Sunday, October 31, 2010

I like Shreya Ghoshal's voice........


Do u know i like shreya Ghoshal and her songs.....
here i am telling something about her beautiful songs....

Shreya Ghoshal was born in a Bengali Family in Durgapur, West Bengal. She is a Indian classical singer. She shot to fame when she won the Sa Re Ga Ma Pa contest on Zee TV. Besides Hindi, she also sings in Bengali, Assamese, Telugu, Kannada, Malayalam, Marathi, Punjabi and Tamil.
She has 4 National Film Awards, 5 Filmfares and 4 IIFA Awards to her credit. In a very short period, she has emerged as the leading female playback singer in the Hindi Film Industry.Hope you all have a nice time listening to these beautiful tracks...

*Jadoo Hai Nasha Hai - Jism
*Teri Ore - Singh Is Kinng
*Barso Re - Guru
*Yeh Ishq Hai - Jab We Met
*Agar Tum Mil Jao - Zeher
*Beri Piya - Devdas
*Silsila Ye Chaahat Ka - Devdas
*Cheeni Kum - Cheeni Kum
*Dola Re Dola - Devdas
*Piyu Bole - Parineeta
*Thirak Thirak - Khoya Khoya Chand
*Zoobi Doobi - 3 Idiots
*U Me Aur Hum - U Me Aur Hum
*Jaane Do Na - Cheeni Kum
*Aahista Aahista - Bachna Ae Haseeno
*O Saathi Re - Omkara
*Tujh Mein Rab Dikhta Hai - Rab Ne Bana Di Jodi
*Pal Pal Har Pal - Lage Raho Munna Bhai
*Kahin Na Laage - Kismat Konnection
*Kyun - Kambakkht Ishq
*Noor E Khuda - My Name Is Khan
*Har Taraf - Saaya
*Chann Chann - Munna Bhai M.B.B.S.
*Mere Dholna - Bhool Bhulaiyaa
*Tu Meri Dost Hai - Yuvvraaj
*Leja Leja Re - Ustad and The Divas
*Bepanah Pyaar Hai - Krishna Cottage
*Thode Badmash - Saawariya
*Salaam-e-Ishq - Salaam-e-Ishq
*Main Hoon Na - Main Hoon Na
*Ta Ra Rum Pum - Ta Ra Rum Pum
*Wada Raha Pyar Se - Khakee
*Chalo Tumko Lekar - Jism
*Chori Chori Chupke Chupke - Krrish
*Dholna - Heyy Babyy


here you can download songs.

Sunday, October 24, 2010

बच्चों के साथ सुकून



मुझे ये आपलोगों को बताते हुए बहुत ही हर्ष हो रहा है कि मैंने और मेरे दोस्त राजू ने मिलकर एक योजना बनाई। वैसे तो मैंने और राजू ने कई योजनाएँ बार-बार बनाई हैं और मैंने उसमें पूर्ण रूप से सहभागिता निभाने की पूर्ण कोशिश की है, और सफल भी हुआ हूँ ।लेकिन मेरे दोस्त में ना जाने ये एक कमी है या अच्छाई है कि वह हर काम को कुछ दिन करने के बाद शायद उससे बोर होकर उसे छोड देता है या कुछ और बात से .....। कमी इसलिए कि उसमें एकाग्रता एवं स्थिरता की कमी है और अच्छाई इसलिये कि युवाओं को हर काम को करने का अवसर मिलना चाहिए और उनमें विविधता होनी चाहिए । जो भी हो मेरे दोस्त में एक बात तो है कि नए- नए विचारों को वह जन्म देता है और उसे पुरा करने की कोशिश भी करता है भले ही वह पुरा हो या न हो ।मैं अपने दोस्त का शिकायत या प्रशंसा नहीं कर रहा हूँ ये मेरे दिल की बात थी जो मैने आप लोगो से शेयर की । Anyway हम अपने मुल विषय पर आते हैं और आज का मुल विषय हमारे नए योजना के बारे में है ।
आपलोगों को मालूम कि मै और मेरे दोस्त ने मिलकर लगभग 4 माह पूर्व एक योजना बनाई group study का (इस योजना के विषय में फिर कभी ) और इसी दौरान हमने अभी कुछ ही दिन पूर्व एक योजना बनाई कि क्यों ना हम लोग कुछ बच्चों को,जो पढाई में कमजोर हैं, मुफ्त शिक्षा दें और उनका आधार मजबुत करें । और इस योजना के तहत मैंने अभी तक सिर्फ एक दिन का क्लास लिया और मैं आपको क्या बताऊँ कि मुझे कितनी खुशी मिली और ये खुशी और दुगुनी हो गई जब मैंने बच्चों का उत्साह देखा और खाश कर लडकियों का उत्साह देखते बना । हमने ये आशा नहीं की थी कि इतनी ज्यादा संख्या में बच्चियाँ पढने का उत्साह दिखायेंगी । लेकिन देखकर बहुत ही अच्छा लगा ।
उत्साह बढाने का काम तो बच्चों का बीच-बीच में जोर-जोर से बोलना कर रहा था अर्थात यदि मैने पुछा कि कौन-कौन गिनती पुरा जानता है तो बच्चों ने पुरे उत्साह के साथ जोर से हम बोलने के साथ अपने अपने हाथ ऊपर कर लिये। सच कहा जाए तो बच्चों के साथ समय बिताने में जो सुकून मिलता है वो कहीं और नहीं मिलता । आप लाख दुख -चिन्ताओं से घिरे हों पर बच्चों के सामने जाने पर सारे छु-मन्तर हो जाते हैं। मैने अपने पिछले ब्लॉग "ये चेहरा किसका चेहरा है?" में बच्चों के बारे ज्यादा बातें की है।

क्या आपलोगों ने कभी ऐसा अनुभव किया है ? यदि किया है तो कृपया अपना अनुभव comments के माध्यम से जरूर बताएँ । यदि नहीं किया है तो एक बार जरूर करें ।

अभी कुछ महिने पहले आमिर खान की एक फिल्म आई थी "तारे जमीं पर" । जो मुझे अन्दर तक झकझोर कर रख दी थी । इस फिल्म में बच्चों की मनोभावना को समझने हेतू एक सीख दी गई है । यदि आपलोगों ने फिल्म देखी है तो आप मेरी भावनाओं को कुछ ज्यादा अच्छें तरीके से समझ सकते हैं ।

कल सोमवार हैं और मुझे फिर से उन प्यारे बच्चों के बीच जाने का अवसर मिलेगा जो मेरे लिए कितना महत्वपूर्ण है और कितना सुकून देने वाला है जिसे मैं आपलोगों के सामने शब्दों में बयाँ नहीं कर सकता ।
आज के लिये बस इतना ही फिर मिलेंगें कल........
तब तक के लिये नमस्कार..........!!

