Friday, December 24, 2010

Value of love



Once upon a time, there was an island where all the feelings lived: Happiness, Sadness, Knowledge, and all of others, including love. one day it was announced to the feelings that the island would sink, so all constructed boats and left. Except for love . Love was the only one who stayed. love wanted to hold out untill the last possible moment.

when the island had almost sunk, love decided to ask for help. Richness was passing by love in a grand boat. Love said, "Richness, can you take me with you?" Richness answered,"No, i can't .There is a lot of gold and silver in my boat. There is no place here for you." Love decided to ask vanity who was also passing by in a beautiful vessel. "Vanity, please help me !"

"i can't help you, love you are all wet and might damage my boat," Vanity answered . Sadness was close by so love asked ,"Sadness, let me go with you." oh ......Love, i am so sad that i need to be by myself !" Happiness passed by love, too, but she was so happy that she did not even hear when love called her.

Suddenly, there was a voice ," it was an elder. so blessed and overjoyed, love even forgot to ask the elder where they were going. when they arrived at dry land, the elder went her own way. Realizing how much was owned the elder,love asked knoweldge, another elder," who helped me?" "it was time," knowledge answered. "Time?" asked loved. "But why did time help me?" knowledge smiled with deep wisdom and answered," Because only time is capable of understanding how valuable love is."

Give 2 Receive



A son and his father were walking in the mountains. suddenly, his son falls, hurts himself and screams: “AAAhhhhhhhhhhh!!!”


To his surprise, he hears the voice, somewhere in the mountain: “AAAhhhhhhhhhhh!!!”


curious, he yells: ” Who are you?” He receives the answer :”Who are you?”


Angered at the response, he screams: “coward!” He recieves the answer: ”coward!”


He looks at his father and asks: “what’s going on ?” The father smiles and says:” my son, pay attention.” And then he screams at the mountain: ” I admire you!” The voice answers.”I admire you!”


Again the man screams: ” you are a champion!” The voice answers. ” you are a champion!”


The boy is surprised, but does not understand. Then the father explains: “people call this an ‘echo’, but really this is ‘Life’.


It gives you back everything you say (or do).


Our life is simply a reflection of our actions.


If you want more love in the world, create more love in your heart.


If you want more competence in your team, improve your competence. This relationship appects of life. Life will give you back everything you have given to it.”


Your life is not a coincidence; it’s a reflection of you!!!

फॉलोअर बनने की नहीं लीडर बनने की सोचें !!


                                          “हम खुद की अपेक्षा दूसरों की ओर अधिक ध्यान देते हैं क्योंकि हमें खुद पर यकीन नहीं होता । मेरी नजर में इसके दो ही मुख्य कारण हो सकते हैं , या तो हम खुद को दूसरो की तुलना में कम आंकते हैं या तो हममें आत्मविश्वास की कमी होती है । किसी दूसरे ने कुछ नये तरीके की हेयर स्टाइल रखी या नये तरीके की शर्ट पहनी तो हम उसकी कॉपी करने लगते हैं। इस बात पर ध्यान दिये बिना कि हमारे शरीर पर क्या ठीक लगेगा ? बस दूसरे ने किया तो हम भी करेंगें । लेकिन इस तरह से हमारी अपनी पर्सनैलिटी दब जाती है । हम खुद को समाज में कहां खडा पायेंगे जब हमारी सारी चीजें दूसरों पर ही आधारित रहेगी ? जरूरत खुद को ऊपर लाने की है । हम कुछ ऐसा करें कि लोग हमारी बातों का अनुसरण करें ।इसके लिये हमें खुद पर भरोसा करना होगा । जब हम अपने पर विश्वास करने लगेंगे तभी हम समाज को कुछ दे पाने में सक्षम होंगे । फॉलोअर बन कर न तो हम खुद का भला कर सकेंगे और न ही देश का । इसलिये फॉलोअर बनने की नहीं लीडर बनने की सोचें ॥"

Thursday, December 23, 2010

नोकिया रहस्य (Nokia Secrets)


नोकिया फोन्स के कुछ और कोड्स नीचे दिये जा रहे हैं जो कि नोकिया फोन्स के रहस्यों को परत-दर-परत खोलती हैं:

(टिप्पणी: इन कोड्स का प्रयोग अच्छी तरह से समझ कर अपनी स्वयं की जिम्मेदारी से करें।)

