुत साथ देते हैं ।
                         आशा करता हूँ कि आज का संगीतमय सफर आपको बहुत प्यारा लगा होगा ...और ऐसे ना जाने कितने ही सफरों पर आपको मेरा साथ निभाना है । निभायेंगें ना.......?
इसी वादे के साथ....शुभ रात्रि...संगीतमय रात्रि...।

Saturday, September 15, 2012

जिन्दगी......


"कभी कभी हम अपनी जिन्दगी से ऊब जाते हैं और जिन्दगी जिना एक मुश्किल भरा काम लगने लगता है, एक अनचाहा बोझ जो हम अपने सिर पर बिना किसी वजह के एक जगह से दुसरे जगह ढोते रहते हैं, और कभी कभी तो हम इस बोझ को ढोते ढोते इतने थक जाते हैं कि लगता है कि इस मायुसी भरी जिन्दगी में अब कुछ ना रहा, अब इसे खत्म कर देने में ही भलाई है।"

                                                      ऊपर की ये पंक्तियाँ पढ रहे कुछ लोगो को तो बहुत अच्छा लग रहा होगा और कुछ लोगों को ये कोरी बकवास लग रही होगी ।आप अपने आप को किस प्रकार के लोगों में रखते हैं , पहले वाले या दुसरे वाले ? खैर मैं आप लोगों के बारे में तो कुछ नहीं कह सकता पर मैं अपने बारे में तो कह ही सकता हूँ ।
                                                              मुझे ऊपर की ये पंक्तियाँ बहुत अच्छी लगी और मैं अपने आपको पहले वाले लोगों की श्रेणी में रखता हूँ । अब आपको मेरे ऊपर गुस्सा आ रहा होगा ...पर इसमे गुस्सा होने वाली कोई बात नहीं । सभी लोगों को अपनी पसंद-नापसंद करने की पुरी आजादी है , आखिर हम आजाद भारत के वासी हैं ।
                                                           अब मैं आपको बता दूँ कि मुझे ऐसा क्यों लगा तो बात ये है कि कभी- कभी हम अपने आपको लोगों की खुशियों के लिये पुरी तरह अर्पण कर देते हैं और अपने बारे में कुछ ना सोचते । चाहे उन लोगों में हमारा परिवार हो या हमारे friends । मुझे भी कभी- कभी ऐसा लगता है कि मैं भी almost ऐसा ही हूँ । पर लोगों के बारे में सोचते सोचते हम इतने थक जाते हैं कि अपने बारे में सोच ही नहीं सकते । और दुख तो तब होता है जब वही लोग हमारे बारे में , जो उनके लिये इतना कुछ करते रहते हैं, कुछ नहीं सोचते ।
                                                     लोगों का ऐसा स्वार्थ देख कर इस दिल को बहुत ठेस लगती है और जिन्दगी भर दिल में एक टिस सी रह जाती हैं और दर्द को छुपाये छुपाये जब दिल भर आता है तो फिर वही ऊपर वाली पंक्तियाँ याद आती है ।
                                                                      पर फिर कुछ सोचकर ये दिल रुक जाता है कि ये हम क्या सोच रहें है ? क्या जिन्दगी यही है ? नहीं ये जिन्दगी नहीं है, जिन्दगी जिने का नाम है और इसी ख्याल से हम जिये जा रहे हैं ।

पर मन में एक विश्वास है कि मेरे साथ भी कभी कुछ अच्छा होगा ।
" क्यों कि जिन्दगी ना मिलेगी दोबारा"


जला जला कर खुद को,खाक करते हो क्यूं।
ज़िन्दगी अनमोल खजाना,जीना तो सीख लो।

देख कर औरों की खुशियां कुढ़ते हो क्यूं
गैरों की खुशी में भी,हंसना तो सीख लो।

रास्ते मंजिलों के,आसान ढूंढ़ते हो क्यूं
मुश्किलों का सामना,करना तो सीख लो।

छूने को आसमान की हद,कोशिश करो जरूर
पहले पांव को जमीं पर,जमाना तो सीख लो।

अपने को गैरों से,ऊंचा समझते हो क्यूं
एक बार खुद को भी कभी,आंकना तो सीख लो।

तक़दीर को ही हर कदम पर,कोसते हो क्यूं
रह गई कमी कहां पे है,जानना तो सीख लो।

कर के भरोसा दूसरों पे,पछताते हो क्यूं
बस हौसला बुलंद करना,खुद का तो सीख लो।

बात सिर्फ़ इतनी सी है,जीवन फ़कत पाना ही क्यूं,
खोना भी पड़ता है बहुत,सब्र करना तो सीख लो।