Saturday, October 23, 2010

संगीत.....कैसे-कैसे....


आप लोगों को मेरा नमस्कार.....
कुछ दिन पहले मैने आपलोगों को बताया था कि मुझे संगीत से बहुत प्रेम है । और उसी कडी में मैं आज आप लोगों को अपने जीवन में आए या सुने कुछ उन संगीत या गानों के विषय में बात करूँगा जिन्होने मेरे दिलों-दिमाग को बहुत सुकुन एवं शान्ति दिए।

सबसे पहले बात करते हैं कुछ पुराने गीतों की.....
मुझे पुराने गीतों में निम्न गीत बहुत पसन्द हैं :-
  • हम भुल गए रे हर बात मगर तेरा प्यार नहीं भुलें......
  • मुझे तेरी मुहब्बत का सहारा मिल गया होता..........
  • आपकी नजरों ने समझा प्यार के काबिल मुझे..........
  • कोई पत्थर से ना मारे मेरे दिवाने को..............
  • जाने क्यों लोग मुहब्बत किया करते हैं...............
  • अखियों के झरोखे से,तुने देखा जो सावंरे..........
  • पत्थर के सनम..........

आप सभी लोगों से क्षमा चाहता हूँ कि मेरे इंटरनेट सर्वर में कुछ समस्या के कारण मैं और ज्यादा नहीं लिख पा रहा हूँ, लेकिन वादा करता हूँ कि अगले पोस्ट में आपको कुछ ज्यादा ही गीतों के बारे में बताने का प्रयास करूँगा ।
वैसे उपर्युक्त सभी गानों को आप http://www.songs.pk/ पर डाउनलोड करके सुन सकते हैं ।
तब तक के लिये नमस्कार............

Friday, October 22, 2010

प्यार या दोस्ती....?


आज मैं आपको कुछ अलग और अजीब दुनिया में ले चलता हूँ जहाँ आपको कुछ अपने विचारों से भी अवगत कराना पड सकता है या यूँ कहे कि कराना ही है। चलिये ज्यादा बात न करते हुए मूल बात पर आते हैं ।
और आज का विषय है प्यार या दोस्ती...?
प्यार और दोस्ती दो ऐसे शब्द हैं जो व्यक्ति के जीवन में हर्षोल्लास भर देते हैं. प्यार और दोस्ती का अर्थ ही शायद नज़दीकियों से शुरू होता है. दोनों दशा में आपका अपने साथी के साथ घनिष्ठ रिश्ता बन जाता है. दूरियां नजदीकियां बन जाती हैं और फासले कम होने लगते हैं.।

सबसे पहले हम दोस्ती के बारे में चर्चा करते हैं । दोस्ती वो शब्द जो सिर्फ और सिर्फ चेहरे पर मुस्कान लाती है, दोस्ती वो है जो हर रिश्ते से बड़ी होती है, क्यों सही कहा ना.... दोस्तो, 1अगस्त यानी 'फ्रेंडशिप डे' आ गया है । वैसे तो दोस्ती का कोई दिन नहीं होता क्योंकि ये तो ऐसी खुशी है जो हर दिन हर पल सेलिब्रेट होती है। लेकिन दुनिया है न ..हर दिन को किसी रन किसी रूप में रिश्तों से जोड़ देती है इसलिए उसने 'फ्रेंडशिप डे' को भी बना दिया। दोस्ती में बिना शब्दों के अभिव्यक्तियों से ही बहुत कुछ कहा जाता हैं।

दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है जो मामूली घटनाओं और यादों को भी खास बना देता है। हमारे जेहन में ऐसे बहुत से पलों को ताउम्र के लिए कैद कर देता है। जो वापिस तो कभी नहीं आते पर हाँ जब भी आप अपने पुराने दोस्तों से मिलते हैं तो अब उन बातों को याद कर जरूर हँसते होंगे। बेशक आज की 'बिजी लाइफ' के चलते दोस्त रोज मिल नहीं पाते लेकिन दिल से दूर नहीं होते हैं, उनकी रूह, उनकी सांसो में दोस्ती हमेशा साथ होती है।

दोस्ती के लिए कोई दिन तय कर उसे फ्रेंडशिप डे का नाम दे देना कितना सही है यह कहना थोड़ा मुश्किल है। पर इतना जरूर है कि जिस दिन पुराने यार सब मिल बैठ जाएँ उनके लिए वही फ्रेंडशिप डे हो जाता है। दोस्ती को सीमाओं में बांधना बेवहकूफी होती है। किसी जवां लड़के या यंग लड़की के दोस्त साठ साल के बूढ़े भी हो सकते हैं।

एक मां भी अपने बेटे की और एक पिता भी अपनी बेटी के अच्छे दोस्त हो सकते हैं। क्योंकि दोस्त वो बातें बताता है जो किसी क्लास या कोर्स में नहीं पढ़ाई जाती हैं। एक लड़का और एक लड़की जो अपने जीवन के भावी सपनों में खोए होते हैं वो भी अपने हर रिश्ते में पहले एक दोस्त खोजते हैं जानते हैं क्यों? क्योंकि यही वो आईना है जो सच और झूठ का अंतर बताता है।

लेकिन अफसोस इस खूबसूरत रिश्ते और खूबसूरत दिन को देश के कुछ ऐसे
लोग जो अपने आप को बेहद ही समझदार समझते हैं, अपने आप को समाज का ठेकेदार कहते हैं,को ये दिन पाश्चात्य सभ्यता का दुष्प्रभाव लगता है। उनका मानना है इससे हमारे युवा भटक रहे हैं, अब ये उन्हें कौन बताये कि भले ही फ्रेंडशिप डे पाश्चात्य सभ्यता की देन है, लेकिन फ्रेंडशिप तो हमारे देश की मिट्टी में हैं। भगवान श्रीकृष्ण-सुदामा की दोस्ती के आगे क्या कोई और मिसाल है, नहीं ना..तो फिऱ इस दिन के लिए हाय तौबा क्यों?.....