*#4720#यह कोड Half Rate Codec’ को क्रियाशील कर देता है जिससे आपके नोकिया फोन की साउंड क्वालिटी तो अवश्य ही कम हो जाती है किन्तु टॉक टाइम लगभग 30% अधिक हो जाता है।
*#4720#यह कोड ‘Half Rate Codec’ को पुनः अक्रियाशील कर देता है।
*#9999#यदि *#0000# कोड काम नहीं करता है तो ‘Phones software version जानने के लिये इस कोड का प्रयोग करें।
*#3370#यह नोकिया कोड ‘Enhanced Full Rate Codec (EFR)’ को क्रियाशील (activate) कर देता है परिणामस्वरूप आपके नोकिया फोन की साउंड क्वालिटी अतिउत्तम हो जाती है किन्तु ‘टॉक टाइम’ (talk time) लगभग 5% कम हो जाता है
#3370#यह कोड ‘Enhanced Full Rate Codec (EFR)’ को पुनः अक्रियाशील (deactivate) कर देता है।
#pw+1234567890+1#‘Provider Lock Status’ जानने के लिये इस कोड का प्रयोग करें (“p,w” and “+” ‘symbols’ के लिये “*” बटन का प्रयोग करें)
#pw+1234567890+2#‘Network Lock Status जानने के लिये इस कोड का प्रयोग करें (“p,w” and “+” ‘symbols’ के लिये “*” बटन का प्रयोग करें)
#pw+1234567890+3#‘Country Lock Status’ जानने के लिये इस कोड का प्रयोग करें (“p,w” and “+” ‘symbols’ के लिये “*” बटन का प्रयोग करें)
#pw+1234567890+4#‘SIM Card Lock Status’ जानने के लिये इस कोड का प्रयोग करें (“p,w” and “+” ‘symbols’ के लिये “*” बटन का प्रयोग करें)
*#43#आपके समस्त “Call Waiting” स्टेटस (status) को प्रदर्शित करता है।
*#7760#मेनुफेक्चरर (Manufactures code) कोड को प्रदर्शित करता है।
*#7780#‘factory settings’ को रेस्टोर (restore) करता है।
*#147#इस कोड से आप जान सकते हैं कि पिछला कॉल आपको किसने किया था। (सिर्फ vodofone के लिये)
*#21#इस कोड से आप जान सकते हैं कि आपके सारे कॉल्स किस नम्बर में डाइव्हर्ट (divert) किये गये है।
*#2640#वर्तमान में प्रयोग किये जा रहे ‘phone security code’ को प्रदर्शित करता है।
*#30#व्यक्तिगत नम्बर (private number) को प्रदर्शित करता है।

Tuesday, December 21, 2010

भूत-प्रेत




मुझे व्यक्तिगत तौर पर तो भूतों पर कोई विश्वास नहीं है लेकिन जितना भी भतों के बारे में जानकारी है वो सब राजकुमार कोहली, रामसे बंधुओं और रामगोपाल वर्मा और कुछ हॉलीवुड के फिल्मकारों के कारण ही है। इन्हीं लोगों ने फिल्में बनाकर हमें जागरुक किया है कि भूत होते हैं, कैसे दिखते हैं, किस प्रकार लोगो के उपर आ जाते हैं, किस प्रकार वो अपने दुश्मनों से बदला लेते है आदि आदि। इसके अलावा सत्य कथा और मनोहर कहानियां भी इस प्रकार की बातो को प्रकाशित करते रहे हैं जिसमे बताया जाता रहा कि कैसे किसी के उपर भत आ गया और कैसे बहेड़ी के मौलवी साहब ने उसको काबू में किया इत्यादि इत्यादि। मै तो तो इन्हीं फिल्मकारों और प्रकाशकों की रचनाओं को ही प्रमाणिक मानकर चलता हूं और इन्हे ही भूतों का विशेषज्ञ समझता हूं और उसी के आधार पर मेरी कुछ धारणायें हैं और भूतों से कुछ शिकायतें भी हैं ।

  1. भूत-प्रेत हमेशा गरीबों को ही परेशान करते हैं। देखिये फिल्मों मे भी या असल जिंदगी में (सत्य कथा और मनोहर कहानियां के आधार पर) किसी गांव के किसी आदमी या औरत के उपर भूत आ गया। क्या आपने कभी पढ़ा या सुना कि दिल्ली, मंबई के किसी टाटा, बिड़ला, अंबानी, बच्चन, कपूर, गांधी के घर में कोई भूत की प्रवेश करने की हिम्मत भी हुई हो? तो हम क्यों न माने की भूत का जोर भी बस गरीब पर ही है।
  2. भूत हमेशा अपने अपमान का बदला लेता है। अब हमने तो फिल्मों और कहानियों मे ये ही पढ़ा है। लेकिन असल जिन्दगी मैंने कभी नहीं पढ़ा कि किसी भूत ने अपनी मौत का बदला ओसामा बिन लादेन, वीरप्पन, प्रभाकरण, चंगेज खां, तालीबान इत्यादि से लिया हो। तो क्या भूत भी बड़े-बड़े आतंकवादियों और अपराधियों से डरते हैं?
  3. कुछ भूत अच्छे होते है । हो सकता है कि अच्छे होते हों लेकिन कभी भी बुरे आदमी को ऊतों से परेशान होते नहीं सुना। कितनी ही आतंकी घटनायें जैसे कि 9/11, 7/7, 26/11 इत्यादि हईं, कितने ही जुल्मी लोग इतिहास में हुये लेकिन किसी को भी भूतों ने परेशान नहीं किया। क्या अच्छे भूतो को आतंकियो, डकैतों, जुल्मियों को परेशान नहीं करना चाहिये था?
  4. भूत सुनसान, उजाड़ जगह व जंगल वगैरह में रहते हैं। ऐसी ही जगहों पर आतंकवादी, डाकू, चोर, लुटेरे रहते हैं, लेकिन उनको कोई भूत नहीं दिखता लेकिन यदि कोई सीधा-सादा गांव वाला अगर उधर चला जाये तो उसे परेशान कर देते हैं। बहुत नाइंसाफी है ये । क्या आप लोगो ने कभी ऐसा सोचा है यदि नहीं सोचा तो आज ही सोचिये और मुझे अपनी सोच से अवगत जरूर कराईये ,तब तक के लिये अलविदा......