परन्तु प्यार और दोस्ती में सबसे बड़ा फ़र्क विश्वास का है. हालांकि प्यार और दोस्ती की बुनियाद ही विश्वास से शुरू होती है लेकिन प्यार में यही विश्वास डगमगाने लगता है. अमूमन एक प्रकार का डर या भय तारी हो जाता है कि कहीं सच कहने से प्यार में फ़र्क ना आ जाए और यही भय अविश्वास का कारण बनने लगता है. जबकि दोस्ती में विश्वास का कोई तुल्य नहीं होता. दोस्ती में विश्वास इतना गहरा होता है कि दोस्त हमारी सभी घटनाओं का सहभागी बन जाता है. और यही विश्वास की राह आगे चलकर आपके जीवन डगर में बदलाव लाती है.

लेकिन अमूमन यह देखा गया है कि भले ही दोस्ती में विश्वास अधिक होता है लेकिन इसके बावज़ूद जब बात प्यार और दोस्ती में किसी एक को चुनने की हो तो प्यार दोस्ती पर हावी हो जाता है.। हम शायद अपने विषय से भटक रहे हैं, इसलिये मूल बात पर आते हैं ।

दोस्ती के बाद हम प्यार की चर्चा करते हैं ।खुदा का बनाया हुआ सबसे खूबसूरत जज़्बा। दो दिलों के बीच सबसे मजबूत बंधन का नाम है प्यार। बिना प्यार के जिंदगी कोई मायने नहीं रखती। चाहे वो माँ-बेटे का प्यार हो, भाई-बहन का, दोस्तों का, पति-पत्नी का या प्रेमी-प्रेमिका का। बिना प्यार के दुनिया की कल्पना करना भी मुश्किल लगता है। शायद इसीलिये हमारे धर्मग्रंथों में भी प्यार की ही महिमा है और भगवान ने भी अवतार लेकर प्यार के आदर्श प्रस्तुत किये हैं। किसी ने कहा भी है-

चाहे गीता बांचिये या पढ़िये कुरआन मेरा तेरा प्यार ही हर पुस्तक का ज्ञान

प्यार एक ऎसा अहसास है जिस पर या तो बहुत कुछ लिखा जा सकता है या शायद कुछ भी नहीं। इसमें आप जितना गहरे उतरते हैं उतना ही इसको समझने लगते हैं। यही एक ऎसा अहसास है जिसे हर कोई समझ लेता है, चाहे वह इंसान हो या जानवर। प्यार को व्यक्त करने के लिये आपको किसी भाषा की जरूरत नहीं होती, ये तो आपकी निगाहें ही बयां कर देती है।

प्यार उन्मुक्त होता है, ये किसी बंधन या शर्त को स्वीकार नहीं करता। प्यार में बंधन की कोई जगह नहीं होती। यदि आप किसी से प्यार करते हैं तो वो जो है, जैसा है उससे प्यार करते हैं। अगर आप उसे बदल कर प्यार करना चाहते हैं तो फिर ये प्यार हो ही नहीं सकता। प्यार यह नहीं है कि आप चाहतें हैं वो हमेशा आपके साथ रहे, प्यार तो यह है कि वो जहां भी रहे खुश रहे। क्योंकि प्यार सिर्फ देना जानता है, लेना नहीं।

सबसे ज्यादा जिस प्यार की चर्चा होती है वह है, प्रेमी-प्रेमिका का प्यार। और हो भी क्यों ना इतना खूबसूरत अहसास और कहां मिलेगा। एक-दूसरे को देखकर चेहरे पर रौनक आ जाना, दिल की धड़कन बढ़ जाना, मिलने के लिए तड़पना, रुठना-मनाना।

नज़र मुझसे मिलाती हो तो तुम शरमा सी जाती हो इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।

कहतें हैं कोई सब कुछ भूल सकता है पर अपना पहला प्यार नहीं भुला सकता।

भूले से भी नहीं भुलेंगें वो बीते ज़माने वो रेशमी लम्हें वो मोहब्बत के फसानें

प्यार में ही इतनी ताकत है कि वो शैतान को भी इंसान बना सकता है। अगर दिलों में प्यार कायम हो जाये तो नफ़रत के लिये कहीं कोई जगह ही नहीं बचेगी। और दुनिया में जितनी समस्यायें हैं सब खत्म हो जायेगी। पता नहीं क्यों लोग आपस में प्यार से क्यों नहीं रह सकते। लड़ते-झगड़्ते क्यों रहतें हैं? आप प्यार किसी एक से करतें हैं और आपको सारी दुनिया प्यारी लगने लग जाती हैं। दुनिया में ऎसी कोई समस्या नहीं है जिसका हल प्यार से नहीं हो सकता हो। प्यार सच्चा या झूठा नहीं होता, प्यार थोड़ा या ज्यादा नहीं होता। प्यार सिर्फ़ प्यार होता है और कुछ नहीं। और इससे पवित्र अहसास दूसरा नहीं हो सकता। इसीलिये तो भगवान भी सिर्फ़ प्यार के ही भूखे होते हैं।

हमनें देखी हैं उन आँखों की महकती खूशबू हाथ से छूकर इसे रिश्तों का इल्जाम न दो एक अहसास है ये रूह से महसूस करो प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम न दो

अगर आप किसी से प्यार करते हैं तो हिचकिये मत। अपने प्यार को उस पर जाहिर कीजिये। याद रखिये आप कोई गुनाह नहीं कर रहें हैं, जो सबसे छुपाये। बस एक गुज़ारिश है, प्यार करें खिलवाड़ नहीं। प्यार को बदनाम करने वाले भी बहुत से लोग है दुनिया में। लेकिन प्यार वो शमा है तो हमेशा से जलती रही है। ये ना कभी बुझी है और ना कभी बुझेगी।

"जब आँचल रात का लहराये और सारा आलम सो जाये तुम मुझसे मिलने शमा जलाकर

ताज़महल में आ जाना।"


विद्वानों का कहना है कि “जब आपका किसी के साथ रोमांटिक रिश्ता बनता है तो उस दशा में यह देखा गया है कि आपका अपने कुछ दोस्तों से नाता खत्म हो जाता है.

विद्वानों के अनुसार “अमूमन एक लड़के के जीवन में चार से पांच बहुत नज़दीकी दोस्त होते हैं और एक लड़की के छः से सात. यह वह दोस्त होते हैं जिनके साथ आप अपना सब कुछ बांटते हैं. परन्तु जब आपकी जिंदगी में प्यार आता है तो आपकी अपने प्यार से नजदीकियां बढ़ने लगती हैं और आप ऐसी स्थिति में अपने साथी को छोड़ना नहीं चाहते. परन्तु अगर आप उस समय भी अपने दोस्तों से बहुत नज़दीक होते हैं तो आपके प्रिय या प्रियसी को उस समय यह डर लगने लगता है कि कहीं प्यार की राह में दोस्ती अड़ंगा ना पैदा कर दे. और ऐसी स्थिति में वही प्यार आपसे दोस्त और प्यार में से किसी एक को चुनने को कहता है. और तब बावरा मन ह्रदय की सुनकर प्यार को चुनता है।
चलिये दोस्ती और प्यार की बातें कभी खत्म नहीं हो सकती है, ये विषय इतना बडा है कि इस पर चर्चा करते- करते शायद हमारी पूरी उम्र बित जाए पर बात खत्म न हों।मेरी ऊँगुलियाँ तो अब थक गई हैं टाईप करते- करते ,अब मैं इसे थोडा विश्राम देना चाहता हूँ पर आप लोगों को आराम करने की कोई आवश्यकता नहीं है पहले आपलोग मेरे ब्लॉग पर अपने प्यारे comments जरूर दीजिये । तब तक नमस्कार........!!
friendship

Wednesday, October 20, 2010

क्या प्यार यही है?


जिंदगी में इंसान को कई बार प्यार हो सकता है। यह बात दूसरी है कि पहला प्यार कोई भुला नहीं पाता। लेकिन सच्चा प्यार बड़ी ही मुश्किल से किसी को नसीब होता है...आज की हाईटेक लाइफस्टाइल में प्यार की परिभाषा बदल गई है...प्यार भी हाईटेक हो गया है...लोग प्यार कई चीजें देखकर करने लगे हैं...मसलन जेब...सैलरी...लाइफस्टाइल...और इन सबसे बढ़कर ये मायने रखता है कि आप सामनेवाले से ज्यादा हाईप्रोफाइल हैं या नहीं...साथ ही उनके जैसी समतुल्यता रखते हैं या नहीं...आज प्यार ने अपनी परिपक्वता को हासिल कर लिया है...
आज तक किसी ने प्यार की सटीक परिभाषा नहीं दी है...प्यार को किसी एक परिभाषा में बांध कर भी नहीं रखा जा सकता...प्यार की परिभाषा में समय-समय पर बदलाव आते रहे हैं...प्यार में कभी राधा कृष्ण का उदाहरण दिया जाता है...कभी हीर रांझे का...तो कभी लैला मजनू का...लेकिन आज के ज़माने में कहां हीर रांझे का प्यार...कहां जीने मरने की कसमें खानेवाले...प्यार में काभी बदलाव आ गया है...प्यार करने के तरीके में बदलाव आ गया है...पहले प्यार करने वाले एक दूसरे को मिलने को...उसकी एक झलक पाने को बेताब रहते थे...एक दूसरे की शक्ल देखने को तरस जाया करते थे...जिससे प्यार होता था उसके घर के चक्कर लगाया करते थे...लेकिन आज किसके पास इतना वक्त है...आज सभी अपने अपने काम में व्यस्त हैं...और 'तू नहीं तो कोई और सही' की तर्ज पर कोई तीसरे की तुरंत तलाश कर लेते हैं...अब फोन पर नेट कनेक्शन उपलब्ध हैं...वहीं नेट के विडियो कॉन्फ्रेंसिग ने दूरियां भी मिटा दी है...फोन ने लोगों को काफी राहत दी है...और दूरसंचार कंपनियों ने लोगों को घंटो बात करने की सुविधा उपलब्ध करा दी है...जिससे लोग हर समय फोन से चिपके नज़र आते हैं...आज के समय में जिसके पास फोन नहीं आता वो खुद को व्यस्त करने के नए नए हथकंडे अपना लेते हैं...देखा जाए तो आजकल की लड़कियां बिना एक भी ब्यॉफ्रेंड के नहीं रह सकतीं...खासकर कॉलेज गोइंग गर्ल्स में तो ब्यॉफ्रेंड बनाने का क्रेज काफी फेमस है...वैसे सही भी है...लड़कियां ब्यॉफ्रेंड बनाकर ख़ुद को सुरक्षित महसूस करतीं हैं...एक लड़का हर वक्त उसकी ख़ैरियत पूछता है...उसका ख़्याल रखता है...इसमें बुरा भी क्या है...आजकल लड़के-लड़कियां बिना एक ख़ास फ्रेंड के जिना बेकार का जीना समझते हैं...
जब पहला-पहला प्यार होता है तो लड़कियां अपनी खूबसूरती को लेकर काफी सतर्क हो जाती हैं...वो ब्यूटी पार्लरों के चक्कर लगाने लगती हैं...तो वहीं लड़के अपने आप को जिम में व्यस्त कर लेते हैं...उनको अपनी पर्सनेलिटी की फिक्र होने लगती है...उसके बाद बारी आती है बाइक्स के क्रेज़ की...वैसे भी लड़कियों को इम्प्रैस करने में गाड़ियां काफी महत्वपूर्ण स्थान रखतीं है...धीरे-धीरे प्यार गहराने लगता है...लेकिन ये प्यार परवान कम ही चढ़ पाता है...
आज के समय में प्यार की परिभाषा बदल गई है...लोग प्यार को ज्यादा तरज़ीह नहीं देते...आज आपका जॉब ज्यादा मायने रखता है...ऐसा नहीं है कि प्यार करने वाले ख़त्म हो गए हैं...बल्कि प्यार में बचकानी हरकतों को छोड़ लोग अब गहन चिंतन के बाद ही कदम बढ़ाते हैं...हर तरह से नाप-तौल कर पूरी तरह खरा उतरने के बाद ही प्यार करते हैं...लड़कियां भले ही इनमें जल्दबाजी कर बैठे...लेकिन लड़के काफी सोच समझकर कोई फैसला लेते हैं...लड़कियां आज भी प्यार करने में दिल का इस्तेमाल करती हैं जबकि लड़के दिल का नहीं दिमाग का इस्तेमाल करते हैं...लड़कियां बहुत जल्दी जज्बाती हो जाती हैं...लेकिन लड़कों का दिल इस मामले में थोड़ा मज़बूत होता है...हम ये भी नहीं कह सकते कि लड़के सच्चा प्यार नहीं करते...लड़कों को भी कभी-कभी ही सही लेकिन किसी न किसी से सच्चा प्यार ज़रूर होता है...कहते हैं वो जवानी ही क्या जिसकी कोई कहानी न हो...सच ही तो है...एक लड़का अगर किसी से सच्चा प्यार कर बैठे तो उसे भी अपने प्यार को ख़ोने का उतना ही ग़म सताता है जितना एक लड़की अपने प्यार को खोने पर मातम मनाती है।
आपलोग प्लीज मेरे ब्लॉग पर अपनी प्रतिक्रिया जरुर भेजे....
आपके कमेन्ट्स के इंतजार में.................!!!!