सफलता और संतुष्टि !!




नमस्कार मित्रों .....
समय की कमी के कारण आप लोगों से कुछ दिनों के बाद मिलना हो रहा हैं...
क्या आप अपने जीवन से संतुष्ट हैं ?
सफलता और संतुष्टि के बीच का संबंध क्या है ?
क्या संतुष्टि और सुख एक दूसरे के पूरक हैं ?

सुखिया ये संसार है खावे अरू सोये, दुखिया दास कबीर है जागे अरू रोये।


ऐसे कितने ही सवाल हमारे सामने प्रतिदिन आते हैं और हम अक्सर उन्हें टालकर अथवा बिना विचारे कोई दार्शनिक तर्क देकर आगे बढ जाते हैं। लेकिन उसके बाद भी ये प्रश्न हमारा पीछा नहीं छोड़ते हैं। मेरी समझ में सुख और संतुष्टि दोनो ही आपके "मन", "विचार" और "कर्मों" के आपसी संतुलन और साम्य पर निर्भर करती है। कम से कम मेरे जीवन में ये साम्य और संतुलन अभी स्थापित नहीं हो सका है; इस दिशा में प्रयासरत अवश्य हूँ देखिए कब मेहनत रंग लाती है।

कथनी और करनी का अंतर, विचार और आचार की भिन्नता, स्वयं के व्यवहार पर खिन्नता और मन के अन्दर सदैव चलने वाला अंतर्कलह सब एक ही तो हैं। बात बड़ी सरल सी लगती है और सरल बात इतनी आसानी से समझ नहीं आती।

इस छोटे से जीवन में मुझे कुछ विलक्षण प्रतिभा के धनी महापुरुषों के साथ कुछ समय बिताने का सुअवसर मिला और उन सभी के व्यक्तित्व में मुझे एक बात समान लगी, उन सब के आचरण और व्यवहार में मुझे एक अजीब सी सहजता दिखी। बहुत से लोग अपने व्यक्तित्व में इस सहजता को जबरन ठूँसने का प्रयास करते हैं। लेकिन ये प्रयास उसी प्रकार असफल हो जाते हैं जैसे कि युवाओं में "कूल" दिखने के प्रयास। किसी ने कहा है कि अगर आप "कूल" हैं तो आपको "कूल" दिखने के किसी प्रयास की आवश्यकता नहीं है। उसी प्रकार व्यवहार और आचरण की सहजता अपने आप ही आती है। आप इस प्रकार के आचरण का झूठा लबादा देर तक नहीं ओढ़ सकते। आपके मन और चरित्र की दुर्बलातायें उस ओढे हुये लबादे तो तार तार करने में देर नहीं लगाती ।

अब प्रश्न ये उठता है कि क्या इस प्रकार की व्यवहार की सहजता को प्रयास से अर्जित किया जा सकता है ? क्या निरन्तर प्रयास के द्वारा आप सच जैसा दिखने वाला झूठा लबादा ओढ सकते हैं ? इस प्रकार के प्रयासो का आपके व्यक्तित्व और मानसिक स्थिति पर क्या प्रभाव पड सकता है ? दूसरों को जताना कि आप बडे सहज हैं आसान है; लेकिन स्वयं के मस्तिष्क को इतना ट्रेन करना कि आप झूठा लबादा सहजता से ओढे रहें अलग बात है । मेरी राय में ऐसे प्रयासों का सफल होना मुश्किल है लेकिन असंभव नहीं । इसके अलावा अगर आप इस प्रकार की झूठी सहजता को ओढने में सफ़ल हो भी जायें तो भी दोहरा जीवन जीने की विडम्बना के रूप में एक कीमत आपको देनी ही पडती है ।

जिस व्यक्ति से आपको घृणा होती है उसके व्यक्तित्व की कोई ऐसी बात होती है जो आप स्वयं में भी पाते हैं (दूसरे लोग ये जानते हों जरूरी नहीं है ), और यही बात आपको कभी कभी बहुत परेशान करती है ।

ज्यादा सोचने वाला विषय तो नहीं है लेकिन यदि आप इसपर विचार करें तो और भी अच्छा होगा ।
तब तक के लिए नमस्कार........