सफलता हमारे हाथ में है.....




हर व्यक्ति की मूलभूत चाहत होती है कि उसके जीने के मायने हों। वह इतना सक्षम हो कि न केवल अपनी वरन अपने परिजनों-परिचितों की भी आवश्यकताओं एवं इच्छाओं की पूर्ति कर सके। समाज में उसका सम्माननीय स्थान हो। उसकी राय हर छोटे-बड़े काम में ली जाए। वह लोगों की सोच को अपनी इच्छानुसार प्रभावित कर सके।

सीधे शब्दों में कहें तो हर व्यक्ति चाहता है कि उसके पास काम, दाम, नाम, सम्मान और कमान सभी हो। जिस व्यक्ति के पास ये उपलब्धियाँ हों उसे सफल कहा जा सकता है। सफल का अर्थ है- स+फल = फल सहित, अर्थात उपलब्धि सहित, महत्व सहित। सफलता का अर्थ डिग्री पाना, नौकरी लगना, पैसा कमाना मात्र नहीं है। व्यक्ति की सामाजिक हैसियत एवं उपयोगिता भी उसकी सफलता की कसौटी है। इस बात को यूँ भी कहा जा सकता है कि यदि कोई व्यक्ति सफल होना चाहता है तो उसका उपरोक्त पाँच उपलब्धियों पर अधिकार होना चाहिए।

हम देखते हैं हमारे चारों ओर ऐसे कई लोग हैं, जो सफलता के लिए कठोर श्रम करते हैं पर सफलता कुछ गिने-चुने लोगों को ही मिलती है। हम इसे तकदीर का खेल कहते हैं। पर यदि विश्लेषणात्मक नजरिए से हम देखें तो पाएँगे कि सफल एवं असफल व्यक्तियों में एक मूलभूत अंतर है। यद्यपि कठोर श्रम दोनों करते हैं, पर सफल व्यक्तियों के पास एक स्पष्ट दृष्टिकोण होता है। वे अँधेरे में तीर नहीं चलाते। उन्हें प्रस्तुत समस्या की समझ होती है और उसके निदान की एक तर्कपरक, व्यावहारिक योजना होती है।

जहाँ दरवाजों से पहुँचा जा सकता है, वहाँ दीवारों में सिर टकराकर रास्ता बनाने की कोशिश करना कठोर श्रम का उदाहरण हो सकता है, पर साथ ही यह उदाहरण है वज्र मूर्र्खता का। कुछ सूत्र हैं जो उन दरवाजों की तरह हैं जिनसे सफलता के सिंहासन तक पहुँचा जा सकता है। ये दस सूत्र हैं-

कार्य पूर्ण लगन और उत्साह से करें
सफलता के मार्ग पर व्यक्ति की गाड़ी तभी तक चलती है, जब तक इसमें लगन एवं उत्साह का ईंधन होता है। लगन एवं उत्साह उत्पन्न होता है समर्पण एवं चाहत से। सफलता की पहली शर्त, पहला सूत्र यह है कि सफलता की ऐसी चाहत होनी चाहिए जैसे जीवन के लिए प्राणवायु की। सफलता का रहस्य ध्येय की दृढ़ता में है।

समय के पाबंद रहें
समय की महत्ता दर्शाते ढेरों कहावतें, मुहावरे दुनिया की लगभग हर भाषा में मिल जाएँगे। यह सत्य सभी मानेंगे कि समय अपनी चाल से चलता है न धीमा न तेज। समय उनके लिए अच्छा चलता प्रतीत होता है, जो समय के साथ चलते हैं और उनके लिए खराब चलता है, जो समय से पीछे चलते हैं या तेज भागने की कोशिश करते हैं। जब तक समय प्रबंधन (टाइम मैनेजमेंट) नहीं होता, तब तक समय हमारे नियंत्रण के बाहर चलता रहेगा। अतः दीर्घसूत्रता या काम का आज-कल पर टालमटोल नहीं होना चाहिए।

सिद्धांततः जीवन में वही सबसे अधिक सफल व्यक्ति है, जो सबसे अधिक जानकार है।
जो क्षेत्र हमारी दृष्टि परिधि में होता है हम साधारणतः उसी के प्रति सचेत एवं जागरूक होते हैं। यही बात हमारे दृष्टिकोण या नजरिए के बारे में भी सत्य है। हमारा कार्यक्षेत्र एवं नियंत्रण क्षेत्र बढ़ाने के लिए आवश्यक है कि हम अपना दृष्टिकोण व्यापक बनाएँ। अपने दृष्टिकोण को व्यापक बनाने का तरीका है अपने आँख-कान खोलकर रखना, बुद्धि को सूक्ष्म और हृदय को विशाल बनाना।


सकारात्मक दृष्टिकोण रखें
अँधेरे में रास्ता दिखाने हेतु एक दीपक पर्याप्त होता है। आशावाद के जहाज पर चढ़कर हम मुसीबतों एवं समस्याओं के तूफानों से उफनते असफलताओं के महासागर को भी पार कर सकते हैं।

अपनी क्षमताओं और कमजोरियों को पहचानें
हर व्यक्ति में कुछ न कुछ कमजोरियाँ होती हैं। शतरंज के खेल की तरह हमें हर कदम सोच-समझकर अपनी ताकत एवं सीमाओं का आकलन करते हुए उठाना चाहिए। हाँ, सावधानी शतरंज के खेल से भी अधिक रखनी चाहिए, क्योंकि जीवन कोई खेल नहीं है।

अपनी हार की संभावना समाप्त कर दें
जीत या सफलता सुनिश्चित करने का तरीका है हार की संभावना समाप्त कर देना। सफलता की तैयारी का महत्वपूर्ण भाग है उन कारकों को पहचानकर मूल से समाप्त कर देना जिनसे असफलता आ सकती है। ये वे कारक हैं, जो आपकी तैयारी की कमजोर कड़ी हैं। ये वे कारक हैं, जो लक्ष्य से आपका ध्यान विचलित कर सकते हैं। ये वे कारक हैं जिनका आपका प्रतिद्वंद्वी लाभ उठा सकता है। पराजय से बचना विजय ही को निमंत्रण है। नुकसानी की संभावना समाप्त होने पर ही नफे की शुरुआत है। इसी तरह असफलता की संभावना से रहित तैयारी ही सफलता की गारंटी है।

कार्यों से ही दूसरों का दिल जीता जा सकता है न कि महज शब्दों से
व्यक्ति का आचरण एवं उसके कर्म ही उसकी पहचान होते हैं। यदि हम दूसरों के हृदय में स्थायी जगह चाहते हैं तो इसका आधार हमारे ईमानदारीपूर्ण कर्म ही हो सकते हैं। महज शब्दों द्वारा अपनत्व बताना रेत पर बनी लकीरों की तरह होता है जिन्हें हर आती-जाती सागर की लहर बनाती-मिटाती रहती है। पर कर्म पाषाण पर उकेरी आकृति की तरह होता, जो एक स्थायी स्मृति बन जाता है।

ईमानदारी और उदारता को अपनी पहचान बनाएँ
कोई भी सामाजिक गतिविधि जनसहयोग के बगैर पूर्ण नहीं हो सकती। लोग तभी हमारे साथ रहेंगे जब उन्हें हमारी ईमानदारी पर भरोसा होगा और हमारा साथ उन्हें गरिमापूर्ण महसूस हो। बेईमानी, भय और उपेक्षा की नींव पर हम सहयोग की इमारत खड़ी नहीं कर सकते।

हमेशा खुश रहें दूसरों को भी खुश रखें
यह सूत्र जितना नैतिक एवं मानवीय मूल्य रखता है, उतना ही वैज्ञानिक मूल्य भी रखता है। मनोविज्ञान के अनुसार हम अपना श्रेष्ठ तभी दे सकते हैं या अपनी क्षमताओं का अधिकतम उपयोग तभी कर सकते हैं, जब हम सौहार्दपूर्ण तनावरहित वातावरण में काम कर रहे हों। जिस प्रकार जहाँ प्रकाश हो वहाँ अंधकार नहीं हो सकता, उसी प्रकार जहाँ खुशी हो, प्रसन्नता हो वहाँ तनाव नहीं हो सकता।

कभी दूसरों की नकल न करें
कमान उन्हीं के हाथों में होती है, नेता वही होते हैं, जो अपना मार्ग स्वयं निर्माण करते हैं और उस पर जनसमूह को ले जाते हैं। इतिहास ऐसे ही नेतृत्व को याद रखता है। अंधानुकरण कर भेड़चाल चलने वाले कभी सफल नहीं हो सकते। सफलता की रेखाएँ उन्हीं मनुष्यों के कपाल में अंकित हैं जिनके हृदय में नवीन आविष्कारों की आँधी पैदा हुआ करती है।

उपरोक्त दस सूत्र हमारे हाथों की दस उँगलियों की तरह हैं। जब दसों सूत्र एक साथ काम करते हैं, तब दोनों हाथों की मुट्ठियों की गिरफ्त में होता है सफलता का परचम।

ये सूत्र चमत्कारिक सफलता दे सकते हैं, पर मात्र सूत्र पढ़ने से चमत्कार नहीं हो सकता है। सतत प्रयास, अवलोकन और अभ्यास से ही सफलता के ये सूत्र सिद्ध हो सकते हैं। यहाँ यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि सफलता पाने में जितने कुशलता, संकल्प और श्रम की आवश्यकता होती है, उससे कहीं अधिक कुशलता, संकल्प और श्रम इस सफलता को बनाए रखने के लिए लगते हैं।

ये चेहरा किसका चेहरा है ?


सुबह- सुबह कितनी चीजें हैं ,जो हमारे मूड को अच्छा बनाने के लिये होती हैं , खुला आसमान ,ताजी हवा, मंदिर की घण्टी की आवाज, नदी की कल कल, पत्तों का धिमे धिमे हिलना ...।लेकिन कभी हमने ये गौर किया है कि जब हम बच्चों से बात करते हैं या उनके साथ समय बिताते हैं तो कितना बेहतर महसुस करते हैं ...क्यों होता है ऐसा ?
जवाब बहुत सिंपल है बच्चों के सामने हमें नकली चेहरा बनाकर नहीं जाना पडता है, इसलिये भी कि हम जानते हैं कि हमारी किसी भी बात का वो बुरा नहीं मानते हैं। हो सकता है कि वो कुछ देर के लिये रूठ जाये पर उसे मनाना भी उतना ही आसान होता है बस उसके सामने उसकी पसंद की चीज रख दो जैसे- चॉकलेट, कॉमिक्स, आइसक्रिम आदि। बच्चों की यही सरलता हमें अच्छा महसुस कराती है क्योंकि हम सब अपने नकाब के साथ कम्फर्टेबल नहीं होते, हम जानते हैं कि ये हमारा असली चेहरा नही हैं और यह झुठ ही हमारा बोझ होता है ,जिसे हम लाईफ टाईम कैरी करते हैं ।
एक बात बताइये हम हैवी महसुस नहीं करते ? लोगो का जवाब होता है क्या करुँ लोग बडा हर्ट करते हैं और मैं नहीं चाहता हूँ कि मुझे कोई बार बार हर्ट करें । मैं थक गया हूँ अब बर्दाश्त नहीं होता ।
लेकिन मैने सोचा कौन सा बोझ सबसे बडा है लोगो की दी हुई चोट या अपने चेहरे पर नकाब ओढने का यानी हर वक्त एक्टींग करने का ................?
इसका जवाब आप अपने कमेन्ट्स देकर दीजिये........।

songs .....i like most...


मुझे संगीत का शौक न जाने से कहाँ से लगा ये तो मैं नहीं जानता हूँ क्यों कि मुझे ये पता ही नहीं चला कि कब संगीत मेरी जिन्दगी का अहम हिस्सा बन गया। सोते जागते, खाते पीते उठते बैठते सब जगह संगीत ही संगीत....!
आज मैं आपको अपने कुछ प्रिय संगीत के बारे में बताता हूँ जो मैने पिछले कुछ दिनों से सुना है और मुझे वो दिल को छुने वाले लगते हैं।
सबसे पहले बात करता हूँ फिल्म " खट्टा मिठा " की, जिसका सजदा....गाना मुझे बहुत अच्छा लगता है ।
akhiyaanch basada tera ?? tera maahiye  sajade kiya hai laakhon laakhon duwaaye maangi paaya hai maine phir tujhe chaahat ki teri maine haq mein hawaaye maangi paaya hai maine phir tujhe tujhase hi dil yeh behala, tu jaise karma pehala chaahu na phir kyun main tujhe jis pal na chaaha tujhako uss pal sajaaye maangi paaya hai maine phir tujhe sajade kiya hai laakhon laakhon duwaaye maangi paaya hai maine phir tujhe  jaane tu saara woh dil mein jo mere ho padh le tu aake har dafa ho o o jaane tu saara woh dil mein jo mere ho padh le tu aake har dafa nakharein se na ji bhi hote hai raaji bhi tujhase hi hote hai khafa jaane tu baatein saari katati hai raatein saari jalate diye se an bujhe uth uthake raaton ko bhi teri wafaayein maangi paaya hai maine phir tujhe sajade kiya hai laakhon laakhon duwaaye maangi paaya hai maine phir tujhe  chaahat ke kaajal se kismat ke kaagaj pe apani wafaayein likh jara bole jamaana yuun, mein tere jaise hoon tu bhi toh mujhasa dikh jara mera hi saaya tu hai, mujhamein samaaya tu hai har pal yeh lagata hai mujhe  khud ko mitaaya maine, teri balaayein maangi paaya hai phir maine tujhe  chaaha tu chaahe mujhako, aise adaayein maangi paaya hai maine phir tujhe

इस गाने को गाया है के.के. और सुनिधी चौहान ने और संगीत निर्देशक हैं प्रितम।

एक और गाना जो मुझे बहुत अच्छा लगता है वो है "वन्स अपोन अ टाइम इन मुम्बई" का पी लूँ...
pee loon tere nile nile nainon se shabnam pee loon tere gile gile hoto ki sargam pee loon hai pine ka mausam (tere sang ishq taari hai, tere sang ik khumari hai tere sang chain bhi mujhako, tere sang bekraari hai) - (2) tere bin jee nahi lagada, tere bin jee nahi sakada tujhape hai haare maine vaare do jahaan kurbaan, meherbaan, ke main toh kurbaan sun le jara, tera kurbaan  hosh mein rahu kyun aaj main tu meri baahon mein simati hai, mujhame samaayi hai yuun jis tarah ki koyi hum nadi tu mere sine mein chhupati hai, sagar tumhara main hoon pee loon teri dhimi dhimi leharo ki chham chham pee loon teri saundi saundi saanso ko har dum pee loon hai pine ka mausam (tere sang ishq taari hai, tere sang ik khumari hai tere sang chain bhi mujhako, tere sang bekraari hai) - (2)  shaam ko milu jo main tujhe toh bura subah na jaane tu kuchh maan jaati hai yeh har lamaha, har ghadi, har pehar hi teri yaadon se tadapa ke, mujhako jalaati hai yeh pee loon main dhire dhire jalane ka yeh gum pee loon inn gore gore haantho se hum dum pee loon hai pine ka mausam (tere sang ishq taari hai, tere sang ik khumari hai tere sang chain bhi mujhako, tere sang bekraari hai) - (2) tere bin jee nahi lagada, tere bin jee nahi sakada tujhape hai haare maine vaare do jahaan kurbaan, meherbaan, ke main toh kurbaan sun le jara, tera kurbaan
इसे गाया है मोहित चौहान ने और संगीत दिया है प्रितम ने।
कुछ और गीत हैं लेकिन उसके बारे फिर कभी ......तब तक के लिये नमस्कार, सलाम , अदाब, प्रणाम, अलविदा.....

Monday, October 18, 2010

आज का युग और मोबाईल


"मुन्नी बदनाम हूई डार्लिंग तेरे लिये’’ यार! है तेरे मोबाईल में ये गाना, प्लीज ब्लूटूथ से सैंड कर ना।’’ यह किस्सा् मैं मेरे दोस्त शेखर का है। ऐसे कई वाकये हमारी ज़िदगी में आमतौर पर घटित होते हैं, मगर हम इन पर ध्यान नहीं देते हैं क्योंकि यह हमारी ज़िदगी का एक हिस्सा बन गये हैं। अगर हम भारत के इस संचार क्रांति युग से थोड़ा पीछे हरित क्रांति के युग में जाकर सोचे कि क्या इस तरह कल्पनाएँ उस समय लोगों द्वारा की जा सकती थी। जी हाँ, आज का यह संचार आधारित युग तत्कालीन समाज की कल्पना का ही प्रतिफल है।

                                                 संचार क्रांति ने हमें चूहे की आकृति का ऐसा दोस्त दिया है जिसके बगैर अब जीवन के बारे में सोचना भी मुमकिन नहीं है। जी हाँ, अब तो आप समझ ही गये होंगे कि यह चूहे की आकृति का हमारा दोस्त कोई और नहीं बल्कि हमारा मोबाइल फोन है। जिसने आज हमारे बीच की दूरियाँ को केवल कम ही नहीं किया, बल्कि हमें हर वक़्त एकदूसरे से जोड़े रखता है। यकीन मानिए इस मोबाइल फोन का संग ठीक "दोस्ती" फिल्म के अंधे -लंगड़े और "शोले" के जय-वीरू की दोस्ती को भी मात दे सकता है। मोबाइल जहाँ हमारे लिए एक प्यारा दोस्त है वहीं दूसरी तरफ यह उतना ही ख़तरनाक दुश्मन भी है। कॉलेज गर्ल नेहा की कुछ आपित्तजनक तस्वीरे इंटरनेट और दोस्तों के मोबाईल फोन पर मिली तो वो हैरान हो गई। मगर जल्द ही उसे याद आ गया कि यह तस्वीरे उसके पुराने प्रेमी ने अपने मोबाईल फोन से खिंची थी। इस तरह की घटनाओं से समाचार पत्र और न्यूज चनैल सरोबार नज़र आते हैं। आज आंतकवादियों, बड़ेबड़े माफियाओं से लेकर गली के गुड़े तक भी अलगअलग नम्बरों का प्रयोग कर लोगों को धमकाते हैं और अपने कारनामों को अंजाम तक पहुँचाते हैं। आज हर प्रकार की गतिविधी में मोबाईल का फोन का एक अहम् भूमिका अनिवार्य रूप में होती है। सर्वविदित निठारी कांड और आरूषि तलवार हत्याकांड में भी मोबाईल फोन के सहारे ही गुनहगारों को गिरफ्तार किया गया था। कुछ चालाक छात्र इसका प्रयोग परीक्षा में नकल करने के लिए करते हैं तो कुछ लड़कियों को अलग-अलग नम्बरों से फोन करके परेशान करते हैं। यह सारे कारनामे भी मोबाईल फोन के मदद ही किये जाते हैं।


मोबाईल फोन के कुछ ऐसे अनचाहे शारीरिक नुकसान हैं जिन्हें आप चाहकर भी रोक नहीं सकते हैं। कुछ दिनों पहले एक कैंसर रिसर्च इंस्टीटयूट के विशेषज्ञों की टीम ने घोषणा की थी कि मोबाइल का ज़रूरत से ज्यादा इस्तेमाल का कारण बन सकता है। इस संबंध में यूनिवर्सटी ऑफ पिट्सबर्ग कैंसर इंस्टीटयूट के डायरेक्टर डॉ. रोनाल्ड हर्बरमैंन ने अपने ही कर्मचारियों को एक संदेश भेजकर इस बात की जानकारी दी और उन्हें बेवजह मोबाइल इस्तेमाल करने से मना किया है। इस संबंध में शोधकर्ताओं द्वारा 10 सूत्री सलाह पेश की गई है। इसमें कहा गया है कि बच्चों को बहुत ज़्यादा ज़रूरी होने पर ही मोबाइल का इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि मोबाइल से निकलने वाला इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन उनके ब्रेन टिश्यू को जल्दी प्रभावित करता है। इसके अलावा जहाँ तक संभव हो मोबाइल को अपने शरीर के करीब नहीं रखना चाहिए, खासतौर से सोते वक्त। मोबाइल को चार्जिंग में लगाकर कभी भी बात नहीं करनी चाहिए। मोबाइल को सिर की मदद से कंधे पर दबा कर लगातार बात करने से गर्दन में कई परेशानियाँ पैदा हो सकती है।
लिहाजा यह कहा जा सकता है कि मोबाइल को लेकर इंसान की हालात ठीक उस तरह की हो गई है कि मोबाइल आस्तीन में छुपे उस सांप की तरह है जो दिखाई नहीं देता है। आजकल मोबाइल से किये जाने वाले प्यार ने इंसान को उस दहलीज पर लाकर खड़ा कर दिया है जहाँ आगे कुआँ और पीछे खाई है। लेकिन फिर भी मोबाईल से हम पूरी तरह मूँह नहीं मोड सकते हैं क्योंकि यह आज हमारी आवश्यक आवश्यकता बन गई है जिसके बिना जीवन की कल्पना तक नहीं की जा सकती है ।

इंटरनेट और आज


बहुत दिनों से सोचते-सोचते आज सोचा कि क्यों न अपने ब्लॉग पर कुछ लिखा जाय और मैंने निश्चय किया कि सबसे पहला ब्लॉग पोस्ट इंटरनेट के नाम रहना चाहिये क्योंकि इसके माध्यम से ही तो मैं आगे भी आपलोगों को अपने दिल की बात बताऊँगा । है ना...........!

इंटरनेट आज 40 साल का हो गया। मात्र चालीस सालों में इंटरनेट ने समूचे संचार जगत की बुनि‍यादी प्रकृति‍ ही बदल डाली है। 2सि‍तम्‍बर 1969 को लॉस एंजि‍ल्‍स स्‍थि‍त कैलीफोर्निया वि‍श्‍ववि‍द्यालय में 20 लोग क्‍लेनरॉक प्रयोगशाला में एकत्रि‍त हुए और उन्‍होंने इंटरनेट के प्रयोग का पहला नजारा देखा जि‍समें दो कम्‍प्‍यूटर अर्थहीन डाटा संप्रेषि‍त कर रहे थे,इन दोनों कम्‍यूटरों को 15 फुट लंबे तार से जोड़ा गया था। यह पहला सैन्‍य संचार प्रयोग था। कम्‍प्‍यूटर नेट शुरूआत थी। तब से लेकर आज तक 40 साल हो गए हैं। इन 40 सालों में इंटरनेट यूजरों की तादाद तेजी बढ़ी है।सन् 1999 में 25 करोड़ यूजर थे,सन् 2002 में 50 करोड़,सन्2006 में 100 करोड और सन् 2008 में 150 करोड यूजर दर्ज कि‍ए गए हैं। इसमें चीन में 29.8 करोड़ (22.4 प्रति‍शत),अमेरि‍का में 227 मि‍लि‍यन ( 74 प्रति‍शत) ,जापान में 94 मि‍लि‍यन (73.8 प्रति‍शत),भारत में 81 मि‍लि‍यन (7.1 प्रति‍शत)ब्राजील 68 मि‍लि‍यन (34.3 प्रति‍शत) , जर्मनी 55 मि‍लि‍यन ( 67 प्रति‍शत) , ब्रि‍टेन 48 मि‍लि‍यन (72 प्रति‍शत), फ्रांस 41 मि‍लि‍यन(66 प्रति‍शत), रूस 38 मि‍लि‍यन(27 प्रति‍शत),दक्षि‍ण कोरि‍या 37 मि‍लि‍यन (76 प्रति‍शत),आस्‍ट्रेलि‍या 17 मि‍लि‍यन ( 80.6 प्रति‍शत) यूजर हैं। इंटरनेट के आने के बाद वि‍मर्श्‍ा,लेखन,अखबार,साहि‍त्‍य, जीवनशैली, सैन्‍य नि‍यंत्रण,सैन्‍य संचालन, युद्ध ,वि‍कास आदि‍ की प्रकृति‍ में मूलगामी बदलाव आया है। संचार को रीयल टाइम में सम्‍पन्‍न करना संभव हुआ है। भवि‍ष्‍य में इंटरनेट का और भी तेज गति‍ से वि‍कास होगा,जो लोग इस माध्‍यम का इस्‍तेमाल नहीं कर रहे हैं वे भी इसका इस्‍तेमाल करेंगे। भारत में इसके वि‍कास की दर बेहद कम है। सकल जनसंख्‍या के मात्र सात प्रति‍शत हि‍स्‍से तक ही यह माध्‍यम पहुंच पाया है। इसका अर्थ यह भी है कि‍ भारत संचार क्रांति‍ से अभी कोसों दूर हैं। 100 लोगों में से मात्र 7 लोग ही नेट का इस्‍तेमाल करते हैं,लि‍खने का काम तो और भी कम लोग करते हैं। भारत में हि‍न्‍दी में स्‍थि‍ति‍यां ज्‍यादा सुखद नहीं है। ज्‍यादातर हिंदीभाषी राज्‍यों दस घंटे से लेकर 18 घंटे तक बि‍जली गायब रहती है, टेलीफोन कनेक्‍शनों की भी संख्‍या कम है। कहने का अर्थ यह है कि‍ हिदीभाषी समाज संचार क्रांति‍ में अभी शैशव अवस्‍था में है। हिंदी ब्‍लॉग लेखकों के तकरीबन दस हजार ब्‍लाग हैं।


इंटरनेट एक ऐसा विषय है जिसपर ना जाने कितनी बाते लिखी जा सकती हैं पर समयाभाव के कारण आज सिर्फ इतना ही आगे फिर कभी.......।